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गांव की गलियों से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा हौसला, 13 साल की सेवा में बचाई सैकड़ों जिंदगियां, जानें जेके धीवर की प्रेरक कहानी

J.K. Dhivar: जेके धीवर की कहानी यह बताती है कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी मेहनत, साहस और सेवा भावना के दम पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।
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Aug 27, 2026
Chhattisgarh News
जेके धीवर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ताबीर हुसैन।J.K. Dhivar Inspirational Story: सम्मान मिलने से जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। पहले मेरी पहचान मुख्य रूप से यूनिट और वरिष्ठ अधिकारियों तक थी, लेकिन बड़े सम्मान के बाद आम लोगों के बीच भी एसडीआरएफ की टीम को लेकर भरोसा बढ़ा है। यह कहना है एसडीआरएफ के जवान जेके धीवर का। एक कार्यक्रम में शामिल होने आए धीवर ने पत्रिका से बातचीत में अपनी सेवा यात्रा और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियानों के अनुभव साझा किए।

15 अगस्त को राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित जेके धीवर वर्ष 2013 से एसडीआरएफ में सेवाएं दे रहे हैं। 13 साल की इस सेवा यात्रा के दौरान उन्होंने टीम के साथ बाढ़, आगजनी और सड़क हादसों समेत कई घटनाओं में रेस्क्यू अभियान चलाकर लोगों की जान बचाई। उनके लिए हर अभियान चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता रही।

J.K. Dhivar Inspirational Story

57 लोगों को आग से सुरक्षित निकाला

धीवर ने बताया कि रेस्क्यू के साथ आपदा प्रबंधन और बचाव तकनीकों की जानकारी देना भी बेहद जरूरी है। वर्ष 2023 में करीब 500 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। वहीं 2025-26 में अब तक करीब 1250 लोगों को विभिन्न आपदा प्रबंधन और बचाव तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के जरिए लोगों को आपदा की स्थिति में बचाव के तरीकों और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जाती है।

उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बेबीलॉन टावर में लगी भीषण आग का जिक्र करते हुए बताया कि आग लगने के बाद सातवीं मंजिल पर कई लोग फंसे हुए थे। स्थिति चुनौतीपूर्ण थी और चारों ओर धुआं और आग थी। ऐसे समय में टीम के साथ वे अंदर पहुंचे और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके साथ ही छत पर फंसे लोगों का भी सफल रेस्क्यू किया गया। इस अभियान में करीब 57 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

आगजनी जैसे अभियानों में रेस्क्यू टीम के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं। धुएं से भरी इमारत में प्रवेश करना और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना जोखिम भरा होता है। इसके बावजूद टीम ने अभियान को अंजाम दिया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।

गांव से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर

खरोरा के पास बिलदारशिवनी गांव के रहने वाले जेके धीवर ने शुरुआती पढ़ाई गांव में की। इसके बाद वे नाना-नानी और मामा-मामी के साथ सड्डू में रहकर पढ़ाई जारी रखी। गांव से शुरू हुआ उनका यह सफर आगे चलकर एसडीआरएफ तक पहुंचा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का काम भी किया। हालांकि सरकारी सेवा में जाने की इच्छा उनके मन में थी। इसी इच्छा ने उन्हें नई दिशा दी और उन्होंने सरकारी सेवा में कदम रखा।

नगर सेना से एसडीआरएफ तक

वर्ष 2012 में जेके धीवर नगर सेना से जुड़े। इसके बाद वर्ष 2013 में एसडीआरएफ में सेवाएं शुरू कीं। एसडीआरएफ से जुड़ने के बाद उन्होंने रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन से संबंधित कई विशेष प्रशिक्षण हासिल किए। इन प्रशिक्षणों में अग्निशमन, रोप रेस्क्यू, धुएं से भरी इमारत में प्रवेश और विभिन्न मॉक ड्रिल शामिल हैं। इन प्रशिक्षणों ने उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में रेस्क्यू अभियान संचालित करने के लिए तैयार किया। बाढ़ हो, आगजनी हो या सड़क हादसा, हर स्थिति में टीम के साथ लोगों को सुरक्षित निकालना उनकी सेवा का अहम हिस्सा रहा है।

सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

15 अगस्त को राष्ट्रपति सम्मान मिलने के बाद जेके धीवर का कहना है कि इस सम्मान ने उनकी पहचान को व्यापक बनाया है। पहले उनकी पहचान मुख्य रूप से यूनिट और वरिष्ठ अधिकारियों तक थी, लेकिन बड़े सम्मान के बाद आम लोगों के बीच भी एसडीआरएफ की टीम को लेकर भरोसा बढ़ा है। उनके अनुसार सम्मान सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बढ़ने का भी एहसास कराता है। 13 साल की सेवा में हासिल अनुभव और प्रशिक्षण के साथ वे आगे भी रेस्क्यू अभियानों में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Updated on:
27 Aug 2026 05:58 pm
Published on:
27 Aug 2026 05:58 pm