India Monsoon 2026 El Nino Special Report : भारत में इस बार 'सुपर अल-नीनो' का महासंकट सबसे अधिक कृषि को नुकसान पहुंचा सकता है। हमने इस बात को समझने के लिए भारत के मौसम वैज्ञानिकों से बात की और सरकार की योजनाओं को समझा। आइए, इस स्पेशल रिपोर्ट में मानसून और अल नीनो का कनेक्शन व प्रभाव समझते हैं।

Monsoon 2026 In India Special Report : भारत में इस बार 'सुपर अल-नीनो' का महासंकट बताया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार इसको लेकर लगातार बैठकें कर रही है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से कहा है कि 197 जिलों के लिए सरकार एक्शन प्लान बना रही है। इन सभी बातों को समझने के लिए पत्रिका स्पेशल के रवि गुप्ता ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार (Sc. F) और डॉ. अखिल श्रीवास्तव (Sc. D) से फोन पर बातचीत की।
आइए, मानसून और अल-नीनो जैसी बातों को आसान भाषा में विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं-
वैज्ञानिक डॉ. कुमार कहते हैं, 197 जिलों को लेकर क्या प्लान है, इस बारे में हमें कोई सूचना नहीं है। हालांकि, मौसम विभाग इस संबंध में हर जानकारी को प्रतिदिन, साप्ताहिक, मासिक रिपोर्ट या जरूरत के हिसाब से साझा करता है। इसके अलावा कोई विशेष सूचना नहीं है। हमने जून में मानसून की रिपोर्ट साझा की है, जिसे देखकर मानसून के बारे में समझा जा सकता है।
इसकी जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के "रेनफॉल इंफॉर्मेशन और मानसून पोर्टल" (वर्ष 2026) के आंकड़ों से होती है। 4 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राहत की उम्मीदों के साथ केरल तट पर दस्तक दी। 9 जून 2026 तक यह पूर्वोत्तर राज्यों और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया।
लेकिन, जब 1 से 8 जून 2026 के शुरुआती बारिश के नक्शे (IMD Map) को देखा गया, तो एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जहां राजस्थान जैसे आमतौर पर सूखे रहने वाले इलाकों और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से बहुत अधिक बारिश (मैप में गहरे नीले रंग से चिह्नित) हुई, वहीं देश के एक बड़े हिस्से - विशेषकर मध्य भारत, उत्तर प्रदेश और दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश की भारी कमी (लाल और पीले रंग से चिह्नित) दर्ज की गई।
मानसून को लेकर डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं, हमने शुरुआती तौर पर जो दर्ज किया है, उसके आधार पर आने वाले महीनों का आकलन करना जल्दबाजी हो सकता है। हालांकि, जिस हिसाब से इसकी शुरुआत हुई है, वह कुछ इलाकों के लिए बिल्कुल ठीक संकेत नहीं दिख रहा है।
वहीं, अल-नीनो को लेकर वे बताते हैं, यह प्रशांत महासागर को गर्म करता है। इसके बाद यह किस तरह का रूप लेगा, वह हम उसी वक्त समझ पाएंगे। जैसा कि आप (रवि गुप्ता) बता रहे हैं कि मीडिया में इसे भारत के लिए महासंकट या चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, तो उसके बारे में विशेषज्ञता के आधार पर हम अभी कोई जानकारी नहीं दे पाएंगे।
दरअसल, 'रिसर्चगेट' (ResearchGate, 2026) पर वैज्ञानिकों द्वारा 'Extreme El Nino 2026: Causes, Diagnostic Signatures, and Effects in India' शीर्षक से प्रकाशित शोध में बताया गया है कि प्रशांत महासागर में एक भयानक 'सुपर अल-नीनो' आकार ले रहा है।
शोध कर रहे वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल समुद्र की सतह का तापमान औसत से 3°C तक बढ़ सकता है, जो 1877, 1982, 1997 और 2015 के खतरनाक रिकॉर्ड्स को भी पार कर जाएगा। इस सुपर अल-नीनो के मई से जुलाई 2026 के बीच बनने की 82% और 2027 की शुरुआत तक बने रहने की 96% आशंका है। यह अध्ययन इसके गंभीर परिणामों की ओर इशारा करता है।
इस अल-नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाएंगी और भारत में लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) की केवल 90% (लगभग 800 मिमी) बारिश होने का अनुमान है। इससे जल संकट बढ़ सकता है। जैसा कि केंद्रीय जल आयोग ने इस साल की रिपोर्ट में बताया है कि कैसे गंगा जैसी नदियों का भूजल पाताल में जा रहा है, नदियां सूख रही हैं और जल भंडारण तेजी से घट रहा है। हमारी स्पेशल रिपोर्ट में इसे आप समझ सकते हैं-"India River Drying or Dying : 13 नदियां सूखी, पाताल में जा रहा है गंगा-ब्रह्मपुत्र का भूजल; शोधार्थी ने समझाया जल संकट का खतरा!" (आप लिंक पर क्लिक करके पढ़िए)
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि अल-नीनो प्रभाव के कारण कहीं अधिक बारिश, तो कहीं सूखा, तो कहीं अधिक गर्मी जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है। अगर आप देखें तो इनमें से किसी भी परिस्थिति में सीधे तौर पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
वैज्ञानिक कह रहे हैं कि कम बारिश से 60% किसानों की आजीविका खतरे में आ जाएगी और खरीफ की फसल को भारी नुकसान होगा। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत सूखे से जूझेंगे, वहीं चेन्नई जैसे शहरों में मूसलाधार बारिश से तबाही और अचानक बाढ़ आ सकती है। फसलों की बर्बादी से खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, और भीषण गर्मी के कारण एसी (AC) के अत्यधिक इस्तेमाल से देश का पावर ग्रिड (Power Grid) चरमरा सकता है।
सरकार पहले से ही 'अलर्ट मोड' में आकर बचाव की तैयारी करने में लगी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों (भाषा न्यूज एजेंसी) से कहा, "अल-नीनो को लेकर चिंता मेरे मन में हर समय रहती है। पक्के तौर पर तो नहीं, लेकिन 197 जिलों की पहचान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के तौर पर की गई है। मंत्रालय अल-नीनो की स्थिति का आकलन करने के लिए हर सप्ताह बैठकें कर रहा है।"
देश को इस संकट से उबारने के लिए सरकार ने ये बड़े कदम उठाए हैं:
वर्ष 2026 मौसम के लिहाज से भारत के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। प्रशांत महासागर में होने वाला यह जलवायु परिवर्तन (सुपर अल-नीनो) भारत के मौसम, किसानी और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है। अब यह देखना है कि सरकार का 'खेत बचाओ अभियान' और हमारे मौसम वैज्ञानिक किस हद तक इससे बचाव करने में सफल हो पाते हैं।