Patrika Special News

‘पागल बच्चा’ कहकर ठुकराया, तो पिता बने कोच, रायपुर के साई निखिल ने मेडल्स की बौछार से दुनिया को दिया जवाब

Sai Nikhil Inspirational Story: ऑटिस्टिक प्राइड डे 2026 के मौके पर रायपुर दलदल सिवनी के साई निखिल की कहानी समाज की सोच को बदलने वाली एक प्रेरक मिसाल है।

3 min read
Jun 18, 2026
Para swimmer Sai Nikhil Achievements
साई निखिल: Para swimmer Sai Nikhil Achievements (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ताबीर हुसैन। Autistic Pride Day 2026: 18 जून को दुनियाभर में मनाए जाने वाले ऑटिस्टिक प्राइड डे का असली मतलब अगर किसी कहानी से समझना हो तो वह रायपुर दलदल सिवनी के साई निखिल की कहानी है। जिन बच्चों को समाज अक्सर कमजोर या अलग समझकर नजरअंदाज कर देता है, उन्हीं में छिपी असाधारण प्रतिभा का जीता-जागता उदाहरण हैं साई निखिल।

पागल बच्चा कहकर वापस लौटा दिया

मई 2010 में जन्मे साई निखिल जब ढाई साल के थे तब पता चला कि वे ऑटिज्म और एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट एंड हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) से प्रभावित हैं। इसके बाद उनके परिवार के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो गया। स्कूलों में एडमिशन से इनकार, बच्चों द्वारा चिढ़ाया जाना और थैरेपिस्ट्स की डांट-फटकार जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। साढ़े पांच साल की उम्र में जब उनकी अतिरिक्त ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए उन्हें स्विमिंग सिखाने ले जाया गया तो कोच ने उन्हें पागल बच्चा कहकर वापस लौटा दिया।

परेशान हुए पिता लेकिन हारे नहीं

पिता नरसिम्हा राजू मंडा ने बताया, निखिल के प्रति लोगों की सोच देखकर मैं परेशान जरूर हुआ लेकिन हार नहीं मानी। खुद स्विमिंग सीखने का फैसला किया और बेटे का पहला कोच बन गया। महज दो महीने के भीतर साई निखिल पानी से दोस्ती कर चुके थे और धीरे-धीरे खेल ही उनकी पहचान बन गया। आगे चलकर आंध्र प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में साई निखिल ने तीन अलग-अलग खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धियां हासिल कीं।

पैरा स्विमिंग में मेडल की बरसात

  • गुवाहाटी (2022) : 3 गोल्ड
  • ग्वालियर (2023) : 2 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • गोवा (2024) : 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • हैदराबाद (2025) : 1 ब्रॉन्ज

पैरा एथलेटिक्स में भी चमके

  • बेंगलुरु (2024) : 1 ब्रॉन्ज
  • ग्वालियर (2025) : 1 गोल्ड

रोलर स्केटिंग में भी दिखाया दम

  • चेन्नई (2023) : 1 गोल्ड। मैसूर (2024) : 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • विशाखापट्टनम : 2 गोल्ड

हर बच्चे में छिपी होती है खास प्रतिभा

साई निखिल की कहानी यह साबित करती है कि ऑटिज्म या एडीएचडी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि अलग तरह की क्षमता है जिसे सही मार्गदर्शन और समर्थन मिले तो बच्चे असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं। समाज द्वारा “अलग” समझकर पीछे धकेले जाने के बावजूद, पिता के विश्वास, लगातार अभ्यास और सही प्रशिक्षण ने साई निखिल को पैरा स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय स्तर का सफल खिलाड़ी बना दिया। उनकी यात्रा “ऑटिस्टिक प्राइड डे” का वास्तविक संदेश देती है-सम्मान, स्वीकार्यता और हर बच्चे की क्षमता पर भरोसा।

'ऑटिस्टिक प्राइड डे'

हर साल जून महीने की 18 तारीख को 'ऑटिस्टिक प्राइड डे' मनाया जाता है। बता दें, ऑटिज्म एक दिमागी डिसऑर्डर है, जो अधिकतर बच्चों में ही देखने को मिलता है। इससे पीड़ित बच्चों को लोगों से घुलने-मिलने और बोलने-चालने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एक ही बात को बार-बार दोहराना, चुपचाप घंटों तक बैठे रहना भी इसके लक्षणों में आता है। जाहिर है, कि इस बीमारी में न सिर्फ व्यक्ति का व्यवहार बल्कि शरीर का विकास भी प्रभावित होता है।

जानें क्या है ऑटिस्टिक प्राइड डे को मनाने का मकसद?

ऑटिस्टिक प्राइड डे को सेलिब्रेट करने का मकसद है ऑटिज्‍म से पीड़ित बच्चों के विकास और उनके जीवन की संभावनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करना। बता दें, कि यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर उन्हें सामान्य बच्चों से थोड़ा अलग जरूर बनाता है, लेकिन अच्छा माहौल और केयर देने पर इसे मैनेज भी किया जा सकता है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। बस इसी उद्देश्य से हर साल यह दिन मनाया जाता है।

ऑटिस्टिक प्राइड डे का इतिहास

ऑटिस्टिक प्राइड डे मनाने की शुरुआत ब्राजील से हुई थी। वर्ष 2005 में गैरीथ एंड एमी नेल्सन द्वारा बनाई गई एस्पिस फॉर फ्रीडम (एएफएफ) के द्वारा ब्राजील में पहली बार ऑटिस्टिक प्राइड डे मनाया गया था, जिसके बाद पूरे विश्व में इस दिन को मनाया जाने लगा।

ये वजह हो सकती हैं जिम्मेदार

ऑटिज्म की परेशानी की वजह आनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी भी हो सकती है। बता दें कि बहुत लोग ऐसे होते हैं जो सड़क के आसपास अपना घर बनाना पसंद करते हैं, लेकिन ऐसी जगहों पर रहने वालों बच्चों को ऑटिज्म होने का खतरा दो गुना तक ज्यादा होता है। वैसे ऑटिज्म की समस्या का इलाज जितनी जल्दी शुरू हो सके, इसके परिणाम उतने ही अच्छे मिलने की संभावना होती है।

Published on:
18 Jun 2026 12:50 pm