भारत में हर साल लाखों महिलाएं और लड़कियां लापता होती हैं। एनसीआरबी डेटा के मुताबिक ये आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ा है। घर से निकलने वाली ये बेटियां जो कभी नहीं लौटीं, माता-पिता को बरसों बाद भी बेटियों का इंतजार...
Missing Girls in India: मध्यप्रदेश में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने के आंकड़े एक गंभीर सामाजिक और कानून व्यवस्था के संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। बीते 6 साल में प्रदेश से करीब 2.70 लाख महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि औसतन हर दिन 120 से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां गायब होने की तस्वीर सामने आ रही है।
यह सिर्फ आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों का दर्द है, ऐसे परिवार जिनके घर की बेटियां दरवाजे की चौखट पार कर निकली तो सही, लेकिन फिर नहीं लौटीं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉरिड ब्यूरो (NCRB) पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर देखें तो मध्य प्रदेश में हर साल हजारों महिलाएं और लड़कियां लापता के रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही हैं।
जनवरी 2024 से जून -2025- 23,129 लड़कियां और महिलाएं लापता। यानी हर दिन 43 लड़कियां और महिलाएं खो गईं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन मामलों में कई कारण सामने आते हैं
मध्य प्रदेश के धार जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले किसान परिवार की 16 साल की बेटी 2021 में अचानक लापता हो गई। परिवार के मुताबिक वह रोज की तरह स्कूल के लिए घर से निकली थी, लेकिन शाम तक नहीं लौटी। परिवार को खोज-बीन के दौरान पता चला कि उसका मोबाइल बंद है। इसके बाद वे पुलिस में शिकायत लेकर पहुंचे। गुमशुदगी की fir दर्ज की गई। पुलिस जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर किसी युवक से बातचीत होती थी उसकी।
मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस को शक हुआ कि वह राजस्थान में है। लेकिन 5 साल बाद भी उसका कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा। लड़की की मां आज भी दिन में कई बार दरवाजा ताकती है और कहती है, बस इतना भर पता चल जाए कि वह जिंदा है… वही काफी है।
प्रदेश के कुछ जिलों में महिलाओं और लड़कियों के लापता (Missing Girls in India)होने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इनमें बड़े शहरों के साथ-साथ आदिवासी और औद्योगिक इलाके भी शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन जिलों में आबादी अधिक, रोजगार के लिए पलायन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से अपराधियों के लिए युवतियों को जाल में फंसाना आसान हो जाता है।
लापता (Missing Girls in India) मामलों का विश्लेषण बताता है कि 14 से 18 वर्ष की किशोरियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इस उम्र में सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए अंजान लोगों से संपर्क बढ़ जाता है। कई मामलों में अपराधी नौकरी, शादी या फिर मॉडलिंग के नाम पर झांसा देकर लड़कियों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क के माध्यम से दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है। सबसे ज्यादा सामने आने वाले रूट की स्थिति यहां देखें
एमपी-दिल्ली-हरियाणा रूट: यहां कई मामलों में लड़कियों को जबरन शादी या घरेलू काम के लिए बेचा जाता है।
एमपी से राजस्थान: यहां कुछ इलाकों में लड़कियों को खरीदकर शादी कराने के मामले किसी से छिपे नहीं हैं।
एमपी से महाराष्ट्र(मुंबई):यहां यौन शोषण और जबरन काम कराने के मामले सामने आते हैं
एमपी से गुजरात: औद्योगिक इलाकों में काम दिलाने के नाम पर कई लड़कियों को ले जाया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क दलालों, एजेंटों और स्थानीय संपर्कों के जरिए काम करता है।
प्रदेश में मानव तस्करी और लापता मामलों से निपटने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट स्थापित की गई है। लापता बच्चों और महिलाओं की खोज के लिए विशेष अभियान 'ऑपरेशन मुस्कान' चलाया जा रहा है।महिला हेल्प लाइन और साइबर निगरानी राज्यों के बीच पुलिस समन्वय हालांकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सिर्फ सरकारी प्रयास ही नहीं, यहां समाज को भी सतर्क होने की जरूरत है।
विधान सभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने प्रदेशभर से गायब हो रही महिलाओं और युवतियों के मुद्दे (Missing Girls in India) को विधानसभा में उठाया था। सरकारी आंकड़ों के आधार पर बढ़ते ऐसे मामलों पर चिंता जताई थी। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक की स्थिति में ही प्रदेश में कुल 206507 महिलाएं और 63793 लड़कियां गायब हुई। इनमें से 47984 महिलाओं और 2186 लड़कियों का आज तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस संदर्भ में पत्र लिखा। इसे उन्होंने अपने एक्स हेंडल पर भी शेयर किया था। उन्होंने पत्र में लिखा था कि मध्यप्रदेश में करीब 22 साल से बीजेपी की सरकार है। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं की स्थिति लगातार बदतर हुई है। मध्यप्रदेश विधानसभा में पेश आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राज्य सरकार को प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने के लिए निर्देशित करने का आग्रह किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश में बहन बेटियों के लापता (Missing Girls in India) होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।
मध्यप्रदेश समेत देशभर में लापता हुई बेटियों (Missing Girls in India) के माता-पिता आज भी उनका इंतजार करते हैं। हर दिन उनकी आंखें घर के दरवाजों पर होती हैं, एक नजर भर बस कहीं दूर से बेटी आती नजर आ जाए। इनका दर्द समझना आसान तो है, लेकिन उसे महसूस कर पाना मुश्किल, ऐसे में बस सवाल ही उठ सकता है कि क्या ये बेटियां फिर से लौटेंगी? या साल-दर साल ये आंकड़े बढ़ते ही जाएंगे...