
Arrhythmia Symptoms treatment causes in hindi: क्या होता है एरिथमिया? (AI Creative)
Arrythmia Symptoms in Hindi: क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ या होता है कि अचानक दिल की धड़कनें बहुत तेज महसूस होने लगी हों या फिर कुछ पल के लिए ऐसा लगे कि धड़कनें थम सी रही हैं। और कुछ ऐसा जैसे धड़कनें उलझ सी गई हैं? और आपको लगता है कि शायद अचानक घबराहट हुई या फिर आप इसे गैस या तनाव के कारण होने वाली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह Arrhythmia (एरिथमिया) के कारण भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो सामान्य हो तो कुछ ऐसा ही महसूस कराती है जैसा आप करते हैं। लेकिन गंभीर स्थिति में स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर यानी दिल का कमजोर होना या अचानक कार्डियक डेथ तक का कारण बन सकती है। विश्वभर में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार की एरिथमिया से प्रभावित हैं। पहले इसे आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब डॉक्टरों के अनुसार युवा और कामकाजी आबादी में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, मोटापा, मधुमेह और बढ़ती स्क्रीन-लाइफ इस बदलाव के बड़े कारण माने जा रहे हैं।
patrika.com ने AIIMS Bhopal के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ. विक्रम वट्टी से की बात और जाना क्या है Arrhythmia? क्या हैं लक्षण और क्या है इसका इलाज?
आप अब तक दिल को केवल खून पंप करने वाली मांसपेशी समझते रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके भीतर एक नेचुरल रूप से एक इलेक्ट्रिक सिस्टम भी काम करता है। यही वो सिस्टम है जो दिल की हर धड़कन को नियंत्रित करते हुए उसे लयबद्ध बनाए रखता है। लब-डब-लब-डब की आवाज के साथ एक लय में चलते हुए दिल एक मिनट में 60-100 बार तक धड़कता है। और हर धड़कन एक छोटे-से विद्युत संकेत (Electrical Impulse) से शुरू होती है। यह संकेत दिल के दाहिने ऊपरी हिस्से में स्थित एक एसए नोड (Sinoatrial Node) से निकलता है। यही कारण है कि इसे दिल का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है।
यह संकेत पहले दोनों एट्रिया यानी ऊपरी कक्षों तक पहुंचता है। इसके बाद फिर AV Node से होकर विशेष विद्युत मार्गों के माध्यम से दोनों वेंट्रिकल यानी निचले कक्षों तक जाता है। इसी क्रमबद्ध प्रक्रिया से दिल लयबद्ध तरीके से सिकुड़ता है और फैलता है। इसी प्रक्रिया को दोहराता हुआ वह पूरे शरीर में रक्त पहुंचाता रहता है। लेकिन यदि इस विद्युत मार्ग में कहीं भी गड़बड़ी आ जाए, जैसे संकेत बहुत तेज, बहुत धीमे या अनियमित बनने लगें, तो दिल की सामान्य लय बिगड़ने लगती है। इसी स्थिति को चिकित्सा भाषा में एरिथमिया कहा जाता है।
Arrhythmia का मतलब है कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिल की धड़कनों का सामान्य ताल से बाहर हो जाना है। इसमें तीन स्थितियां हो सकती हैं-
कुछ चर्चित मामलों ने दुनिया को यह समझाया कि Arrhythmia केवल बुजुर्गों की नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों की समस्या हो सकती है।
आज डॉक्टर मोबाइल से ECG देखकर Arrhythmia पकड़ लेते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बीमारी की पहचान का सफर एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। उन्नीसवीं सदी के अंत तक डॉक्टर केवल नाड़ी देखकर धड़कनों की गड़बड़ी का अनुमान लगाते थे। वर्ष 1903 में डच वैज्ञानिक विलेम आइंथोवन (Willem Einthoven) ने पहला व्यावहारिक Electrocardiogram (ECG) विकसित किया। इस खोज ने हृदय रोगों की पहचान में क्रांति ला दी। बाद में उन्हें इस कार्य के लिए 1924 का नोबेल पुरस्कार भी मिला। ECG आने के बाद पहली बार यह स्पष्ट हुआ कि कई लोगों की धड़कनें अलग-अलग कारणों से बिगड़ती हैं और सभी मरीजों की समस्या एक जैसी नहीं होती। इसके बाद 20वीं सदी में कार्डियोलॉजी तेजी से विकसित हुई। इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (Electrophysiology) नाम की नई शाखा अस्तित्व में आई, जिसमें दिल की विद्युत प्रणाली का विस्तृत अध्ययन शुरू हुआ।
Updated on:
22 Jul 2026 04:10 pm
Published on:
22 Jul 2026 04:10 pm
बड़ी खबरें
View Allपत्रिका प्लस
ट्रेंडिंग
