
Omega3 Supplements : समाज में हर किसी को काम का तनाव और उम्र बढ़ने के साथ भूलने की बीमारी (Dementia या Alzheimer’s) का खतरा सताने लगा है। ऐसे में बाजार में मिलने वाले ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स (Omega-3 Supplements), खासकर फिश ऑयल कैप्सूल्स (Fish Oil Pills), को 'ब्रेन बूस्टर' या 'याददाश्त बढ़ाने वाली जादुई गोली' के रूप में प्रमोट किया जाता है।
अपनी दिमागी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए करोड़ों लोग हर साल इन पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं। लेकिन क्या ये सप्लीमेंट्स वाकई हमारे दिमाग के लिए उतने ही चमत्कारी हैं, जितना विज्ञापनों में दावा किया जाता है? हाल ही में आए कुछ बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स और रिसर्च के नतीजों ने न केवल आम जनता को, बल्कि खुद वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। आइए समझते हैं कि क्या हमें इन सप्लीमेंट्स को लेना बंद कर देना चाहिए?
कैलिफोर्निया की 'केक मेडिसिन ऑफ यूएससी' (Keck Medicine of USC) के शोधकर्ताओं ने 55 से 80 वर्ष की उम्र के उन लोगों पर एक लंबी और गहन स्टडी की, जिनमें अल्जाइमर बीमारी का आनुवंशिक (Genetic) खतरा सबसे ज्यादा था। वैज्ञानिकों का मानना था कि ओमेगा-3 फैटी एसिड (विशेष रूप से DHA) की भारी खुराक देने से इन लोगों के दिमाग को कमजोर होने से बचाया जा सकता है। रिसर्चर्स ने प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा। एक समूह को असली ओमेगा-3 के हाई-डोज सप्लीमेंट्स दिए गए, जबकि दूसरे समूह को 'प्लेसिबो' (बिना दवा वाली नकली गोली) दी गई। दो साल बाद जब दोनों समूहों के दिमाग का परीक्षण किया गया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे।
रिसर्च कहती है कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट (गोली) के मुकाबले 'होल फूड' यानी प्राकृतिक भोजन के रूप में ज्यादा बेहतर काम करता है। न्यूट्रिशन साइंस के हिसाब से इसके पीछे क्या लॉजिक है?
न्यूट्रिशन साइंस के नजरिए से ओमेगा-3 सप्लीमेंट (गोली) के मुकाबले 'होल फूड' यानी प्राकृतिक भोजन के ज्यादा असरदार होने के पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं:
हमारे देश में एक बड़ी आबादी शाकाहारी (Vegetarian) है। शाकाहारी लोगों के लिए ओमेगा-3 (विशेषकर DHA और EPA) के सबसे बेहतरीन और असरदार प्राकृतिक स्रोत कौन से हैं?
आमतौर पर अखरोट और अलसी (Flaxseeds) जैसे शाकाहारी स्रोतों से अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) मिलता है, जिसे हमारा शरीर बहुत कम मात्रा में (5 से 10%) सक्रिय DHA और EPA में बदल पाता है।
मार्केट में मिलने वाले फिश ऑयल या ओमेगा-3 कैप्सूल्स के 'ऑक्सीडाइज्ड' (खराब) होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। एक आम उपभोक्ता कैसे पहचान करे कि जो सप्लीमेंट वह खा रहा है, वह सुरक्षित है या नहीं?
एक आम उपभोक्ता (Consumer) इन आसान तरीकों से ओमेगा-3 या फिश ऑयल कैप्सूल के सुरक्षित होने की पहचान कर सकता है:
एक स्वस्थ वयस्क (Adult) को अपने दिमाग और दिल की सेहत के लिए रोजाना कितने ओमेगा-3 की जरूरत होती है, और क्या इसे बिना किसी सप्लीमेंट के सिर्फ रोजमर्रा की भारतीय डाइट से पूरा किया जा सकता है?
एक स्वस्थ वयस्क (Adult) को दिल और दिमाग की सेहत के लिए रोजाना 250 से 500 मिलीग्राम (mg) संयुक्त EPA और DHA की जरूरत होती है।