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Khichdi History : 1722 साल पुराना खिचड़ी का इतिहास, कभी था ये शाही भोजन, कृष्ण-औरंगजेब से कनेक्शन, एक्सपर्ट ने सुनाई कहानी

Makar sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा है। पर क्या आप इस खिचड़ी का इतिहास (Khichdi History) जानते हैं जो करीब 1700 साल पुरानी बताई जाती है। जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत (खाद्य समीक्षक और इतिहासकार) ने खिचड़ी की कहानी बताई है।

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Jan 14, 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI

Khichdi History In Hindi : खिचड़ी के जितने रंग, उतने किस्से। बीरबल की खिचड़ी तो कहावत बन चुकी है। माखन-मिश्री खाने वाले भगवान कृष्ण से भी खिचड़ी जुड़ी है। साथ ही मकर संक्रांति (Makar sankranti 2026) पर खिचड़ी खाने की परंपरा है। आसानी से बनने वाली खिचड़ी के कई रोचक किस्से हैं। जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत (खाद्य समीक्षक और इतिहासकार) ने पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता के साथ खिचड़ी के बारे में दिलचस्प बातें (Khichdi Interesting Story) शेयर की, जिसे हम नीचे पढ़ेंगे।

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Khichdi History : महाभारत से लेकर विदेशों में खिचड़ी का जिक्र

महाभारत में खिचड़ी का जिक्र मिलता है। वहीं, ग्रीक राजा सेल्यूकस ने भारत में अपने अभियान (305-303 ईसा पूर्व) के दौरान दाल के साथ चावल के व्यंजन का जिक्र किया था। मोरक्को के यात्री इब्न बतूता ने 1350 के आसपास जिक्र किया था कि भारत में चावल और मूंग से बने भोजन को खाया जाता है।

Photo - NotebookLM

शाही मेन्यू में खिचड़ी का स्पेशल स्थान

रूस से भारत आए अफानासी निकितिन के दस्तावेजों (15वीं शताब्दी) में खिचड़ी का वर्णन है। जो मुगल अपने भोजन की छाप भारत में छोड़े थे उनका दिल भी खिचड़ी ने जीत लिया था। साथ ही इसे मध्यकालीन भारत के शाही मेन्यू में स्पेशल स्थान दिया। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि अकबर के दरबार में हर दिन 30 मन खिचड़ी पकाते थे।

कृष्ण के साथ खिचड़ी का कनेक्शन

वो कहते हैं कि आपने छी-छी की खिचड़ी का नाम सुना होगा या कभी खाया होगा। ये कृष्ण मंदिर में प्रसाद के रूप में दिया जाता है। ये वाला किस्सा सुनकर मन थोड़ा खराब हो सकता है। ये हम जानते हैं कि भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री बहुत पसंद था और वो खूब खाते भी थे। इसी कारण एक बार पेट खराब हो गया। इसके बाद मल त्याग किए तो वो खिचड़ी की तरह ही था। वहीं से छी-छी की खिचड़ी की परंपरा शुरू हुई थी। कृष्ण को मानने वाले वैष्णव समुदाय के लोग इस खिचड़ी को प्रसाद के रूप में खाते हैं।

वो ये भी बताते हैं कि खिचड़ी का कोई एक रंग, एक प्रकार या स्वाद नहीं है। भारत के कोने-कोने में अलग-अलग प्रकार की खिचड़ी मिलती है।

सबसे पुरानी खिचड़ी

चावल और मूंग दाल की खिचड़ी का जिक्र इब्न बतूता ने किया था। इस आधार पर कहा जा सकता है कि ये सबसे पुरानी खिचड़ी है। हालांकि, इसके अलावा भी कई चीजों के साथ खिचड़ी को पकाने का जिक्र मिलता है।

औरंगजेब मांस वाली खिचड़ी खाता था

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मांस की खिचड़ी, ये कुछ लोगों को सुनने में अटपटा लग सकता है। पर, मांस की खिचड़ी बनती है। औरंगजेब मांस वाली खिचड़ी खाता था जिसमें मटन, मेवा आदि पड़ते थे।

अलग-अलग राज्य और खिचड़ी का स्वाद

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  • उत्तर प्रदेश में चावल और काले उड़द की खिचड़ी
  • बिहार में चावल, मूंग दाल, हरे मटर और फूलगोभी की
  • 'असुर खिचड़ी' के नाम से छत्तीसगढ़ में महुआ के आटे से पकाया जाता है
  • पश्चिम बंगाल में चावल, मूंग दाल, हरा मटर, आलू, फूलगोभी, इलायची और तेज पत्ता से
  • केरल में चावल, मूंग दाल, घी के साथ-साथ नारियल और ड्राई फ्रूटस वाली खिचड़ी
  • गुजरात में इसे हल्के मसाले वाली कढ़ी की करी के साथ
  • तमिलनाडु के 'वेन पोंगल' में घी डालकर
  • हिमाचल में चावल-दाल को मिलाकर राजमा और छोले के साथ
  • कर्नाटक की तीखी 'बीसी बेले हुलियाना' में इमली, गुड़, सब्जियां, करी पत्ते, सूखे नारियल और कपोक कलियों

खिचड़ी के चार यार

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बिहार या पूर्वांचल के क्षेत्रों में खिचड़ी को लेकर कहावत है कि "खिचड़ी के चार यार- दही, घी, पापड़ और अचार", इन चीजों के बिना खिचड़ी को अधूरा माना जाता है। इसलिए, ये हमेशा खिचड़ी के साथ खाए जाते हैं। हां, ये अलग बात है कि मरीज को इन यारों के बिना ही इसे खाने के लिए दिया जाता है। हालांकि, खिचड़ी के कई लोग चटनी खाना भी पसंद करते हैं।

खिचड़ी की इंटरनेशनल डिमांड

खिचड़ी केवल भारतीयों की पसंदीदा नहीं रही। ये इंटरनेशनल लेवल पर भी उतनी ही लोकप्रिय है। कहा जाता है कि मुगलों के बाद अंग्रेजों को भी ये खाना बेहद पसंद आया था और उनके साथ ही वो यूके चला गया। ये विक्टोरियन ब्रेकफास्ट में भी जुड़ा। अब कई देशों में इसे खाया जाता है।

खिचड़ी पोषक तत्वों से भरपूर

खिचड़ी के पोषक तत्वों की बात करें तो इससे बेहतर कुछ हो नहीं सकता। जैसे- दाल और वेजिटेबल प्रोटीन से भरे हैं और उसको चावल के साथ मिलाकर खाने से आपको तमाम जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही ये एक संतुलित आहार भी है। इसलिए, व्रत में भी खिचड़ी खाई जाती है। ये आसानी से पचने वाला भोजन है। इससे आरामदायक फूड भी नहीं है। इसलिए, मरीजों को खाने के लिए कहा जाता है।

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