Mounjaro vs Ozempic: मोटापा और डायबिटीज की जंग में Mounjaro और Ozempic को 'गेम-चेंजर' माना जा रहा है। आइए, डॉ. के.बी. बाड़ोलिया से समझें इन दवाओं का वैज्ञानिक अंतर, सही डाइट चार्ट और साइड इफेक्ट्स।
Mounjaro vs Ozempic: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है। चिकित्सा विज्ञान ने इस दिशा में कई क्रांतिकारी खोजें की हैं, जिनमें (माउंजारो और ओजम्पिक) के नाम सबसे ऊपर हैं। आपके लिए कौन सी बेहतर है? आइए, विस्तार से समझते हैं।
Ozempic और Mounjaro (माउंजारो और ओजम्पिक) मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई इंजेक्टेबल दवाएं हैं। हालांकि, वजन घटाने में इनके चमत्कारी परिणामों ने इन्हें 'वेट लॉस ड्रग्स' के रूप में मशहूर कर दिया है। जहां ओजम्पिक ने इस क्रांति की शुरुआत की, वहीं माउंजारो ने अपनी नई तकनीक से इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है।
इन दोनों दवाओं के काम करने के तरीके में एक बड़ा अंतर है, जिसे समझना जरूरी है। ओजम्पिक के अंदर GLP-1 (Glucagon-like peptide-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट मौजूद है। यह उस हार्मोन की नकल करता है जो खाना खाने के बाद पेट भरा होने का संकेत देता है और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करता है। माउंजारो एक 'ड्यूअल-एक्शन' दवा है। यह न केवल GLP-1 बल्कि GIP (Glucose-dependent insulinotropic polypeptide) पर भी काम करती है। यह दोतरफा हमला शरीर की मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और भूख को काफी कम कर देता है।
क्लिनिकल ट्रायल और ताजा आंकड़ों के अनुसार, वजन घटाने के मामले में माउंजारो को ज्यादा प्रभावी पाया गया है। रिसर्च के अनुसार, उच्च खुराक पर मरीज अपने शरीर के कुल वजन का 15% से 22%तक कम कर सकते हैं। ओजम्पिक लेने वाले मरीजों में आमतौर पर 8% से 15% तक वजन कम होते देखा गया है।माउंजारो के साथ वजन घटने की प्रक्रिया अक्सर ओजम्पिक की तुलना में थोड़ी तेज होती है।
ब्लड शुगर यानी HbA1c को कम करने में भी दोनों दवाएं बेहतरीन हैं, लेकिन आंकड़ों में थोड़ा फर्क है। माउंजारो में HbA1c को 2.0% से 2.5%तक कम करने में सक्षम है। ओजम्पिक में औसतन 1.5% से 1.8% तक शुगर लेवल कम करती है। इसका बड़ा फायदा यह है कि यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए प्रमाणित (एफडीए अप्रूव्ड) है।
भारत में Ozempic का मासिक खर्च लगभग ₹8,000 से ₹12,000 के बीच हो सकता है, जबकि मार्च 2026 के बाद इसके जेनेरिक वर्जन आने से कीमतें ₹4,000 तक गिर सकती हैं। वहीं Mounjaro एक नई दवा है, जिसका मासिक खर्च ₹15,000 से ₹25,000 तक जा सकता है, जो इसे थोड़ा महंगा विकल्प बनाता है।
माउंजारो और ओजम्पिक चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हैं, लेकिन इन्हें 'जादुई गोली' समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। जहां माउंजारोअपने ड्यूअल-एक्शन फॉर्मूले की वजह से तेजी से वजन घटाने में मददगार है, वहीं ओजम्पिक लंबे समय से हृदय रोगों और किडनी की सुरक्षा के लिए एफडीए द्वारा जांची-परखी जा चुकी है।
ओजम्पिक (Ozempic) और माउंजारो (Mounjaro) में से किसी एक को चुनते समय आप मरीज की मेडिकल प्रोफाइल में क्या देखते हैं?
