Narges Mohammadi: नरगिस मोहम्मदी एक बार फिर से सुर्खियों में है। दरअसल, उन्हें जेल में हृदय संबंधी समस्या आई और उसके बाद वह बेहोश हो गईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। नरगिस मोहम्मदी कौन हैं? उन्हें जेल में किन आरोपों में डाला गया? क्या है उनकी संघर्ष कथा, आइए जानते हैं।
Narges Mohammadi News: नरगिस मोहम्मदी को जेल के अंदर हृदय संबंधी समस्या पैदा हुई और चक्कर खाकर गिर गईं। उनके पति ताघी रहमानी (Taghi Rahmani) ने मीडिया को बताया, 'नरगिस जंजान शहर के जेल में बंद थी। उन्हें हृदय संबंधी दिक्कतें आईं और वह बेहोश हो गईं। हम उनके लिए बेहद चिंतित हैं। वह जेल के अंदर कई बार बेहोश हो चुकी हैं। उन्हें जंजान के एक अस्पताल के आईसीयू (Narges Mohammadi in Hospital) में भर्ती किया गया। हमने और नर्गिस के वकील ने सरकर से बेहद सरल अपील की है कि उन्हें देश की राजधानी तेहरान के बेहतर अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया है।
रहमानी ने कहा कि परिवार को उनके जीवन को लेकर गंभीर आशंका है और उन्होंने ईरानी अधिकारियों से दया की अपील की है। रहमानी 'नरगिस फाउंडेशन' चलाते हैं। रहमानी खुद ईरान से निर्वासित होकर फ्रांस की राजधानी पेरिस में अपने बच्चों के साथ रहते हैं।
नरगिस मोहम्मदी के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए यह लिखा गया है, 'नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को 140 दिनों तक व्यवस्थित रूप से चिकित्सा देखभाल से वंचित रखने के बाद ज़ंजान के अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। नरगिस फाउंडेशन को जानकारी मिली है कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को आज उनकी सेहत में गंभीर गिरावट आने के बाद एंबुलेंस के जरिए ज़ंजान जेल से ईरान के ज़ंजान प्रांत के एक स्थानीय अस्पताल में तुरंत स्थानांतरित किया गया। उनकी हालत अचानक बेहद खराब हो गई थी, जिसके बाद यह आपातकालीन कदम उठाया गया।'
जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के कारण उनकी मानसिक सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। उन्हें हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां रही हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने विचारों से समझौता नहीं किया। कई बार उनकी हालत गंभीर होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है।
Who is Narges Mohammadi's Husband? नरगिस मोहम्मदी और ताघी रहमानी के दो बच्चे- एक बेटा और एक बेटी हैं। ये दोनों ही जुड़वां बच्चें। बेटे का नाम अली और बेटी का कियाना नाम है। दोनों पेरिस में पिता के साथ रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। लंबे समय से मां से दूर रहने के कारण उनका बचपन काफी चुनौतियों भरा रहा है। नरगिस के पति एक लेखक, पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। ईरान सरकार ताघी को कई बार जेल भेज चुकी है। पेरिस में निर्वासन में रहते हुए मानवाधिकार और लोकतंत्र के मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाते हैं। नरगिस मोहम्मदी का परिवार हमेशा उनके संघर्ष में उनके साथ खड़ा रहा, हालांकि उनके सामाजिक और राजनीतिक कार्यों के कारण परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके पति (Taghi Rahmani) और उनके बच्चे लंबे समय से विदेश में रह रहे हैं। कौन हैं नरगिस मोहम्मदी, आइए जानते हैं।
Narges Mohammadi's Education: नरगिस मोहम्मदी का जन्म 21 अप्रैल 1972 को ईरान के जंजान में हुआ। वह सामान्य मध्यवर्गीय ईरानी परिवार में पैदा हुईं। उनके घर में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषय को महत्व दिया जाता था। उन्होंने ईरान के क़ज़विन स्थित इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय (Imam Khomeini International University) से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई की। वह अपने छात्र जीवन में छात्र संगठनों से जुड़कर आंदोलन करने लगी। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिला अधिकारों और लोकतंत्र जैसे मुद्दों आंदोलनों में भाग लिया और महिलाओं के अधिकारों तथा लोकतंत्र के लिए आवाज़ उठानी शुरू कर दी।
