
Excise Revenue Rajasthan: शराब ब्रिकी से राजस्थान सरकार का खजाना खूब भर रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में आबकारी विभाग ने दिसंबर तक 11,424 करोड़ का राजस्व हासिल किया है।
2024-25 की इसी अवधि में मिले राजस्व से यह 700 करोड़ रुपए अधिक है। चालू वित्त वर्ष के लिए आबकारी विभाग को 19,720 करोड़ रुपए राजस्व का लक्ष्य मिला था।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर तक कुल राजस्व लक्ष्य 14,494 करोड़ रुपए था, जिसमें से 11,424 करोड़ रुपए हासिल हो चुके हैं।
कुल मिलाकर राजस्थान के आबकारी विभाग ने चालू वित्त वर्ष में अब तक संतोषजनक प्रदर्शन किया है। यदि अंतिम तिमाही में भी यही रफ्तार बनी रहती है तो यह राज्य के वित्तीय प्रबंधन के लिए बड़ी सफलता मानी जाएगी।
आबकारी विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में जनवरी के लिए 2,743 करोड़, फरवरी के लिए 2,667 करोड़ रुपए और अंतिम माह मार्च के लिए सबसे अधिक 2,886 करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य रखा है।
अधिकारी के अनुसार, मार्च का लक्ष्य सबसे अधिक इसलिए रखा गया है, क्योंकि यह महीना राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देता आया है। वित्त वर्ष के अंत में शराब की बिक्री और लाइसेंस शुल्क से राज्य को बड़ी आय होती है, जिससे सालाना लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलती है।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राजस्व में इस 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के पीछे विभाग की रणनीतिक योजनाएं और सख्ती मुख्य वजह रही हैं। विभाग ने अवैध शराब की तस्करी को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया है, जिससे वैध बिक्री में इजाफा हुआ है।
2021-22 में लागू की गई नीति, जिसमें शहरी क्षेत्रों में लाइसेंस फीस में संशोधन और 35% से 45% तक की अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी शामिल थी, अब दीर्घकालिक परिणाम दे रही है। अगर हम राजस्थान आबकारी विभाग के पिछले दो दशकों के सफर पर नजर डालें, तो यह वृद्धि किसी चमत्कार से कम नहीं है।
वर्ष 2004-05 में विभाग का कुल राजस्व महज 1276 करोड़ रुपए के आसपास हुआ करता था। निरंतर नीतिगत सुधारों और बाजार के विस्तार के कारण आज यह आंकड़ा कई गुना बढ़कर 11,000 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
नव वर्ष के जश्न में भी राजस्थान में खूब शराब गटकी गई। राज्यभर में 119 करोड़ रुपए से अधिक की शराब की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष के 114 करोड़ रुपए के मुकाबले 5 करोड़ रुपए अधिक है।
पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना से पता चलता है कि राजस्व में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आबकारी विभाग को दिसंबर तक 2023-24 में 9,468 करोड़ रुपए और 2024-25 में 10,724 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था।
वित्त वर्ष में दिसंबर तक का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है, लेकिन अभी भी 8,296 करोड़ रुपए का वार्षिक लक्ष्य शेष है। ऐसे में विभाग ने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कमर कस ली है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वे इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं और लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, बाड़मेर, सवाई माधोपुर, बूंदी सहित करीब 10 जिलों को चेतावनी मिली है कि जनवरी में आंकड़े बेहतर दिखाई देने चाहिए। नहीं तो बड़ी कार्रवाई होगी।
| वित्त वर्ष | राजस्व (₹ करोड़ में) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|
| 2010-11 | 2861.41 | 24.38 |
| 2011-12 | 3287.05 | 14.88 |
| 2012-13 | 3987.84 | 21.32 |
| 2013-14 | 4981.59 | 24.92 |
| 2014-15 | 5585.77 | 12.13 |
| 2015-16 | 6712.94 | 20.18 |
| 2016-17 | 7053.68 | 5.08 |
| 2017-18 | 7275.83 | 3.15 |
| 2018-19 | 8694.11 | 19.49 |
| 2019-20 | 9591.63 | 10.32 |
| 2020-21 | 9853.00 | 2.72 |
| 2021-22 | 11807.34 | 19.83 |
| 2022-23 | 13325.85 | 12.86 |
| 2023-24 | 13224.81 | -0.76 |
| 2024-25 ( दिसंबर तक ) | 10,724 | — |
राजस्थान के पड़ोसी राज्य यूपी की बात करें तो राज्य को वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 39,695.73 करोड़ रुपए आबकारी राजस्व मिला, जो पिछले वर्ष 2024-25 में दिसंबर तक हासिल 34,544.09 करोड़ रुपए के राजस्व से 14.91 प्रतिशत ( 5,151.64 करोड़ रुपए) अधिक है।
उत्तर प्रदेश के आबकारी एवं निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल के अनुसार दिसंबर 2025 तक प्रदेश के लिए लक्ष्य 43,400.00 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया था, लेकिन खास बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व लक्ष्य का 91.46 प्रतिशत हासिल कर लिया गया है।