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Nepal election 2026: नेपाल की सत्ता पर Gen Z का कब्जा तय, युवाओं में जोश भरने वाले बालेन शाह कौन हैं?

Nepal Election Result 2026: नेपाल में 5 मार्च 2026 को नई सरकार के लिए इस बार रिकॉर्ड तोड़ 60 फीसदी वोटिंग हुई। आज मतगणना जारी है और शुरूआती रूझानों में बालेन शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 43 सीटों में से 35 सीटों पर आगे चल रही है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली पर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन ने बढ़त बना ली है। बालेन शाह कौन हैं, आइए जानते हैं।

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Mar 06, 2026
नेपाल की सत्ता 75 वर्षीय ओली या 35 वर्ष के बालेन शाह का होगा कब्जा? (IANS and @mishra_satish X Account)

Nepal election Result 2026: पिछले साल के सितंबर महीने में हुई Gen Z क्रांति के बाद से यह पहला चुनाव है। नेपाल में इस क्रांति के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि बहुत ज्यादा गैर-बराबरी समाज में असंतोष और विद्रोह को जन्म दे सकता है। आइए जानते हैं कि नेपाल में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह (Balendra Shah) ने लोगों के दिलों में कैसे जगह बनाई और सिर्फ 4 वर्षों से भी कम राजनीतिक कैरियर में प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे?

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Who is Balendra Shah : रैपर से राजनेता बने बालेन

नेपाल में मतदाताओं की उम्मीदें यहां के पहाड़ जितने ऊंचे हैं। हालांकि पिछले चुनावों में अक्सर गठबंधन सरकारें बनती रहीं और टूटती रही हैं। इस बार एक पूर्व रैपर ने मतदाताओं में काफी जोशोखरोश भरने में काफी सफलता हासिल की है। रैपर से राजनतेता बने बालेन ने लोगों में बदलाव को लेकर भरोसा पैदा किया है। लोगों में यह भी उम्मीद जगी है कि वह पहले से राजनीतिक तौर पर स्थापित नेताओं को हरा सकता है, जिनमें वह प्रधानमंत्री भी शामिल हैं जिन्हें Gen Z आंदोलन के बाद पद से हटना पड़ा था।

लाखों नेपालियों का देश से पलायन बना चुनाव का मुद्दा

नेपाल में कई वर्षों से भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण (Patronism) की समस्या इतनी गहरी रही है कि हर साल लाखों नेपाली काम की तलाश में विदेश जाने को मजबूर हो जाते हैं। पलायन कर चुके और उनके पीछे छूटे घर के लोगों के अलावा एक बड़ी आबादी यह चाहती है कि सभी को देश में काम और व्यक्तिगत विकास का निष्पक्ष अवसर मिलें। मतदाता यह भी चाहते हैं कि Gen Z प्रदर्शनों पर हुई घातक कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों से जवाबदेही तय हो। इन प्रदर्शनों के दौरान देशभर में आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिनमें हजारों इमारतें जलकर नष्ट हो गईं।

नेपाल में Gen Z प्रदर्शन में 76 लोग मरे, 21 हजार से ज्यादा घायल

नेपाल में 2025 में 8 सिंतंबर को शुरू हुए Gen Z आंदोलन (Nepal Gen Z protests)के दौरान कुल मिलाकर लगभग 76 लोगों की मौत हुई थी। प्रदर्शन के दौरान 22 आंदोलनकारी, 3 पुलिसकर्मी और 10 कैदी मारे गए थे। लगभग 2100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। कैदियों की मौत जेल में हिंसा के दौरान हुई थी।

Gen Z का हीरो कैसे बना 35 वर्षीय बालेन शाह?

