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हर साल 58,000 मौतें, फिर भी लोग अनजान, जानिए क्या है जिम से लेकर सांप के काटने तक ‘मसल्स टूटने’ की जानलेवा बीमारी

Muscle Breakdown Disease: पेशाब का रंग चाय या कोला जैसा गहरा होना हो सकता है खतरे की घंटी। जानिए क्या है Rhabdomyolysis, जिम से लेकर सांप के जहर तक कैसे बनती है यह जानलेवा स्थिति। किडनी (ATK) और हार्ट फेल्योर से होती है मौत, भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा?
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Jul 23, 2026
Muscles Breakdown Disease Rhabdomyolysis symptoms causes treatment
Muscles Breakdown Disease Rhabdomyolysis symptoms causes treatment: रैब्डोमायोलिसिस कर रही है भारतीयों को परेशान, युवाओं में बढ़ रहा खतरा। (AI Creative)

Muscle Breakdown Disease: भागदौड़ की जिंदगी है, लेकिन कुछ वक्त निकालिए और सोचिए… एक व्यक्ति रोज की तरह जिम गया। कुछ घंटे बाद शरीर में असहनीय दर्द शुरू हुआ, हाथ-पैरों ने जवाब देना शुरू कर दिया और पेशाब का रंग चाय या कोला जैसा गहरा हो गया। अस्पताल पहुंचे जांच हुई तो पता चला कि उसकी मसल्स तेजी से टूट रही हैं और उनसे निकलने वाला प्रोटीन खून में घुलकर किडनियों तक पहुंच चुका है। डॉक्टर्स कह दें, अगर इलाज में जरा भी देर करते, तो मरीज की जान भी जा सकती थी।

यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है, बल्कि रैब्डोमायोलिसिस (Rhabdomyolysis) नामक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। कभी युद्ध और भूकंप में दबे लोगों की समस्या मानी जाने वाली यह बीमारी दुनिया भर में आम हो चली है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। आज रैब्डोमायोलिसिस जिम, हीट स्ट्रोक, वायरल संक्रमण, दवाओं और यहां तक कि अत्यधिक व्यायाम करने वाले युवाओं में भी सामने आ रही है। एमडी मेडिसिन डॉ. विनोद कोठारी से patrika.com ने की बात...

जानिए क्या है Rhabdomyolysis?

Rhabdomyolysis ग्रीक भाषा का शब्द है। जो तीन शब्दों से मिलकर बना है। 'Rhabdo' का अर्थ है धारीदार, 'Myo' यानी मांसपेशी, जबकि Lysis' का मतलब टूटना या नष्ट होना। जब शरीर की मांसपेशियां किसी कारण से तेजी से टूटने लगती हैं, तो उनमें मौजूद मायोग्लोबिन, क्रिएटिन किनसे (Creatine Kinase), पोटैशियम और अन्य रसायन खून में मिल जाते हैं। मायोग्लोबिन अधिक मात्रा में किडनी तक पहुंच जाता है और उसे नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं गंभीर मामलों में एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) का कारण बन सकता है। यही स्थिति Rhabdomyolysis कहलाती है।

पहली बार कब सामने आई यह स्थिति?

मांसपेशियों के टूटने की समस्या को डॉक्टर लगभग 100 साल पहले ही समझ पाए थे। 1923 में पहली बार इसे वैज्ञानिक पहचान मिली। जापान के डॉ. सीगो मिनामी ने पहली बार गंभीर मांसपेशी क्षति और उसके बाद किडनी फेल होने के बीच संबंध का वैज्ञानिक वर्णन किया। यह इस बीमारी को समझने की शुरुआती कड़ी थी।

1941 के युद्ध ने दुनिया को चौंका दिया

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की बमबारी लंदन ब्लिट्ज में हजारों लोग इमारतों के मलबे में दब गए। चौंकाने वाली बात यह थी कि कई लोग बच तो गए, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया।

उस समय ब्रिटेन के मशहूर डॉक्टर सर एरिक ब्यावर और डेसमंड बील ने इन मरीजों का अध्ययन किया और पाया कि लंबे समय तक दबे रहने से मांसपेशियां टूट जाती हैं। इन टूटी मसल्स से निकलने वाला मायोग्लोबीन किडनी को नुकसान पहुंचाता है। इसी शोध के बाद क्रश सिंड्रोम और रैब्डोमायोलिसिस को आधुनिक चिकित्सा में अलग पहचान मिली। यही शोध आज भी इस बीमारी को समझने की नींव माना जाता है।

इस बीमारी से शरीर में आखिर होता क्या है?