नरगिस ने ईरान के प्रसिद्ध वकील और नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी (Shirin Ebadi) के साथ जुड़कर डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंट (DHRC) की स्थापना की। इस संगठन के माध्यम से उन्होंने राजनीतिक कैदियों के अधिकारों और न्यायिक सुधारों के लिए कार्य किया। शिरीन एबादी ईरान की पहली महिला न्यायाधीश रहीं। वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना शुरू किया। वर्ष 2003 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नोबेल पुरस्कार पाने वाली वह पहली ईरानी महिला थीं।
नरगिस ने विशेष रूप से मृत्युदंड के खिलाफ अभियान चलाया। ईरान उन देशों में से एक है, जहां मृत्युदंड की दर काफी अधिक है। मोहम्मदी ने 'स्टेप बाय स्टेप टू स्टॉप डेथ पेनल्टी' (Step by Step to Stop Death Penalty) नामक अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया। वह दुनिया के दूसरे मुल्कों की तरह ईरान में मृत्युदंड की सजा को समाप्त करवाना चाहती थीं। इस संघर्ष को ईरान सरकार ने कुचलने का हरसंभव प्रयास किया। इस संघर्ष से जुड़े आंदोलनकारियों को लाठियों से पीटने से लेकर जेल और फांसी तक की सजा दी। इन सबके बावजूद इस आंदोलन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाबी हासिल की।
नरगिस मोहम्मदी को कई बार गिरफ्तार किया गया और लंबे समय तक जेल में रखा गया। उनपर राज्य के खिलाफ प्रचार, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और गैरकानूनी संगठनों से संबंध जैसे आरोप लगाए गए। वह दोषी ठहराई गईं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) और ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) का मानना है कि ये सारे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और इन सबका उद्देश्य उन्हें तोड़ना और उनकी आवाज को दबाना है। लेकिन वह फौलादी इरादों वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता है। उन्होंने जेल में रहते हुए भी अपने संघर्ष को जारी रखा। उन्होंने जेल में कैद महिलाओं की स्थिति, यातना, प्रताड़ना और एकांत कारावास के खिलाफ खुलकर लिखा और आवाज उठाई। उनकी लिखी चिट्ठियां और उनके संदेश जेल की सलाखों से बाहर आते रहे और जो दुनिया में चर्चा का विषय बने।
ईरान में 2022 में शुरू हुए 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन के दौरान भी नरगिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। यह आंदोलन 22 वर्षीय युवती महसा अमीनी (Mahsa Amini) की सितंबर 2022 में मृत्यु के बाद शुरू हुआ था। दरअसल, ईरान की पुलिस ने महसा को पुलिस ने हिरासत में लिया था। हिरासत में उनका स्वास्थ्य बिगड़ना शुरू हो गया और उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत ने पूरे ईरान को झकझोर कर रख दिया। नरगिस ने जेल में रहते हुए भी इस आंदोलन का समर्थन किया और इसके पक्ष में संदेश जारी किए।
नरगिस मोहम्मदी ईरान की सबसे साहसी और लोकप्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से हैं। वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिलाओं के अधिकार और मृत्युदंड जैसे मुद्दों को लेकर मुखर रहती हैं। इन मुद्दों की चर्चा सिर्फ ईरान के भीतर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई बार चर्चा में रही हैं। उन्हें 'ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और मानवाधिकारों व स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के प्रयासों' के लिए वर्ष 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की सरकार उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए क्या पुख्ता कदम उठाती है।