नेपाल में Gen Z का हीरो मिलेनियल पीढ़ी के बालेन शाह बन गए। 35 वर्षीय बालेन काठमांडू के पूर्व मेयर रह चुके हैं। उनकी पहचान नेपाल के प्रसिद्ध रैपर के बतौर भी है। रैपर से राजनेता बने बालेन शाह को नेपाल में बदलाव का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने मेयर के पद पर रहते हुए काठमांडू शहर की कचरा समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया था।

बालेन को युवाओं का अपार समर्थन

बालेन अक्सर नेपाल की सड़कों पर काले चश्मे और काले सूट में दिखाई देते हैं। उनके साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थकों की एक टीम रहती है, जो उनके राजनीतिक विरोधियों और विदेशी शक्तियों पर किए गए तीखे हमलों वाले पोस्टों को प्रचारित करती है। उन्होंने खुद को नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने के उम्मीदवार के रूप में पेश किया है। वह पूर्वी नेपाल के उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली भी चुनाव मैदान में हैं। ओली को Gen Z आंदोलन के बाद हटना पड़ा था, जब प्रदर्शनों के पहले दोनों दिनों के दौरान 19 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद दंगे, आगजनी और अन्य हिंसक झड़पों के चलते कुल 76 लोगों की मौत हो गई।

'देश हित में पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया'

नेपाल में प्रकाशित समाचार पत्रों के अनुसार लोगों में पिछली सरकारों के प्रति काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि सालों से जिन पार्टियों को सरकार बनाने के मौके मिलते रहे, उन्होंने देश के लिए कुछ भी नहीं किया। उन्होंने नेपाल की तरक्की के लिए कुछ भी नहीं किया। यही वजह है कि इस बार पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ और बालेन के समर्थन में खड़ा हो गया है।

होली का रंग राजनेताओं पर भी खूब चढ़ा

नेपाल में 4 मार्च को होली के त्योहार में इस बार राजनीतिक पार्टियों ने भी जमकर भााग लिया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और प्रशंसक होली के रंगों में सराबोर होते दिखे। राजधानी काठमांडू में लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हुए बालेंद्र का नाम चिल्ला रहे थे।

बालेन ने कब जीता था मेयर का चुनाव?

हालांकि बालेन शाह ने मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी लोकप्रियता राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party - RSP) को समर्थन देने में लगाई है। यह एक नई राजनीतिक पार्टी है, जो खुद को साफ-सुथरी, तकनीकी रूप से सक्षम और डिजिटल रूप से आधुनिक बताती है। RSP ने नौ Gen Z उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से कई पहले बालेन शाह के सहयोगी रह चुके हैं।

बालेन शाह ने मेयर के चुनाव में दिग्गजों को हराकर पाई ख्याति

नेपाल के लोकप्रिय नेता बालेन शाह ने काठमांडू महानगर (Mayor Election pf Kathmandu Metropolitan City) के मेयर का चुनाव 26 मई 2022 को निर्दलीय (Independent) उम्मीदवार के रूप में जीता था। बालेन शाह को 61,767 वोट, जबकि दूसरे स्थान पर रहे नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार सृजन सिंह को 38,341 वोट ही मिले। सृजन सिंह, नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री प्रकाश मान सिंह की पत्नी हैं। लोकतांत्रिक नेता गणेश मान सिंह की बहू हैं। वहीं दूसरे और तीसरे स्थान को लेकर कड़ी टक्कर देखी गई। तीसरे स्थान पर रहे सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML)के उम्मीदवार रहे केशव स्थापित को 38,117 वोट मिले थे। केशव 1997 में काठमांडू के मेयर पद के लिए नियुक्त किए गए थे। यह बताया जाता है कि बालेंद्र शाह को जिताने में युवा मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही थी।

पुरानी पार्टियों ने Gen Z नहीं दिया ज्यादा मौका

नेपाल की दो कम्युनिस्ट पार्टियां और मध्यमार्गी वामपंथी नेपाली कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टियों में बहुत कम Gen Z उम्मीदवार हैं। इन पार्टियों के पास मजबूत संगठन और लंबे समय से जुड़े समर्थक हैं। हाल तक इनका नेतृत्व 70 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं के हाथ में था।

