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नक्सल पर जीत के बाद PM मोदी-अमित शाह का नया विजन, क्या पर्यटन से बदलेगी बस्तर की तस्वीर? देखें स्पेशल रिपोर्ट

Bastar Tourism: नक्सलवाद पर सफलता के बाद बस्तर को पर्यटन हब बनाने पर केंद्र का फोकस। जानिए PM मोदी–अमित शाह के विजन, जमीनी चुनौतियों और पूरी स्पेशल रिपोर्ट।
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Jul 23, 2026
Bastar Tourist Destinations
पर्यटन का नया नक्शा, लेकिन पुरानी चुनौतियां

Bastar Tourism Development: कभी नक्सलवाद के कारण देशभर में पहचान बनाने वाला बस्तर अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में हालात तेजी से बदले हैं। केंद्र सरकार अब बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक कई मंचों से बस्तर में पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख कर चुके हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता के बाद पर्यटन बस्तर की नई पहचान बन पाएगा? क्या सड़क, सुरक्षा, मोबाइल नेटवर्क, होटल, गाइड और अन्य बुनियादी सुविधाओं के बिना बस्तर पर्यटन हब बन पाएगा? जमीनी तस्वीर फिलहाल कई चुनौतियों की ओर इशारा करती है। जिन पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय बनाने की बात हो रही है, वहां तक पहुंचने वाली सड़कें कई जगह जर्जर हैं। ठहरने, भोजन, शौचालय, पेयजल, इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, प्रशिक्षित गाइड और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी अधिकांश स्थानों पर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में रोडमैप तैयार भी हो जाए तो उसे धरातल पर उतारना आसान नहीं होगा।

पर्यटन का नया नक्शा, लेकिन पुरानी चुनौतियां

नक्सलवाद कमजोर पड़ने के बाद अब नंबी जलधारा, हांदावाड़ा जलप्रपात, तिरथा, कुटुमसर गुफा, कैलाश गुफा, मेंदरी घूमर, चित्रकोट जलप्रपात और कांगेर घाटी जैसे पर्यटन स्थलों को विकसित करने की चर्चा तेज हुई है। इनमें से कई स्थान ऐसे हैं, जहां का प्राकृतिक सौंदर्य किसी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल से कम नहीं है। लेकिन इन स्थलों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर कच्चे और खराब रास्तों से गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में कई मार्ग बंद हो जाते हैं। ऐसे में कई पर्यटक बीच रास्ते से ही लौटने का फैसला कर लेते हैं।

केवल पर्यटन स्थल नहीं, पर्यटन व्यवस्था भी चाहिए

विशेषज्ञों का कहना है कि आज का पर्यटक केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने नहीं आता। वह सुरक्षित यात्रा, गुणवत्तापूर्ण सड़क, ऑनलाइन जानकारी, प्रशिक्षित गाइड, साफ-सफाई, स्थानीय व्यंजन, होम-स्टे, हस्तशिल्प बाजार और बेहतर ठहराव जैसी सुविधाएं भी चाहता है। यदि इन व्यवस्थाओं का विकास किया जाए तो पर्यटन सीधे स्थानीय युवाओं के रोजगार, महिला स्व-सहायता समूहों, हस्तशिल्प, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ सकता है।

यूनेस्को सूची में शामिल धुड़मारास तक पहुंचना भी चुनौती

बस्तर का धुड़मारास यूनेस्को की सूची में शामिल है, लेकिन वहां तक पहुंचना आज भी पर्यटकों के लिए आसान नहीं है। यहां भी पर्यटकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ता है। जब यूनेस्को की सूची में शामिल स्थल का यह हाल है तो अन्य पर्यटन स्थलों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

सड़क नहीं, तो पर्यटन कैसे बढ़ेगा?

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पर्यटन स्थल की पहली जरूरत बेहतर कनेक्टिविटी होती है। बस्तर में आज भी अनेक पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय से जुड़े होने के बावजूद सुगम सड़क सुविधा से वंचित हैं। जहां सड़क है, वहां संकेतक बोर्ड नहीं हैं। जहां प्राकृतिक स्थल हैं, वहां सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। जहां पर्यटक पहुंचते हैं, वहां प्रशिक्षित स्थानीय गाइड नहीं हैं। ऐसे में पर्यटक केवल तस्वीरें लेकर लौट जाते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

प्रसाद योजना से बाहर रहा दंतेश्वरी धाम

बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मां दंतेश्वरी मंदिर से जुड़ी है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा भी इसी आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की प्रसाद योजना में दंतेश्वरी धाम को अब तक स्थान नहीं मिल पाया। दूसरी ओर प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों को इस योजना का लाभ मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दंतेश्वरी धाम को राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए तो बस्तर में वर्षभर धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं कई गुना बढ़ सकती हैं।

बस्तर को चाहिए समग्र पर्यटन नीति

पर्यटन जानकारों का मानना है कि बस्तर के लिए अलग पर्यटन मास्टर प्लान तैयार करने की जरूरत है। इसमें सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, वे-फाइंडिंग साइन, इको-फ्रेंडली होम-स्टे, स्थानीय युवाओं को गाइड प्रशिक्षण, साहसिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को एक साथ जोड़ने की रणनीति बनाई जानी चाहिए।

सवाल: क्या पर्यटन से बदलेगी बस्तर की तस्वीर?

इस स्पेशल रिपोर्ट से साफ है कि PM नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाओं की बात कही है, लेकिन इन संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। मौजूदा हालात बताते हैं कि केवल प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों की पहचान से बस्तर देश का प्रमुख पर्यटन हब नहीं बन सकता। सड़क, सुरक्षा, मोबाइल नेटवर्क, होटल, प्रशिक्षित गाइड, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना होगा। यानी पर्यटन से बस्तर की तस्वीर बदल सकती है, लेकिन इसके लिए घोषणाओं के साथ ठोस अधोसंरचना, समग्र पर्यटन नीति और प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी जरूरत होगी। तभी नक्सलवाद के बाद बस्तर की नई पहचान पर्यटन के रूप में स्थापित हो सकेगी।

Updated on:
23 Jul 2026 11:41 am
Published on:
23 Jul 2026 11:41 am