Arms Stocks: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने यूक्रेन को दुनिया का सबसे हथियार आयातक देश बना दिया। वहीं पाकिस्तान और चीन से तनाव का माहौल बने रहने के चलते भारत भी हथियार खरीदने की होड़ में दूसरे नंबर पर पहुंच गया। इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट पढ़िए।
Arms stocks Import and Export : दुनिया में इस समय चारों ओर जंग छिड़ी पड़ी है या फिर सभी देश इसकी तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। कम से कम SIPRI के हालिया आंकड़ों से तो यही प्रतीत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यूक्रेन, भारत, कतर, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में शामिल हो चुके हैं। जाहिर है कि हथियारों की खरीदारी के चलते रूस, फ्रांस, चीन और जर्मनी जैसे देशों से निर्यात भी बढ़ा है।
Ukraine War Stocks: रूस के साथ यूक्रेन का युद्ध 22 फरवरी 2022 को शुरू हुआ था और चार वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जारी है। इस जंग में दोनों ओर के 5 लाख से ज्यादा लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस जंग के चक्कर में यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन चुका है। 2020–2024 के बीच वैश्विक हथियार आयात में यूक्रेन की हिस्सेदारी लगभग 8.8% रही। यूक्रेन को मुख्य रूप से अमेरिका, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों से हथियार मिल रहे हैं। युद्ध के कारण यूक्रेन को टैंक, मिसाइल प्रणाली, ड्रोन, वायु रक्षा प्रणाली और गोला-बारूद जैसी चीजों की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ी। रूस के साथ युद्ध ने यूरोप में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया और इसी कारण यूक्रेन को कई पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता भी मिली।
India world's Second war equipment importer : भारत, दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में लगातार शामिल हो चुका है। SIPRI के अनुसार भारत हाल के वर्षों में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन चुका है। भारत हथियार आयातक देशों में यूक्रेन से थोड़ा ही पीछे रहा और वैश्विक आयात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8% के आसपास रही।
भारत पिछले कुछ वर्षों से अपनी सामरिक क्षमता के विस्तार में लगा हुआ है। भारत के रक्षा बजट में 2024-2025 के मुकाबले 2026—2027 में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत की सामरिक ताकत देखकर पाकिस्तान भी हैरान रह गई। यही वजह है कि उसने भी अपना रक्षा आवंटन बढ़ाकर 9 बिलियन डॉलर कर दिया।
भारत रूस, फ्रांस, अमेरिका और इज़राइल से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने फ्रांस से इस मामले में दोस्ती बढ़ाई है। भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान और रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदा है। हालांकि भारत “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के तहत रक्षा उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रक्षा बजट में इस बार 15 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों (सेवानिवृत्त) ने पत्रिका से बातचीत में रक्षा तैयारियों को लेकर कहा, ' किसी देश की सैनिक क्षमता रात भर में नहीं बढ़ाई जा सकती। देश की क्षमता या सैन्य क्षमता को बढ़ाने में दशकों लगते हैं। सैन्य क्षमता की तैयारी का सबसे बेहतर समय शांति का समय ही होता है। अगर आप चाहते हैं कि युद्ध ना हो, इसका सबसे अच्छा तरीका है कि युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहो।'
अब कतर भी दुनिया के बड़े हथियार आयातकों में शामिल हो चुका है। कतर की आबादी 27.5 लाख लाख के बीच है, जिसमें से लगभग 3–4 लाख ही लोग देश के नागरिक हैं। वहां 85–90% आबादी दूसरे मुल्कों से प्रवासियों और मजदूरों की है। यहां भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश के प्रवासी मजदूरों की आबादी बहुत ज्यादा है। देश की आर्थिक शक्ति और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों के कारण उसने आधुनिक हथियारों की बड़ी खरीद की है। इस समय ईरान और इजराइल—अमेरिका युद्ध के चलते खाड़ी देशों में तनाव के हालात बन गए हैं। तेल और नेचुरल गैस के सप्लायर्स होने के चलते खाड़ी देशों में हमेशा से तनाव के हालात बने रहते हैं।
कतर ने मुख्य रूप से अमेरिका, इटली और ब्रिटेन से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और नौसैनिक जहाज खरीदे हैं। कतर की हथियार खरीद का मुख्य कारण खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीददारों में लंबे समय से शामिल रहा है। सऊदी के भी रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी होती रही है। दरअसल क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सऊदी अरब में हथियारों की मांग बहुत अधिक है।
