
Herbal CigaretteGood or Bad : क्या आप सिगरेट की लत छोड़ने के लिए 'हर्बल' या 'आयुर्वेदिक' सिगरेट का सहारा ले रहे हैं? या फिर इसे 'टोबैको-फ्री' और 'निकोटीन-फ्री' समझकर शौक के लिए फूंक रहे हैं? अगर ऐसा है, तो आप एक बहुत बड़े और खतरनाक भ्रम का शिकार हैं।
बाजार में इन दिनों तुलसी, पुदीना, ग्रीन टी, दालचीनी और कैमोमाइल जैसी जड़ी-बूटियों से बनी सिगरेट की बाढ़ आई हुई है। कंपनियां इसे '100% नेचुरल' और 'सेफ लाइफस्टाइल प्रोडक्ट' बताकर प्रमोट कर रही हैं। लेकिन विज्ञान का कहना है कि यह 'हर्बल' धुआं आपकी सेहत को उसी तरह छलनी कर रहा है, जैसे आम तंबाकू वाली सिगरेट। आइए जानते हैं क्या कहती है इस पर हालिया रिसर्च और कैसे इसके नाम पर करोड़ों का मुनाफा कमाया जा रहा है।
कंपनियां दावा करती हैं कि इनमें तुलसी, पुदीना और ग्रीन टी है जो सेहत के लिए अच्छी हैं। मेडिकल साइंस के नजरिए से जब ये चीजें जलती हैं, तो फेफड़ों के रिसेप्टर्स पर इनका क्या असर पड़ता है?
तुलसी या पुदीना खाना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन उन्हें जलाना और उनका धुआं फेफड़ों में खींचना बेहद खतरनाक है।जब ये जड़ी-बूटियां जलती हैं, तो इनका औषधीय गुण खत्म हो जाता है और ये टार (Tar), कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीली गैसों में बदल जाती हैं। फेफड़ों के रिसेप्टर्स और वायुमार्ग की अंदरूनी परत (Cilia) इस धुएं को एक बाहरी हमलावर (Foreign Particle) मानते हैं। इससे रिसेप्टर्स में तीव्र जलन होती है, फेफड़ों की रक्षा प्रणाली ठप हो जाती है और वहां गंभीर सूजन (Inflammation) आ जाती है। लंबे समय में यह फेफड़ों के टिश्यूज को स्थायी रूप से डैमेज कर देता है।
क्या निकोटीन न होने का मतलब यह मान लिया जाए कि यह सिगरेट पूरी तरह से 'कैंसर-फ्री' या सेफ है? फेफड़ों की अंदरूनी परत (Cilia) पर इसका धुआं क्या असर डालता है?
बिल्कुल नहीं, निकोटीन न होने का मतलब 'कैंसर-फ्री' या सेफ होना कतई नहीं है। निकोटीन सिर्फ लत (Addiction) पैदा करता है, जबकि कैंसर और फेफड़ों की बीमारियां धुआं जलने से निकलने वाले टार, पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) और कार्बन मोनोऑक्साइड से होती हैं, जो हर्बल सिगरेट में भी भरपूर होते हैं। फेफड़ों की अंदरूनी परत पर मौजूद सिलिया (Cilia) जो झाड़ू की तरह फेफड़ों से धूल और बैक्टीरिया साफ करते हैं। इस हर्बल धुएं के संपर्क में आते ही पैरालाइज (ठप) हो जाते हैं। सिलिया के नष्ट होने से फेफड़ों का नेचुरल क्लीनिंग सिस्टम बंद हो जाता है, जिससे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, इन्फेक्शन और कैंसर का खतरा बराबर बना रहता है।
कई ब्रांड्स इसे 'स्मोकिंग सेसेशन प्रोडक्ट' (सिगरेट छोड़ने की दवा) की तरह प्रमोट करते हैं। क्या मेडिकल काउंसिल या कोई भी हेल्थ अथॉरिटी हर्बल सिगरेट को तंबाकू छोड़ने का सही जरिया मानती है?
दुनिया की किसी भी प्रतिष्ठित मेडिकल काउंसिल या हेल्थ अथॉरिटी (जैसे WHO, FDA या AIIMS) ने हर्बल सिगरेट को 'स्मोकिंग सेसेशन प्रोडक्ट' (धूम्रपान छोड़ने का साधन) के रूप में मान्यता नहीं दी है। मेडिकल साइंस के अनुसार, यह केवल एक भ्रम है। निकोटीन छोड़ने के लिए लोग इस पर शिफ्ट तो हो जाते हैं, लेकिन सिगरेट पीने का व्यवहार (Smoking Behavior) और हाथ-मुंह का मूवमेंट वैसा ही रहता है, जिससे लत का मनोवैज्ञानिक चक्र कभी नहीं टूटता। उल्टा, फेफड़ों को भारी मात्रा में टार और कार्बन मोनोऑक्साइड का नुकसान झेलना पड़ता है। तंबाकू छोड़ने के लिए केवल मेडिकली अप्रूव्ड तरीके जैसे निकोटीन गम्स, पैच या काउंसिलिंग ही सही जरिया हैं।
अगर कोई चेन-स्मोकर तंबाकू छोड़कर पूरी तरह हर्बल सिगरेट पर शिफ्ट हो जाए, तो लंबे समय में (Long-term) उसके फेफड़ों और दिल (Cardiovascular system) को क्या नुकसान हो सकता है?
अगर कोई चेन-स्मोकर पूरी तरह हर्बल सिगरेट पर शिफ्ट होता है, तो लंबे समय में उसके फेफड़े और दिल दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।
लैब टेस्टिंग में कुछ बड़े हर्बल सिगरेट ब्रांड्स में 'लेड' (सीसा) की मात्रा पाई गई है। शरीर के नर्वस सिस्टम, किडनी और मानसिक स्वास्थ्य पर धुएं के जरिए लेड पहुंचने का क्या असर होता है?
धुएं के जरिए लेड (सीसा) का सीधे फेफड़ों में पहुंचना बेहद घातक है, क्योंकि यह बिना किसी फिल्टर के सीधे ब्लडस्ट्रीम (रक्तप्रवाह) में मिल जाता है।
आजकल कॉलेज जाने वाले युवाओं में हर्बल सिगरेट को एक 'कूल और हर्बल लाइफस्टाइल' का हिस्सा माना जा रहा है। इस भ्रम को तोड़ने के लिए युवाओं और उनके माता-पिता को आपकी क्या सलाह है?