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Iran Israel War :11 शीर्ष नेताओं की मौत के बाद भी ईरान के हौसले बुलंद! अमेरिका क्यों तय कर रहा युद्ध की टाइमलाइन?

Iran-Israel War 2026: ईरान अपने नेताओं या नागरिकों की हत्या की खबरों की आगे बढ़कर पुष्टि कर रहा है लेकिन इजराइल-अमेरिका इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। अपने इतने शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बावजूद ईरान के नेता बंकर में शरण लेने नहीं पहुंच रहे हैं। ईरान अपनी शहादत की संस्कृति की ताकत के बल पर लड़ाई से पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं है, वहीं अमेरिका युद्ध की डेटलाइन तय कर रहा है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

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Mar 19, 2026
इजराइल-अमेरिका के साथ ईरान का युद्ध लंबा खींचता जा रहा है। (Photo:IANS)

Iran Israel War 2026: 28 फरवरी से लेकर अबतक इजरायली-अमेरिकी हमलों में ईरान (Israel-America Attacked Iran) के करीब एक दर्जन सुप्रीम लीडर मारे जा चुके हैं। इजरायल-अमेरिका लगातार यह दावा कर रहा है कि अब यह युद्ध खत्म होने वाला है। किसी भी देश के शीर्ष एक दर्जन नेता मारे जाने के बाद क्या युद्ध चलाना वाकई आसान काम होता है? इसका आसान उत्तर नहीं ही ज्यादातर लोग सोचेंगे। लेकिन क्या सचमुच में युद्ध खत्म होने वाला है? क्या ईरान वाकई में अमेरिका-इजरायल के आगे सरेंडर कर देगा?

अब तक मारे गए ईरान के 11 शीर्ष नेता

इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान (Israel-America Vs Iran War) के इस युद्ध में 28 फरवरी को ही एक साथ ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei Killed on 28th February 2026) , मोहम्मद शिराजी, सालेह असदी, गोलामरेजा रेजाईन, मोहम्मद पाकपोर, अजीज नासिरजादेह, अब्दुलरहीम मौसवी और अली शामखानी मारे गए। इसके बाद 17 और 18 मार्च 2026 के हमलों में ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से अली लारीजानी (Ali Larijani Killed on 17th March 2026) , घोलामरेजा सोलेमानी और इस्माइल खतीब मारे जा चुके हैं। आइए सबसे पहले हम यह जानते हैं कि इजरायली-अमेरिका के हमलों में जो ईरानी नेता मारे गए, वो कौन थे। उनकी ताकत क्या थी? अयातुल्ला अली खामेनेई से लेकर इस्माइल खतीब के मारे जाने के बाद ईरान में उनकी मातमपुर्सी में शामिल होने वालों की भीड़ में लगातार इजाफा हो रहा है।

अयातुल्ला अमेरिका और इजराइल का कट्टर आलोचक था

अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से लगातर 36 वर्षों तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे। उनके पास सेना, न्यायपालिका और विदेश नीति पर अंतिम नियंत्रण था। वे इस्लामिक क्रांति के प्रमुख नेताओं में से थे। वह रूहोल्लाह खुमैनी के उत्तराधिकारी बने। उनके नेतृत्व में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत किया। वे अमेरिका और इज़राइल के कट्टर आलोचक थे। उनकी सख्त नीतियों ने ईरान को पश्चिम से टकराव की राह पर हमेशा से रखा और देश की राजनीतिक दिशा को दशकों तक प्रभावित किया।

(Photo: IANS)

खामेनेई के विश्वसनीय नेताओं में से एक थे मोहम्मद शिराज़ी

मोहम्मद शिराज़ी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के सैन्य कार्यालय के प्रमुख थे और सेना और नेतृत्व के बीच मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाते थे। वे दशकों तक इस संवेदनशील पद पर रहे और उन्हें अत्यंत विश्वसनीय अधिकारी माना जाता था। उनका काम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और पारंपरिक सेना के बीच तालमेल बनाए रखना था। वे पर्दे के पीछे रहकर रणनीतिक निर्णयों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। ईरान की सैन्य संरचना को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका सर्वोच्च थी।

