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Real-Time Cyber Security SDN Model: हैकिंग का खेल खत्म! IIIT रायपुर की रिसर्चर ने तैयार की रीयल-टाइम साइबर शील्ड, जानिए इसके बड़े फायदे

Real-Time Cyber Security SDN Model: ट्रिपलआईटी (IIIT) रायपुर की रिसर्चर डॉ. लिलिमा जैन ने सॉफ्टवेयर डिफाइंड नेटवर्किंग (SDN) की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक ऐसा उन्नत मॉडल विकसित किया है...

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May 03, 2026
हैकिंग का खेल खत्म! (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Real-Time Cyber Security SDN Model: डिजिटल युग में जहां एक क्लिक से बैंक अकाउंट खाली होने, यूपीआई ट्रांजैक्शन रुकने और स्मार्ट सिटी जैसी व्यवस्थाएं ठप पड़ने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, वहीं अब इस खतरे को कम करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। ट्रिपलआईटी (IIIT) रायपुर की रिसर्चर डॉ. लिलिमा जैन ने सॉफ्टवेयर डिफाइंड नेटवर्किंग (SDN) की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक ऐसा उन्नत मॉडल विकसित किया है, जो रीयल-टाइम में साइबर हमलों की पहचान कर उन्हें तुरंत रोक सकता है।

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SDN की कमजोरी पर फोकस

सॉफ्टवेयर डिफाइंड नेटवर्किंग (SDN) एक ऐसी तकनीक है जिसमें पूरा नेटवर्क एक केंद्रीकृत कंट्रोल सिस्टम से संचालित होता है। हालांकि यह सिस्टम को आसान और लचीला बनाता है, लेकिन अगर कंट्रोलर हैक हो जाए तो पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। डॉ. जैन का शोध इसी कमजोरी को दूर करने पर केंद्रित है।

डेटा प्लेन स्तर पर सुरक्षा

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सुरक्षा को कंट्रोलर तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सीधे डेटा प्लेन स्तर पर लागू करती है। इससे साइबर हमलों को नेटवर्क के भीतर ही शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता है।

AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल

इस मॉडल में क्वांटाइज्ड CNN जैसे लाइटवेट एआई मॉडल का उपयोग किया गया है, जो हाई-स्पीड नेटवर्क में भी तेजी से काम करते हैं। साथ ही, फ्यूजन लर्निंग तकनीक के जरिए हमलों की पहचान अधिक सटीक और मजबूत बनती है।

रीयल-टाइम डिटेक्शन और तुरंत एक्शन

यह तकनीक सिर्फ साइबर हमलों की पहचान ही नहीं करती, बल्कि तुरंत प्रतिक्रिया देकर उन्हें रोक भी देती है। खासकर DDoS जैसे हमलों को शुरुआती स्तर पर ही निष्क्रिय करने में यह सक्षम है।

लैब में सफल परीक्षण

इस मॉडल को ट्रिपलआईटी रायपुर की लैब में टोफिनो हार्डवेयर प्रोग्रामेबल स्विच पर टेस्ट किया गया। विभिन्न प्रकार के DDoS हमले उत्पन्न कर इसकी क्षमता को परखा गया, जिसमें यह मॉडल सफल साबित हुआ।

नतीजे क्या रहे?

  • हाई एक्यूरेसी और प्रिसिजन
  • कम लेटेंसी में रीयल-टाइम डिटेक्शन
  • कम संसाधनों में बेहतर प्रदर्शन

आम लोगों को क्या फायदा?

इस तकनीक के आने से आम यूजर्स को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं-

  • इंटरनेट होगा तेज और स्थिर, क्योंकि डीडीओएस जैसे हमले शुरुआती स्तर पर ही रुकेंगे
  • बैंकिंग, यूपीआई और सरकारी सेवाओं में डाउनटाइम कम होगा
  • रीयल-टाइम सुरक्षा से बिना रुकावट डिजिटल सेवाएं मिलेंगी
  • डेटा ज्यादा सुरक्षित रहेगा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ेगा
  • कंट्रोल नहीं, सीधे डेटा प्लेन स्तर पर ही सुरक्षा इंटेलिजेंस
  • क्वांटाइज्ड सीएनएन जैसे लाइटवेट एआई मॉडल, जो हाई-स्पीड नेटवर्क में भी काम करें
  • फ्यूजन लर्निंग से ज्यादा सटीक और मजबूत डिटेक्शन
  • फोकस सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि तुरंत प्रतिक्रिया और कम लेटेंसी। यानी यह एक इंटेलिजेंट, लाइटवेट और रीयल-टाइम सिक्योरिटी फ्रेमवर्क है, जो मौजूदा सिस्टम से ज्यादा व्यावहारिक है।
  • डेटा प्लेन और मशीन लर्निंग

कहां होगा इस्तेमाल?

यह तकनीक भविष्य में कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है-

  • डेटा सेंटर्स और क्लाउड नेटवर्क
  • एंटरप्राइज SDN सिस्टम
  • ISP और 5G/6G नेटवर्क

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Published on:
03 May 2026 01:20 pm
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