देखिए, जब भी कोई मरीज मेरे पास आता है, तो मैं उसे केवल 'वजन घटाने की मशीन' की तरह नहीं देखता। इन दोनों दवाओं का चुनाव हम मरीज की 3 मुख्य मेडिकल कंडीशंस को देखकर करते हैं।
अगर मरीज को पहले कभी हार्ट अटैक आया है, स्ट्रोक की समस्या रही है या उसका दिल कमजोर है, तो मेरी पहली पसंद ओजम्पिक (Ozempic) होती है। क्योंकि ओजम्पिक को सालों से परखा गया है और यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है कि यह दिल की बीमारियों के खतरे को कम करती है।
अगर मरीज का वजन बहुत ज्यादा है (जैसे BMI 35-40 से ऊपर) और उसकी प्राथमिकता केवल और केवल तेजी से वजन घटाना है, तो मैं माउंजारो की सलाह देता हूं। यह दवा शरीर के दो अलग-अलग रास्तों (GLP-1 और GIP) पर काम करती है, जिससे भूख बहुत कम हो जाती है और वजन ओजम्पिक के मुकाबले थोड़ा ज्यादा तेजी से गिरता है।
डॉक्टर ने पत्रिका से बातचीत में कहा, 'अगर किसी की शुगर बहुत ज्यादा अनियंत्रित है और लंबे समय से काबू में नहीं आ रहा, तो माउंजारो शुगर लेवल को नीचे लाने में थोड़ी ज्यादा ताकतवर साबित हुई है। लेकिन अगर शुगर के साथ-साथ किडनी की भी थोड़ी समस्या है, तो मैं फिर ओजम्पिक को प्राथमिकता देता हूं क्योंकि यह किडनी के लिए सुरक्षित मानी गई है।'
क्या इन दवाओं को 'लाइफस्टाइल ड्रग' के रूप में देखना सही है?
आजकल लोग इसे 'लाइफस्टाइल ड्रग' की तरह देख रहे हैं। यानी कुछ ऐसा जिसे लिया, वजन घटाया और फिर पुराने वजन पर लौट गए। लेकिन असलियत में, यह एक 'मेडिकल ट्रीटमेंट' है, कोई जादुई छड़ी नहीं।
अगर किसी का वजन थोड़ा सा बढ़ा है और वह सिर्फ शादी में अच्छा दिखने के लिए इसे लेना चाहता है, तो यह गलत है। यह दवा उन गंभीर रोगियों के लिए है जिनका वजन उनके लिए जानलेवा बन चुका है (जैसे जिन्हें चलने में दिक्कत है, घुटने जवाब दे रहे हैं या शुगर कंट्रोल से बाहर है)। इसे 'कैजुअल' तरीके से लेना खतरनाक हो सकता है।
इसे सिर्फ अंतिम विकल्प मानकर तब तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए जब तक शरीर पूरी तरह जवाब न दे दे। अगर डाइट और एक्सरसाइज से बात नहीं बन रही, तो डॉक्टर की सलाह पर इसे समय रहते शुरू करना समझदारी है। यह शरीर के बिगड़े हुए मेटाबॉलिज्म को 'रीसेट' करने में मदद करती है। मैं हमेशा कहता हूं कि इन दवाओं को 'बैसाखी' की तरह इस्तेमाल करें। जब आप चल नहीं पा रहे, तो ये आपको सहारा देंगी। लेकिन चलना आपको खुद सीखना होगा। अगर आप इसे लाइफस्टाइल ड्रग मानकर सिर्फ इंजेक्शन पर निर्भर हो जाएंगे और अपनी डाइट या वॉक पर ध्यान नहीं देंगे, तो दवा छोड़ते ही वजन तेज़ी से वापस बढ़ जाएगा।
भारतीयों की डाइट में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होता है। इन दवाओं के साथ मरीज को अपनी थाली में क्या बदलाव करने चाहिए ताकि रिजल्ट बेहतर मिले?
हमारे यहां रोटी, चावल, परांठे और आलू के बिना थाली अधूरी मानी जाती है, जिनमें कार्बोहाइड्रेट बहुत ज्यादा होता है। जब आप ओजम्पिक या माउंजारो जैसे इंजेक्शन ले रहे होते हैं, तो आपकी भूख बहुत कम हो जाती है। ऐसे में अगर आप अपनी छोटी सी भूख में भी सिर्फ कार्बोहाइड्रेट खाएंगे, तो शरीर में प्रोटीन और विटामिन्स की भारी कमी हो जाएगी।
इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा खतरा 'मसल लॉस' (मांसपेशियों का गलना) का होता है। शरीर चर्बी के साथ-साथ मसल्स भी जलाने लगता है। इससे बचने के लिए अपनी थाली में सबसे पहले दाल, पनीर, सोयाबीन, अंडे या चिकन जैसी चीजें रखें। पहले प्रोटीन खाएं, उसके बाद सब्जी और सबसे अंत में रोटी या चावल का एक छोटा हिस्सा लें।
अपनी थाली को प्रोटीन-फर्स्ट थाली बनाइए। अगर आपकी भूख 50% कम हो गई है, तो सुनिश्चित करें कि उस 50% भोजन में पोषण 100% हो। याद रखिए, हम सभी को सिर्फ 'पतला' नहीं, बल्कि 'स्वस्थ और मजबूत' बनाना है।