75 वर्षीय केपी भी चुनाव में दो-दो हाथ करने उतरे

के. पी. शर्मा ओली K. P. Sharma Oli ने 1970 के दशक की शुरुआत में 18 वर्ष की उम्र में पूर्वी नेपाल में कट्टरपंथी कम्युनिस्ट भूमिगत आंदोलन से अपनी राजनीतिक शुरुआत की। उन्होंने 14 साल जेल में बिताए। 1987 में जेल से रिहा होने के बाद वे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (UML) की केंद्रीय समिति के सदस्य बने। उन्होंने बाद में गृह मंत्री के रूप में भी कार्य किया और अपने प्रभावशाली भाषणों (ओरेटरी) के लिए प्रसिद्ध रहे। केपी इस समय 75 वर्ष के हो चुके हैं और चुनाव के मैदान बालेन शाह के प्रमुख प्रतिद्वंदी भी माने जा रहे हैं।

नेपाली कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष को दिखाया बाहर का रास्ता

नेपाली कांग्रेस में इस साल बड़ा बदलाव हुआ, जब 49 वर्षीय गगन कुमार थापा ने पार्टी अध्यक्ष को पद से हटा दिया। पार्टी अध्यक्ष गगन कुमार से करीब 30 वर्ष बड़े थे। थापा ने अपने इस फैसले के बाद स्थानीय मीडिया से कहा, “Gen Z आंदोलन के कारण ही हमारी पार्टी को लगा कि अब बदलाव का समय आ गया है।”

चुनाव में 65 पार्टियां, मैदान में 160 Gen Z उम्मीदवार

नेपाल के राष्ट्रीय चुनाव में कुल 68 राजनीतिक पार्टियों ने भाग लिया और कुल 3,484 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में 3,088 पुरुष उम्मीदवार और 395 महिला उम्मीदवार (लगभग 11%) ने भाग लिया। लगभग 160 Gen Z उम्मीदवार मैदान में हैं।कुल उम्मीदवारों में लगभग 15% उम्मीदवार 35 वर्ष से कम उम्र के थे। इनमें से लगभग आधे निर्दलीय उम्मीदवार हैं। हालांकि पिछले साल के प्रदर्शनों में महिलाओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी, फिर भी Gen Z महिला उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 15 है।

Gen Z आंदोलन ने इन मुद्दों पर किया था हल्लाबोल

नेपाल में Gen Z क्रांति का प्रसार बहुत तेजी से हुई। 8 सितंबर को युवा नेपाली काठमांडू की सड़कों पर उतर आए। वे भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने इस पर घातक बल का प्रयोग किया। अगले ही दिन पूरे देश में हिंसा फैल गई। कई जगहों पर संगठित आगजनी की घटनाएं हुईं और संसद भवन तथा कई सरकारी मंत्रालयों सहित राज्य के प्रतीक माने जाने वाले भवनों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत हो गई। अंततः प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन तब तक हालात काफी बिगड़ चुके थे। दो दिनों के भीतर ही सरकार लगभग गिर गई थी।

Gen Z प्रदर्शनकारियों के हत्यारों के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई

Gen Z नेताओं के समर्थन से एक कार्यवाहक सरकार बनी, लेकिन सितंबर की हिंसा से जुड़े मामलों में अभी तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। दो जांच आयोग बनाए गए थे, जिन्हें प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई और बाद की हिंसा की जांच करनी थी, लेकिन अभी तक उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

पूर्व राजा ने चुनाव टालने की अपील की थी

पिछले महीने नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने चुनाव टालने की अपील की थी। कुछ नेपाली अब भी उस समय को याद करते हैं जब राजशाही को देश को एकजुट रखने वाली शक्ति माना जाता था। इसके बावजूद चुनाव तय समय पर कराए गए। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के लिए प्रचार अभियान कई बार पॉप कॉन्सर्ट जैसा उत्साह पैदा करता दिखा। किशोरों से लेकर दाढ़ी वाले युवाओं तक, सभी बालेन शाह के समर्थन में नारे लगाते नजर आए। चुनाव के दौरान सड़कों पर मोटरसाइकिलों के काफिले आरएसपी के नीले घंटी वाले झंडे लहराते हुए घूमते रहे।

Published on:
06 Mar 2026 01:22 pm
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