Patrika Special News

Medical Innovation: सहजन-पुदीना, कमल और पपीते से बनी छालों की दवा, भिलाई के शोधकर्ताओं को मिला पेटेंट

Medical Innovation: भिलाई में सहजन, पुदीना, कमल और पपीते के अर्क से बनी हर्बल लोजेंज को भारत सरकार से पेटेंट मिला है। जानिए दो साल की रिसर्च में तैयार इस दवा की खासियत।
2 min read
Aug 31, 2026
Bhilai Medical Innovation
रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी (Photo Patrika)

Bhilai Medical Innovation: मुंह के छालों की आम समस्या के उपचार के लिए रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने चार औषधीय पौधों के अर्क से हर्बल लोजेंज विकसित किया है। सहजन, पुदीना, कमल और पपीते के अर्क से तैयार इस दवा को मुंह में रखकर धीरे-धीरे घुलने के लिए डिजाइन किया गया है। दो साल के शोध के बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने का दावा किया गया है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इसके लिए पेटेंट भी जारी किया है। पेटेंट की अवधि 20 वर्ष है।

जेल-मलहम से अलग है तकनीक

मुंह के छालों के लिए आमतौर पर जेल, क्रीम या मलहम का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन लार के कारण ये प्रभावित स्थान से जल्दी हट जाते हैं। विकसित लोजेंज धीरे-धीरे घुलते हुए औषधीय तत्व छोड़ती है, जिससे छाले वाली जगह पर दवा का संपर्क अपेक्षाकृत लंबे समय तक बनाए रखने का उद्देश्य है। इसमें मैनिटोल, बबूल की गोंद और अन्य सहायक सामग्री का भी इस्तेमाल किया गया है।

छह शोधकर्ताओं को पेटेंट

आविष्कार का नाम ‘मुंह के छालों के लिए बहु-औषधीय वनस्पति आधारित लोजेंज बनाने की विधि और उसका निर्माण’ है। डॉ. गुप्ता के साथ आस्था वर्मा, नेहा दुबे, डॉ. निकिता वर्मा, भूषण मुले और विनिता गोती को भी पेटेंट धारक के रूप में शामिल किया गया है।

दर्द और जलन से राहत का लक्ष्य

शोध में पौधों के अर्क के जरिए छालों से होने वाले दर्द, जलन और सूजन में राहत देने के साथ घाव भरने में मदद की संभावना पर काम किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक औषधीय पौधों के गुणों को आधुनिक दवा निर्माण तकनीक के साथ जोडक़र स्थानीय रूप से लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली दवा विकसित करना है।

दो साल के शोध के बाद पेटेंट

इस तकनीक को विकसित करने में शोधकर्ताओं को करीब दो वर्ष का समय लगा। इस दौरान लोजेंज की संरचना, औषधीय पौधों के अर्क और उन्हें लोजेंज के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया गया। शोधकर्ताओं का दावा है कि अध्ययन के दौरान इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। पेटेंट मिलना इस शोध के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, किसी पेटेंट का जारी होना अपने आप में किसी दवा की चिकित्सकीय प्रभावशीलता या उपचार की आधिकारिक मंजूरी का प्रमाण नहीं होता। विकसित उत्पाद को व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले संबंधित नियामकीय और चिकित्सकीय मानकों को पूरा करना आवश्यक होगा।

पारंपरिक पौधों और आधुनिक तकनीक का मेल

इस नवाचार की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय और पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों के अर्क को आधुनिक दवा निर्माण तकनीक के साथ जोड़ा गया है। शोधकर्ताओं का उद्देश्य ऐसी फॉर्मुलेशन तैयार करना है, जिसे मुंह में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके और जो प्रभावित स्थान पर औषधीय तत्वों का संपर्क अपेक्षाकृत लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम हो।

Updated on:
31 Aug 2026 02:08 pm
Published on:
31 Aug 2026 02:07 pm