सऊदी अरब मुख्य रूप से अमेरिका, फ्रांस और स्पेन से हथियार खरीदता है। यमन युद्ध, ईरान के साथ तनाव और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों के कारण सऊदी अरब ने वायु रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमान और मिसाइल प्रणालियों पर भारी खर्च किया है।
कुवैत भी मध्य-पूर्व का एक महत्वपूर्ण हथियार आयातक देश है। कुवैत मुख्य रूप से अमेरिका, इटली और फ्रांस से हथियार खरीदता है। 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद कुवैत ने अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी सैन्य निवेश किया।मध्य-पूर्व क्षेत्र कुल मिलाकर दुनिया में हथियार आयात का एक बड़ा केंद्र माना जाता है।
पाकिस्तान को भारत के ऑपरेशन सिंदूर के चलते जोरदार झटका लगा। सिर्फ 88 घंटे के ऑपरेशन ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी। हालांकि, उसके बाद पाकिस्तान ने दो बार रक्षा बजट में अच्छी खासी बढ़ोरती की है। अब पाकिस्तान भी दुनिया के प्रमुख हथियार आयातक देशों में शामिल हो चुका है। पाकिस्तान मुख्यतः चीन से सैन्य उपकरण खरीदता है। पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर कई संयुक्त रक्षा परियोजनाएं भी शुरू की हैं, जैसे लड़ाकू विमान JF-17।
हाल के वर्षों में जापान और ऑस्ट्रेलिया तेजी से अपने रक्षा खर्च को बढ़ा रहा है। चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के कारण जापान अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। जापान मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोपीय देशों से हथियार खरीदता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया भी दुनिया के प्रमुख हथियार आयातक देशों में से एक है। जापान हथियार आयातक देशों में छठे तो ऑस्ट्रेलिया सातवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से पनडुब्बियां, उन्नत लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणालियां और नौसैनिक तकनीक खरीदी हैं।
world’s largest supplier of arms : SIPRI के हालिया आंकड़ों के अनुसार अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और जर्मनी दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातक देशों में शामिल हैं। ये देश आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, टैंक, पनडुब्बियां और रक्षा तकनीक का निर्यात करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। वैश्विक हथियार निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। अमेरिका अपने सहयोगी देशों को हथियार बेचकर रणनीतिक गठबंधन भी मजबूत करता है। मध्य-पूर्व, यूरोप और एशिया के कई देश अमेरिका से हथियार खरीदते हैं। हालांकि इसके बावजूद अमेरिका भी कुछ विशेष तकनीक और सैन्य उपकरण अन्य देशों से आयात करता है। अमेरिका के रक्षा सहयोग कार्यक्रमों के कारण कई देशों के साथ तकनीकी साझेदारी होती है, जिससे हथियारों का सीमित आयात भी होता है।
रूस लंबे समय से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक रहा है। सोवियत संघ के समय से ही रूस का रक्षा उद्योग काफी मजबूत रहा है। रूस और यूक्रेन में पिछले चार साल से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है, जिसके चलते रूस ने अपना हथियारों के उत्पादन को और गति प्रदान की है। रूस के प्रमुख ग्राहक देशों में भारत, चीन, अल्जीरिया और वियतनाम शामिल रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रूस के हथियार निर्यात में कुछ गिरावट देखी गई है।
फ्रांस हाल के वर्षों में तेजी से हथियार निर्यात बढ़ाने वाला देश बनकर उभरा है। SIPRI के अनुसार फ्रांस अब दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों में तीसरे स्थान पर है। फ्रांस से भारत, मिस्र, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को हथियार निर्यात किए जाते हैं। फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी दसॉ एविएशन (Dassault Aviation) है, जो राफेल जैसे लड़ाकू विमान बनाती हैं।
चीन भी दुनिया के बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल है। चीन का रक्षा उद्योग पिछले दो दशकों में तेजी से विकसित हुआ है। चीन के हथियार दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले सस्ते होते हैं। यही वजह है कि कई विकासशील देश चीन से हथियार खरीदते हैं। चीन के प्रमुख हथियार निर्यात में लड़ाकू विमान, ड्रोन, टैंक, मिसाइल प्रणाली शामिल हैं। चीन से हथियार खरीदने वाले देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफ्रीकी देश हैं।
जर्मनी दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों में से एक है। जर्मनी खास तौर पर उच्च गुणवत्ता वाले सैन्य उपकरणों के लिए जाना जाता है। जर्मनी के प्रमुख निर्यात में पनडुब्बियां, टैंक, सैन्य वाहन और नौसैनिक उपकरण शामिल हैं। जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनियों में राइनमेटल (Rheinmetall) और थाइसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (ThyssenKrupp Marine Systems) शामिल हैं।