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Malaria Report India: दुनिया के 80 देशों में ‘मलेरिया’ का आतंक, भारत में केवल 12% लोगों पर खतरा

Malaria Report India: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 80 देशों में अभी भी मलेरिया का आतंक हैं। जानिए कैसे भारत में मलेरिया के मामले 2 करोड़ से घटकर 20 लाख सालाना तक आ गए और देश की कितनी आबादी आज भी खतरे में है।

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Apr 29, 2026
मलेरिया मच्छर' का आतंक,

Malaria Report India: दुनिया भर में आज भी मलेरिया एक बहुत बड़ी और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की रिपोर्ट अनुसार दुनिया में कई देश आज भी इस खतरनाक बीमारी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। वहीं भारत ने मलेरिया (Malaria in India) का प्रकोप कम करने में काफी हद तक सफलता पा ली है। कुछ साल पहले भारत में मलेरिया के बहुत ज्यादा मामले आते थे, जिससे लाखों लोग बीमार पड़ते थे और कई लोगों की जान चली जाती थी, लेकिन अब बेहतर इलाज, जागरूकता और सरकारी प्रयासों की वजह से मलेरिया के मामलों में काफी कमी आई है।

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अभी भी 80 देश मलेरिया की जद में

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2000 में दुनिया के 108 देशों में मलेरिया फैला हुआ था, लेकिन 2024 तक यह घटकर 80 देशों में रह गया है ,दुनिया के लिए यह एक अच्छी और बड़ी प्रगति मानी जा रही है। ‘तिमोर-लेस्ते’ और ‘सूरीनाम’ जैसे देशों को 2025 तक मलेरिया मुक्त भी घोषित किया जा चुका है, जिससे साफ है कि दुनिया धीरे-धीरे इस बीमारी पर काबू पा रही है। भारत अभी भी उन 80 देशों में शामिल है जहां मलेरिया के मामले मिलते हैं, लेकिन अगर देश के अंदर के आंकड़ों को देखें तो भारत ने इस बीमारी को काफी हद तक कम कर लिया है, जिसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है।

मलेरिया के खिलाफ बड़ी सफलता

भारत में साल 2010 के आसपास मलेरिया के कारण हालात काफी ज्यादा ख़राब थे। आंकड़ों के मुताबिक, मलेरिया के मामले करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) तक पहुंच गए थे और अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहती थीं। 2011 के बाद मलेरिया के मामलों में तेजी से कमी आने लगी। साल 2023 तक आते-आते यह आंकड़ा 2 करोड़ से गिरकर सिर्फ 20 लाख (2 मिलियन) अनुमानित मामलों तक आ गया। वहीं दर्ज मामलों (Confirmed Cases) की बात करें, तो 2023 में पूरे भारत में सिर्फ 2 लाख 27 हजार 564 मामले ही सामने आए। साल 2010 में अस्पतालों में भर्ती मरीजों (Inpatients) की मौत का आंकड़ा 1000 के पार रहता था। वहीं 2023 में सिर्फ 83 मौतें दर्ज हुई हैं। इससे साफ होता है कि भारत ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल की है।

12% लोगों पर अभी भी खतरा है

भारत जैसे 140 करोड़ (1.4 बिलियन) की आबादी वाले बड़े देश में मलेरिया का खतरा अब पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। डब्लूएचओ (WHO) ने भारत की कुल 1.4 अरब आबादी को तीन हिस्सों में बांटा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 81 प्रतिशत आबादी करीब 1.2 अरब (120 करोड़) लोग 'लो ट्रांसमिशन' वाले इलाके में रहते हैं, जहां मलेरिया फैलने का खतरा बेहद कम है। इसके अलावा देश के 9.43 करोड़ (करीब 7 प्रतिशत) लोग ऐसे सुरक्षित इलाकों में रहते हैं जो पूरी तरह से 'मलेरिया फ्री' हो चुके हैं। लेकिन 12 % लोगों करीब 17.45 करोड़ आबादी ऐसे 'हाई ट्रांसमिशन' वाले इलाकों में रहते हैं, जहां हर 1000 लोगों पर 1 से ज्यादा केस मिलने का खतरा बना रहता है। यह वो इलाके हैं जहां सरकार को और भी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।

प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के 61% मामले

भारत में मलेरिया फैलने के पीछे मुख्य तौर पर दो तरह के परजीवी जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मिलने वाले मलेरिया मरीजों में सबसे ज्यादा 61% मामले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (P. falciparum) के हैं, जिसे मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है। इसके अलावा 'प्लास्मोडियम वाइवैक्स' (P. vivax) नाम का परजीवी भी भारत में काफी सक्रिय है, जिसके 39 % मामले दर्ज किए गए हैं। इन दोनों मच्छरों का प्रकोप ज्यादातर देश के उन हिस्सों में देखा जाता है जहां बारिश का पानी ज्यादा जमा होता है या जो घने जंगली इलाके हैं।