केंद्रीय सैन्य मुख्यालय में खुफिया प्रमुख थे सालेह असदी

सालेह असदी ईरान के 'खातम-अल-अंबिया' केंद्रीय सैन्य मुख्यालय में खुफिया प्रमुख थे। यह मुख्यालय युद्धकालीन संचालन और आपातकालीन सैन्य समन्वय का केंद्र माना जाता है। असदी का काम देश के भीतर और बाहर से आने वाले सुरक्षा खतरों का विश्लेषण करना और सैन्य नेतृत्व को रणनीतिक जानकारी देना था। वे अत्यधिक गोपनीय अभियानों और खुफिया नेटवर्क के संचालन में शामिल थे। उनकी भूमिका ने उन्हें ईरान की सुरक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बना दिया था।

पुलिस खुफिया यूनिय के प्रमुख थे गोलामरेजा रेज़ाईन

गोलामरेजा रेजाईन ईरान की पुलिस खुफिया इकाई (SAFA) के प्रमुख थे। वे देश के अंदर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और विरोध प्रदर्शनों पर नियंत्रण के लिए जिम्मेदार थे। उनका काम संभावित आंतरिक खतरों को पहचानना और उन्हें समय रहते निष्क्रिय करना था। उन्होंने देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकार विरोधी गतिविधियों को रोकने में अहम भूमिका निभाई। उनकी जिम्मेदारी ईरान की आंतरिक स्थिरता को बनाए रखना थी।

आईआरजीसी प्रमुख थे मोहम्मद पाकपोर

मोहम्मद पाकपोर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख थे। यह ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था है। वे क्षेत्रीय सैन्य अभियानों और प्रॉक्सी नेटवर्क के संचालन के लिए जाने जाते थे। उन्होंने इराक और सीरिया में ईरान समर्थित बलों का नेतृत्व किया। उनकी रणनीति आक्रामक और प्रभाव विस्तार पर आधारित थी।वे ईरान की विदेश नीति को आईआरजीसी के जरिए जमीन पर लागू करते रहे। वे ईरान की सैन्य शक्ति के प्रमुख चेहरों में से एक थे।

रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह ने ईरानी सेना को आधुनिक बनाया

अजीज नासिरजादेह ईरान के रक्षा मंत्री थे। वह रक्षा मंत्री बनने से पहले देश के वायुसेना प्रमुख रह चुके थे। वे आधुनिक सैन्य तकनीक, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम के विशेषज्ञ माने जाते थे। उनके नेतृत्व में ईरान ने अपनी हवाई रक्षा क्षमता को मजबूत किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रक्षा सहयोग बढ़ाने में भी भूमिका निभाई। वे तकनीकी रूप से दक्ष और रणनीतिक सोच वाले नेता थे, जिन्होंने ईरान की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने में योगदान दिया।

ईरान की 'आर्तेश' के शीर्ष कमांडर थे अब्दुलरहीम मौसवी

अब्दुलरहीम मौसवी ईरान की नियमित सेना आर्तेश (Artesh) के शीर्ष कमांडर थे। मौसमी के पास ईरान-इराक युद्ध को नेतृत्व देने का अनुभव था। उन्हें जमीनी युद्ध रणनीति के विशेषज्ञ माना जाता था। उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण और संगठनात्मक सुधारों पर काम किया। उनका ध्यान पारंपरिक सैन्य शक्ति को मजबूत करने पर था। वे अनुशासन और रणनीतिक नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। उनकी भूमिका ईरान की रक्षा संरचना में अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

अली शामखानी ने परमाणु वार्ताओं में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

अली शामखानी ईरान के शीर्ष सुरक्षा रणनीतिकार और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व सचिव थे। शामखानी परमाणु वार्ताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। उन्होंने कई वर्षों तक ईरान की रक्षा और विदेश नीति को दिशा दी। वे सैन्य और कूटनीतिक दोनों क्षेत्रों में अनुभवी थे। उनकी पहचान एक संतुलित और व्यावहारिक रणनीतिकार के रूप में थी, जो अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भी सक्रिय रहते थे।

