Naxalism End Date 31 March 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 28 सितंबर 2025 को 'नक्सल मुक्त भारत' समापन समारोह को संबोधित करते हुए दावा किया था कि 31 मार्च 2026 तक देश से हथियारी नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। आइए जानते हैं कि नक्सल मुक्त भारत बनाने के क्रम में क्या-क्या हुआ, सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
Naxalism in India: ओडिशा के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक सुकुरु ने मंगलवार को कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सुकुरु के साथ चार अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। वहीं, मंगलवार को ही दूसरी ओर छत्तीसगढ़ से यह खबर आई कि लगभग 30 वर्षों से सक्रिय वरिष्ठ नक्सली नेता पापा राव अपने 12-14 साथियों और हथियारों के साथ जल्द ही सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण करने वाला है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 28 सितंबर 2025 को यह संकल्पकिया था कि 31 मार्च 2026 से पहले देश से वामपंथी उग्रवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। वह तारीख बिल्कुल सामने आ चुकी है। क्या देश से नक्सली उग्रवाद खत्म हो जाएगा? इस दिशा में क्या-क्या हुआ, आइए जानते हैं।
ओडिशा में सुकुरु लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था। कंधमाल और आसपास के क्षेत्रों में उग्रवादी गतिविधियों में उसकी गहरी भूमिका के कारण वह एजेंसियों के रडार पर था। उस पर 55 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसे माओवादी संगठन में एक अहम नेता माना जाता था। उसका आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य विधानसभा में यह बताया कि ओडिशा में माओवादियों की मौजूदगी काफी कम हो गई है और अब केवल लगभग 15 माओवादी कैडर ही सक्रिय बचे हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री ने हाल ही में यह भी बताया कि 15 मार्च तक 96 माओवादी उग्रवादी सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति का श्रेय तेज़ सुरक्षा अभियानों और प्रभावी पुनर्वास नीतियों को दिया।
वहीं माओवादी उग्रवाद के देश के एक बड़े केंद्र छत्तीसगढ़ में लगभग 30 वर्षों से सक्रिय वरिष्ठ नक्सली नेता पापा राव हथियार सहित अपने 12 से 14 सदस्यों के साथ सुरक्षा बलों के सामने अब आत्मसमर्पण करने वाला है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि सुकुरु के टीम में 21 लोग हैं। ये दोनों ही घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लिए निर्धारित 31 मार्च की समयसीमा से ठीक एक सप्ताह पहले सामने आया है।
पापा राव स्कूल ड्रॉपआउट है। वर्ष 1997 में वह नक्सल आंदोलन में शामिल हुआ था। यह माना जाता है कि वह कई बड़े नक्सली हमलों की साजिशों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ कुल 45 मामले दर्ज हैं। पापा राव प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य है, जो राज्य स्तर का सबसे उच्च निकाय है। वह दक्षिण बस्तर जोनल ब्यूरो कमेटी का सचिव भी है और पार्टी की पश्चिम बस्तर डिविजनल कमेटी का प्रभारी भी रहा है। वह 2010 के ताड़मेटला हमले से भी जुड़ा था। घात लगाकर किए गए इस हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा पापा राव जनवरी 2025 में बीजापुर के अंबेली में हुए नक्सली हमले में भी शामिल था, जिसमें आठ सुरक्षा कर्मियों और एक नागरिक ड्राइवर की मौत हुई थी। इसकी गिरफ्तारी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
भारत में माओवादी या नक्सलवाद लंबे समय तक आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। खासकर छत्तीसगढ़ (बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा आदि), झारखंड (गुमला, चतरा, सिंहभूम आदि), ओडिशा ओडिशा (कंधमाल, मलकानगिरी, कोरापुट आदि), महाराष्ट्र (गढ़चिरौली क्षेत्र) और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना (अराकू वैली, पाडेरू, चिंतापल्ली- विशाखापत्तनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम के आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहा और तेलंगाना के खम्मम, वारंगल, करीमनगर क्षेत्र) के कई हिस्से दशकों तक इससे प्रभावित रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने 'नक्सलवाद खत्म करने' के लिए व्यापक और आक्रामक अभियान चलाए हैं, जिनके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।
वर्ष 2014 में केंद्र में बनी मोदी सरकार ने माओवादी उग्रवाद को खत्म करने की रणनीति में सुरक्षा के साथ विकास को जोड़कर काम करना शुरू किया। इस नीति को अंजाम देने के लिए सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ और बीएसएफ ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। इस काम में लगे जवानों को ड्रोन और उन्नत हथियार मुहैया कराए गए।
सरकार ने माओवादी इलाकों में सड़कों के नेटवर्क का विस्तार किया। इसके साथ इन इलाकों में स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। माओवादियों के सरेंडर करने पर उन्हें नौकरी या पैसे दिए गए। केंद्र और राज्य सरकारों ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास से जुड़ी योजनाओं का विस्तार किया। यही वजह है कि माओवादी उग्रवाद सिमटकर कुछ जिलों में रह गया।
वर्ष 2011 में मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी मारा गया। वह पोलित ब्यूरो का सदस्य था। यह माना जाता है कि माओवाद उग्रवाद के नेतृत्व की क्षति किशनजी के मारे जाने के बाद से ही शुरू हो गई। पिछले एक दशक से ज्यादा समय से केंद्र और राज्य सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों में कई शीर्ष माओवादी नेता मारे गए, जिसके चलते संगठन की कमांड संरचना को बेहद झटका लगा। कई रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक दशक में 2014 से 2025 के बीच लगभग 25-30 शीर्ष स्तर के माओवादी नेता (केंद्रीय समिति, स्पेशल जोनल/डिविजनल कमांडर स्तर) मारे गए हैं। सिर्फ 'ऑपरेशन कगार' में ही 31 बड़े नक्सली नेता मारे गए। वहीं 2025 के बाद 100+ से ज्यादा माओवादी सइस्यों ने सरेंडर किया।