मलेरिया के खिलाफ जंग तेज

भारत सरकार ने मलेरिया को काबू करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं ,सरकार ने जांच और इलाज दोनों आम लोगों के लिए आसान और मुफ्त कर दिए। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2006 से ही पब्लिक सेक्टर के अस्पतालों में मलेरिया की सबसे असरदार दवा (ACT) बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए बिल्कुल मुफ्त कर दी गई। इसके बाद साल 2013 में खून की तुरंत जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली 'रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट' (RDT) किट भी मुफ्त उपलब्ध कराई गई जिससे समय पर इलाज शुरू हो जाए। मरीज को न जांच के लिए पैसे देने पड़े, न दवा के लिए। साल 2007 से ही सरकार ने 'कीटनाशक वाली खास मच्छरदानियां' (ITNs) मुफ्त में बांटने का बड़ा अभियान शुरू कर दिया था। इसके साथ ही, साल 1960 से ही घरों के अंदर कीटनाशक दवा के छिड़काव (IRS) की जो नीति चली आ रही थी, उसे और भी मजबूती से लागू किया गया।

भारत पूरी तरह मलेरिया मुक्त!

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मलेरिया के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। वहीं सरकार ने लोगों से अपील की है कि घर के आसपास पुराने कूलर, खाली टायर, गमलों या किसी भी बर्तन में पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही जगह मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनती हैं। रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल आज भी सबसे असरदार बचाव माना जाता है। अगर घर में किसी को तेज बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। अगर भारत 2 करोड़ मामलों को घटाकर 20 लाख तक ला सकता है, तो वह दिन भी दूर नहीं जब देश पूरी तरह मलेरिया मुक्त कहलाएगा।

मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो हर साल हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेती है। मौसम बदलते ही इसका खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई सवालों को लेकर हमने बात की Dr. Rishav Bansal से। उन्होंने मलेरिया के लक्षणों और इससे बचाव को लेकर अहम जानकारी दी।

मलेरिया के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

डॉ. ऋषव बंसल ने बताया कि मलेरिया की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी आना और ज्यादा पसीना आने से होती है। इसके साथ सिर दर्द, कमजोरी, बदन दर्द, उल्टी या घबराहट भी हो सकती है।

मलेरिया की शंका कितने दिनों तक बुखार आने पर करना चाहिए?

उन्होंने कहा कि अगर बुखार 2 से 3 दिन से ज्यादा रहे, बार-बार आए या ठंड लगकर तेज बुखार चढ़े, तो मलेरिया का शक हो सकता है। कई मामलों में बुखार 3 से 7 दिन या उससे ज्यादा भी रह सकता है। ऐसे में देरी न करें और टेस्ट कराएं।

क्या दवा के कोई साइड इफेक्ट्स होते हैं?

उन्होंने बताया कि मलेरिया की दवाइयां आमतौर पर सुरक्षित होती हैं और ज्यादातर लोगों को कोई बड़ी परेशानी नहीं होती। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना घातक हो सकता है।

मलेरिया कब खतरनाक हो सकता है?

अगर इलाज समय पर न मिले तो मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है। कुछ मामलों में यह दिमाग, किडनी या शरीर के दूसरे अंगों पर असर डाल सकता है। ज्यादा कमजोरी, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत या लगातार तेज बुखार हो तो यह खतरनाक संकेत हो सकते हैं।

किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

हां , अगर बहुत तेज बुखार हो, बार-बार उल्टी हो, शरीर में पानी की कमी लगे, मरीज सुस्त हो जाए, सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना खतरनाक हो सकता है।

अगर पहले मलेरिया हो चुका है, तो क्या दोबारा खतरा बढ़ जाता है?

एक बार मलेरिया होने के बाद भी दोबारा हो सकता है। शरीर में थोड़ी प्रतिरोधक क्षमता बन सकती है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए बचाव और सतर्कता जरूरी है।

मलेरिया से बचने के सबसे अच्छे तरीके क्या हैं?

घर और आसपास साफ-सफाई रखें। पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। पूरे कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाली क्रीम या मशीन का उपयोग करें। सबसे जरूरी है मच्छरों से बचाव और समय पर इलाज।

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Updated on:
29 Apr 2026 12:46 pm
Published on:
29 Apr 2026 12:45 pm
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