एमडी मेडिसिन डॉ. विनोद कोठारी बताते हैं कि मान लीजिए आपकी मांसपेशियां एक मजबूत दीवार हैं। जब किसी कारण से यह दीवार टूटती है, तो उसके अंदर मौजूद पदार्थ सीधे खून में फैल जाते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है मायोग्लोबिन। यह सामान्य मात्रा में नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन जब बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है, तो किडनी की महीन नलिकाओं में जमा होकर उन्हें बंद कर सकता है।

Risk to the heart too: रैब्डोमायोलिसिस गंभीर स्थिति इससे दिल को भी खतरा। (AI Infograhic)

पहले युद्ध की बीमारी, अब जिम की चेतावनी

100 साल पहले सामने आई इस बीमारी से पहले आम लोग नहीं, बल्कि, युद्ध में घायल सैनिकों को, भूकंप में दबे लोगों को, सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को अपना शिकार बनाती थी। लेकिन पिछले दो दशकों में यह तस्वीर बदली है। आज डॉक्टरों के सामने ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिन्हें पहली बार बहुत भारी जिम वर्कआउट कराया गया, जिन्हें भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करना पड़ा, जिन्होंने मैराथन या अल्ट्रा रनिंग की, किसी को वायरल संक्रमण हुआ या कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव हुआ हो, वह भी इस बीमारी का सामना कर रहे हैं। डॉ. कोठारी कहते हैं कि अब यह बीमारी केवल दुर्घटना से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई।

क्यों टूटती हैं मांसपेशियां?

डॉ. कोठारी बताते हैं कि मसल्स टूटने के पीछे एक नहीं कई कारण हो सकते हैं-

1. हीट स्ट्रोक

    जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेट या उससे अधिक हो जाता है, तो मांसपेशियों की कोशिकाएं गर्मी की वजह से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। कोशिकाओं की दीवार टूटने पर उनमें मौजूद मायोग्लोबिन और अन्य पदार्थ खून में निकल जाते हैं, इससे Rhabdomyolysis रोग हो सकता है।

    2. बहुत ज्यादा एक्सरसाइज

      बिना तैयारी या वॉर्म किए ही भारी जिम, मैराथन या फिर हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करने से भी मांसपेशियों पर उनकी क्षमता से ज्यादा प्रेशर पड़ता है। इससे मांसपेशियों के सूक्ष्म रेशे फटने लगते हैं और गंभीर मामलों में उनका टूटना तेजी से बढ़ सकता है। सामान्य व्यायाम के बाद होने वाली हल्की मांसपेशी टूट-फूट शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है और उसी से मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। Rhabdomyolysis तब होता है जब यह क्षति असामान्य रूप से बहुत अधिक हो जाती है और टूटे हुए मांसपेशी प्रोटीन खून में बड़ी मात्रा में पहुंचने लगते हैं। यही स्थिति जानलेवा भी बन सकती है।

      3. सड़क दुर्घटना या मलबे में दबना

        किसी भारी वस्तु के नीचे लंबे समय तक दबे रहने से खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति मांसपेशियों तक पहुंचने में रुकावट आ जाती है। इसके बाद जब अचानक दबाव हटता है, तो क्षतिग्रस्त कोशिकाएं एक साथ टूटती हैं और बड़ी मात्रा में मायोग्लोबिन खून में छोड़ देती हैं।

