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Netaji Subhas Chandra Bose Death Mystery: तीन जांच समितियों ने क्या कहा, नेताजी के परपोते ने राष्ट्रपति से क्या कर दी मांग?

महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose Birthday) की आज 129वीं जयंती पूरी दुनिया में मनाई जा रही है। नेताजी के परपोते ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ऐसी मांग की है, जिसकी वजह से उनकी मौत से जुड़े विवादों के लिए अंतिम जांच समिति के निष्कर्ष पर एक बार फिर से सवाल खड़ा हो गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कब कौन सी समिति बनी और उसमें क्या निष्कर्ष निकला?

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Jan 23, 2026
Netaji Subhas Chandra Bose death mystery inquiry reports

Netaji Subhash Chandra Bose Death Mistrey : नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर टोक्यो के रेनकोजी मंदिर से उनकी अस्थियां मंगवाने का अनुरोध कर दिया। उनके इस अनुरोध के बाद नेताजी की मौत पर विवाद की जांच के लिए भारत सरकार द्वारा बनाई गई तीसरी समिति की रिपोर्ट में कही गई बात सच नहीं थी। आइए इस रिपोर्ट में यह जानने की कोशिश करते हैं कि नेताजी सुभाष बोस की मौत से जुड़ी तीनों समितियों की रिपोर्ट (Netaji Bose mystery report) क्या कहती हैं?

Netaji Death Mystery : अब तक बन चुकी तीन समितियां

Subhas Chandra Bose death controversy : स्वतंत्रता के बाद से नेताजी सुभाष बोस की मृत्यु की जांच को लेकर तीन आयोग या समितियां (Subhas Bose death investigation) गठित की गईं- शाह नवाज समिति (1956), खोसला आयोग (1970) और मुखर्जी आयोग (2005)। पहले दो समितियों की रिपोर्ट में 18 अगस्त 1945 को ताइपे में विमान दुघर्टना में मौत के होने का समर्थन किया गया था जबकि तीसरे मुखर्जी आयोग में पहले के दोनों रिपोर्टों के निष्कर्ष यानी विमान दुघर्टना में मौत की बात को खारिज दी गई।

नेताजी की मौत को लेकर इस संसद में उठे थे गंभीर सवाल

Bose plane crash 1945 : अगस्त 2006 में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद प्रबोध पांडा ने संसद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यमय ढंग से लापता होने और न्यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग (JMCI) की रिपोर्ट के निष्कर्षों के संबंध में एक महत्वपूर्ण चर्चा में भाग लिया था। उस चर्चा से यह निष्कर्ष निकाला गया था कि नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में हुई कथित विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी।

Photo Credit: @Chandrakbose

'नेताजी की मौत का सच जानने के लिए पूरा देश उत्सुक'

मुखर्जी रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पांडा ने कहा था कि हमारे देश में एक ही मुद्दे पर तीन आयोग या समितियां गठित करने की कोई मिसाल नहीं है। यह स्वाभाविक है कि इससे इस मुद्दे को दिया गया अत्यधिक महत्व स्पष्ट होता है। नेताजी का निधन स्वतंत्रता से पहले या बाद में भी हो सकता है। लेकिन पूरा देश उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में सच्ची जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्सुक है।

1945 से ही नेताजी की मृत्यु को लेकर शुरू हो गया था विवाद

नेताजी सुभाष बोस की मृत्यु को लेकर 1945 से ही विवाद शुरू हो गया था। असल में 23 अगस्त 1945 को टोक्यो रेडियो पर यह घोषणा की गई थी कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 8 अगस्त, 1945 को एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई।' इस रिपोर्ट पर विवाद खड़ा हो गया। यह रिपोर्ट विवादों से भरी थी और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता था।

Netaji Death Mystery : शाह नवाज़ समिति का हुआ था गठन

नेताजी सुभाष बोस की मौत को लेकर विवादों को दूर करने के लिए भारत सरकार ने सबसे पहले 1956 में शाह नवाज समिति का गठन किया। इसके अध्यक्ष शाह नवाज खान थे। समिति की जांच रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह था कि नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवान (तत्कालीन फ़ॉर्मोसा) में हुई। यह मृत्यु जापानी सैन्य विमान दुर्घटना में गंभीर जलने के कारण हुई थी। नेताजी विमान में सवार होकर टोक्यो जा रहे थे। ताइहोकू (आज का ताइपे) में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कुछ घंटों बाद अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। जापानी डॉक्टरों, नर्सों और सैन्य अधिकारियों की गवाही को विश्वसनीय माना गया। नेताजी के अंतिम संस्कार के बाद राख को टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखा गया।