खामेनेई के बाद ईरान में अली लारीजानी का था दबदबा

अली लारीजानी ईरान के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व संसद अध्यक्ष थे। वे परमाणु वार्ताकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ माने जाते थे। उन्होंने कई वर्षों तक ईरान की विधायी और सुरक्षा नीतियों को प्रभावित किया। वे एक शिक्षित और प्रभावशाली नेता थे, जिनकी विदेश नीति पर मजबूत पकड़ थी। खामेनेई के करीबी सहयोगी होने के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति बेहद मजबूत थी।

(Photo : Xinhua via IANS)

पैरामिलिट्री फोर्स के प्रमुख रहे घोलामरेजा सोलेमानी

घोलामरेजा सोलेमानी बसीज (Basij) पैरामिलिट्री फोर्स के प्रमुख थे। यह संगठन आंतरिक सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में सरकार का समर्थन करता है। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। वे IRGC से जुड़े थे और सरकार के प्रति वफादार माने जाते थे। उनकी भूमिका घरेलू सुरक्षा तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

ईरान के खुफिया मंत्री थे इस्माइल खतीब

इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे और देश की आंतरिक व बाहरी खुफिया एजेंसियों का नेतृत्व करते थे। वे जासूसी नेटवर्क, साइबर ऑपरेशन और सुरक्षा रणनीतियों के संचालन के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने सरकार विरोधी गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गोपनीय अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों के प्रमुख चेहरे थे। उनकी भूमिका ईरान की सुरक्षा प्रणाली के केंद्र में थी।

ईरान अपने शीर्ष नेता के मारे जाने के बाद भी लड़ने को तैयार

ईरान के सुप्रीम लीडर समेत 11 प्रमुख नेताओं के मारे जाने के बावजूद उसके हौसले पस्त होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने अपने नेताओं के मारे जाने की खबर छिपाने की बजाय, आगे बढ़कर हमेशा उसकी पुष्टि की है। ऐसा इसलिए है कि ईरान शहादत को मानने वाला देश है। अयातुल्ला खामेनेई समेत कई ईरानी शीर्ष नेताओं की हत्या के बावजूद अली लारीजानी या अन्य नेताओं ने बंकर में छिपने का विकल्प नहीं चुना। लारीजानी अपनी हत्या के कुछ दिनों पहले सार्वजनिक जगह पर खुलेआम घूमते हुए नजर आए। ईरान अपने इतने बड़े नेताओं की हत्या के बावजूद सरेंडर करने की बजाय खुलेआम युद्ध के पूरे मूड में है जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी कुश देसाई ने अल-जज़ीरा से कहा कि यह जंग 4-6 सप्ताह तक चल सकती है। इस टिप्पणी से साफ जाहिर होता है कि अमेरिका इस टाइमलाइन तक के युद्ध के लिए तैयार है।

(Photo: Xinhua via IANS)

क्या वियतनाम की तरह ईरान से 'मुंह की खाएगा' अमेरिका?

ईरान पिछले कुछ दिनों से हर रोज औसतन 63 ड्रोन और 30 मिसाइलें दाग रहा है। ईरान के नेताओं के बयान के अनुसार, अब यह संख्या और बढ़ सकती है। ईरान ने पिछले 3-4 दिनों से अमेरिका के रिफ़्यूलिंग टैंकर, हैंगर, ऐसी जगहें जहां से अमेरिकी विमान ऑपरेट कर रहे हैं, बड़ी कंपनियों के दफ़्तर, और इज़रायल में तेल अवीव के अलावा लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों को टारगेट किया है। इन सब जगहों की अलग-अलग अहमियत हैं। ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी-इजराइली मनसूबों के लिहाज के उलट ईरान भी अब अमेरिका नहीं, तो कम से कम इज़रायल के कुछ टॉप लीडर को मारकर ही दम लेगा। क्या यह युद्ध भी अमेरिका के लिए वियतनाम की तरह 'मुंह की खाने' की तर्ज पर आगे बढ़ती हुई तो नहीं दिख रही है? इसका जवाब तो भविष्य ही बता पाएगा।

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