        4. वायरल संक्रमण

          इन्फ्लुएंजा, कोविड- 19 (COVID-19) और कुछ अन्य वायरस सीधे मांसपेशियों में सूजन पैदा कर सकते हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वायरस का असर मिलकर मांसपेशियों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।

          5. कुछ दवाएं भी नुकसानदायक

            कुछ दवाएं भी इसका कारण हो सकती हैं। जैसे कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन (Statin) दवाओं से बहुत कम मामलों में मांसपेशियों की कोशिकाओं में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे कोशिकाएं कमजोर होकर टूटने लगती हैं, खासकर यदि अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हों।

            Rhabdmyolysis Causes: क्यों टूटने लगती हैं मांसपेशियां, एक्सपर्ट्स ने बताए ऐसे 9 कारण। (AI Generated Infographic)

            6. शराब और नशीले पदार्थ

              अत्यधिक शराब या कुछ नशीले पदार्थ लंबे समय तक बेहोशी, निर्जलीकरण और मांसपेशियों पर लगातार दबाव का कारण बन सकते हैं। इससे मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होकर टूटने लगती हैं।

              7. सांप या अन्य किसी विषैले जीव के काटने से फैलने वाले जहर से

                कुछ जहरीले सांप या किसी जीव के जहर में ऐसे विष (Myotoxins) होते हैं जो, सीधे मांसपेशियों की कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। यही कारण है कि कुछ सर्पदंश के मामलों में Rhabdomyolysis विकसित हो सकता है।

                8. बिजली का करंट

                  तेज बिजली का झटका लगने से मसल्स अचानक और बहुत तेजी से सिकुड़ती हैं। इससे मांसपेशियों के रेशे फट सकते हैं और उनमें गंभीर क्षति हो सकती है।

                  9. लंबे समय तक बेहोश रहना

                    यदि कोई व्यक्ति कई घंटों तक बेहोशी की हालत में और एक ही स्थिति में पड़ा रहे, तो शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है। इससे वहां रक्त प्रवाह कम हो जाता है और मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होकर टूट सकती हैं।

                    Rhabdomyolysis 7 Facts: रैब्डोमायोलोसिस कोई बीमारी नहीं, बस एक स्थिति है। इन महत्वपूर्ण फैक्ट्स को समझना जरूरी। (AI Infographic)

                    दुनियाभर में आम हो चुकी बीमारी

                    अमेरिकन अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन (AAFP), एनसीबीआ और StatePearls के मुताबिक अमेरिका में हर साल करीब 26000 से ज्यादा मामले Rhabdomyolysis के दर्ज किए जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि असल संख्या इससे भी कहीं ज्यादा हो सकती है। क्योंकि कई सामान्य मामले तो सामने ही नहीं आ पाते। रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका, यूरोप और जापान में इस बीमारी पर सबसे ज्यादा शोध हुए हैं।

                    क्या महिलाओं और पुरुषों में बीमारी के जोखिम अलग-अलग हैं?

                    एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पुरुषों में Rhabdomyolysis के मामले ज्यादा देखे जाते हैं, क्योंकि महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा भारी शारीरिक श्रम, हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज और जोखिम वाले कार्य करते हैं। हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र और किसी भी लिंग के व्यक्ति को हो सकती है।

                    इसकी पहचान के लिए कौन-कौन से टेस्ट जरूरी

                    डॉ. कोठारी कहते हैं इसके लिए Creatime Kiase (CK) सबसे जरूरी जांच है। मायोग्लोबिन टेस्ट यह ब्लड या यूरिन दोनों के टेस्ट से पता लगाया जाता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे पोटैशियम, कैल्शियम और फॉस्फेट का टेस्ट करवाया जाता है। वहीं यूरीन टेस्ट के माध्यम से भी इसका पता लगाया जाता है कि यह कितना गंभीर स्तर पर है।

                    Rhabdomyolysis prevention tips: (AI Infographic)

                    कैसे होता है इलाज

                    इसके इलाज के लिए डॉक्टर्स तुरंत IV Fluids देते हैं। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को कंट्रोल करना होता है। इसके बाद किस कारण से यह बीमारी हुई है, उसका ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है। गंभीर मामलों में किडनी खराब होने पर डायलिसिस की जरूरत भी पड़ सकती है।

                    क्या मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है?