Photo courtesy: National Gandhi Museum

शाह नवाज़ समिति की रिपोर्ट पर असहमति और विवाद

इस जांच समिति के एक सदस्य सुरेंद्र नाथ बोस जो नेताजी के बड़े भाई, ने रिपोर्ट से असहमति जताई। उनका कहना था कि रिपोर्ट में जो बातें कही गई हैं, उसका कोई ठोस भौतिक आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि राख की पुष्टि नहीं हो सकी और विमान दुर्घटना की कहानी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है।

Netaji Subhas Bose Death Mystery : क्या थी खोसला आयोग की रिपोर्ट?

4 सितंबर 1974 को संसद में प्रस्तुत की गई खोसला आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, नेताजी सुभाष चंद्र बोस 18 अगस्त, 1945 को फॉर्मोसा में हुए विमान हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए थे और उसी रात उनका निधन हो गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि बोस को 12 अगस्त, 1945 को सूचित किया गया था कि युद्ध समाप्त होने वाला है और जापान ने मित्र देशों की सेनाओं के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अपनी आगे की योजनाओं पर चर्चा की। यह तय किया गया कि बोस को सिंगापुर छोड़कर रूस भागने का प्रयास करना चाहिए, जहां उन्हें शरण मिलने की उम्मीद थी।

16 अगस्त को बोस कर्नल हबीबुर रहमान और अन्य लोगों के साथ सिंगापुर से रवाना हुए और उसी दिन बैंकॉक पहुंचे और वहां रात बिताई। 17 अगस्त की सुबह वे दो विमानों से साइगॉन के लिए रवाना हुए। जिन विमानों में बोस और उनके साथी साइगॉन गए थे, उन्हें वापस लौटना पड़ा और यात्रा के अगले चरण के लिए नई व्यवस्था करनी पड़ी।

World's First Netaji Subhash Chandra Bose Temple built in Varanasi

जापानी बमवर्षक विमान में नेताजी को मिली थीं सिर्फ दो ​सीटें

बोस को सूचित किया गया कि जापानी बमवर्षक विमान में उन्हें केवल दो सीटें ही दी जा सकती हैं। वह बहुत परेशान थे क्योंकि वह अपने दल के सभी सदस्यों को अपने साथ ले जाना चाहते थे। वह हबीबुर रहमान बोस के साथ गए। उनका विमान 17 अगस्त की शाम को तुरैन पहुंचा। अगले दिन सुबह यह विमान तूरैन से रवाना हुआ और दोपहर में ताइपे पहुंचा। 18 अगस्त को दोपहर 2:35 बजे विमान ने उड़ान भरी, लेकिन कुछ ही सेकंड में उसका एक इंजन टूट गया और ताइहोकू हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान के टुकड़े-टुकड़े हो गए और उसमें आग लग गई। पायलट की विमान के अंदर ही मौत हो गई। चालक दल के बाकी सदस्य और यात्री बाहर निकल आए, लेकिन सभी झुलस गए थे। बोस को गंभीर चोटें आईं। उन्हें पास के सेना अस्पताल ले जाया गया, जहां बोस की मृत्यु हो गई।

Netaji Death Mystery : मुखर्जी आयोग के मुख्य निष्कर्ष

मुखर्जी आयोग ने पहले दो आयोगों की रिपोर्ट खारीज कर दी। इस समिति का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज मनोज कुमार मुखर्जी को बनाया गया। इस रिपोर्ट में पहले की दोनों रिपोर्ट में जिक्र ताइहोकू विमान हादसे की थ्योरी खारिज कर दी गई। आयोग ने साफ कहा कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान (ताइहोकू) में विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु साबित नहीं होती। उनका कहना है कि इस दुघर्टना से जुड़े ठोस, विश्वसनीय और निर्णायक सबूत नहीं मिले। रिपोर्ट में यह तक कह दिया गया कि नेताजी की मौत का कोई पुख्ता प्रमाण (न ही मृत्यु प्रमाण पत्र मिला और ना ही निर्विवाद साक्ष्य) नहीं मिला। मुखर्जी आयोग ने जापान के रेंकोजी मंदिर रखीं नेताजी की अस्थियों को झूठा बताया। आयोग ने यह संभावना जताई कि नेताजी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ (USSR) में हो सकते हैं। हालांकि इस बात की भी अबतक पुष्टि नहीं हो सकी है।

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