                    यदि बीमारी की पहचान शुरुआत में ही हो जाए और समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो ज्यादातर मरीज पूरी तरह से रिकवर हो सकते हैं। लेकिन इलाज में देरी से किडनी फेल, दिल कमजोर होना और कई अंगों के प्रबावित होने का खतरा बढ़ता है। जिससे मरीज की जान भी जा सकती है।

                    भारत में बड़ा खतरा क्यों?

                    • दरअसल भारत में हर साल सांप के काटने से करीब 58,000 लोगों की मौत हो जाती है। इनमें एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) की दर 32 फीसदी तक पाई गई। रिसर्चगेट में प्रकाशित शोध के मुताबिक भारत में सांप के काटने से होने वाली मौतों के मामलों में करीब एक तिहाई मामले इसी कारण सामने आते हैं। ये मामले रसेल वाइपर या सॉ-स्केल्ड वाइपर के काटने के बाद सामने आते हैं। इन केसेस में मरीजों में इसके लक्षण 6 घंटे से 96 घंटों के दौरान नजर आ सकते हैं।
                    • रैब्डोमायोलोसिस को लेकर लोगों में जागरुकता की कमी भी नजर आती है। AIIMS भुवनेश्वर के नेफ्रोलॉजी विभाग, सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली, द जॉर्ज इंसटीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, नई दिल्ली तीनों ने मिलकर 2024 में पिछले 5 दशकों में भारत के सांप काटने के मामलों में किडनी फैल्योर स्टडीज का रिव्यू किया। इऩमें 1464 स्टडीज में से केव 28 शोधों पर विश्लेषण किया गया। इनमें एक स्टडी के विश्लेषण में पाया गया कि पिगमेंट-इंड्यूस्ड नेफ्रोपैथी के 26 मरीजों में से 10 में सीधे सांप के काटने की वजह से रैब्डोमायोलोसिस हुआ। सभी बायोप्सी में एक्यूट ट्यूबलर इंजरी और पिगमेंट कास्ट्स के लक्षण मिले।
                    • भारत के लिए यह स्थिति बड़ा खतरा है, क्योंकि यहां के लोग इस इमरजेंसी मेडिकल स्थिति को लेकर जागरूक नहीं हैं। सांप के काटने पर लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय झाड़-फूंक करवाने पहुंचते हैं। यह गंभीर स्थिति है। वहीं ज्यादातर मामलों में एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोग देर से इलाज कराने पहुंचते हैं, तब तक देर हो चुकी होती है।
                    Snake Bite : फोटो पत्रिका

                    नए शोध जारी

                    • खुशी की बात यह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिक और हेल्थ एक्सपर्ट्स ऐसे बायोमार्कर और उपचार खोजने पर काम कर रहे हैं, जिनसे किडनी को होने वाले नुकसान का पहले से ही पता लगाया जा सके। साथ ही ऐसी दवाओं पर शोध भी चल रहे हैं, जो मांसपेशियों के टूटने से होने वाली क्षति को कम कर सकें।
                    • भारत में भी डॉक्टर्स अपने स्तर पर अपने क्लिनिक पर आने वाले ऐसे मरीजों पर आधारित छोटी स्टडीज या केस रिपोर्ट्स के रूप में कर रहे हैं। लेकिन कोई सेंट्रलाइज्ड बड़े बजट वाला, मल्टी सिटी रिसर्च प्रोग्राम अभी इस पर शुरू नहीं हुआ है। लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने सिफारिशें तक की हैं कि इन पर रिसर्च की सख्त जरूरत है।
                    Updated on:
                    23 Jul 2026 12:31 pm
                    Published on:
                    23 Jul 2026 12:31 pm