Patrika Special News

तीजन बाई समेत छत्तीसगढ़ की विभूतियों की कहानी पढ़ेंगे बच्चे, ठेठरी-खुरमी भी बनेगी सिलेबस का हिस्सा

culture in schools: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब बच्चे तीजन बाई समेत प्रदेश की विभूतियों, लोककला, संस्कृति और परंपराओं की कहानी पढ़ेंगे। ठेठरी-खुरमी जैसे पारंपरिक व्यंजन भी सिलेबस का हिस्सा बनेंगे।
2 min read
Aug 26, 2026
CG culture in schools:
तीजन बाई समेत छत्तीसगढ़ की विभूतियों की कहानी पढ़ेंगे बच्चे (Photo Patrika)

CG culture in schools: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के बच्चे अब अपनी माटी के नायकों, कला, संस्कृति और लोकजीवन को भी पाठ्य सामग्री के जरिए जानेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आर्ट रिपोजिटरी तैयार कर रहा है। इसमें महापुरुषों और संतों से लेकर लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्य, शिल्प, पर्व, परंपराएं, धार्मिक स्थल और पारंपरिक व्यंजनों तक को शामिल किया जा रहा है। प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता और जनसंचार विशेषज्ञ करीब 100 विषयों पर सामग्री तैयार कर रहे हैं। विषयों को अलग-अलग विधाओं में बांटकर समूह बनाए गए हैं। पाठ्य सामग्री के साथ प्रत्येक विषय पर 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों की पटकथा भी तैयार की जा रही है।

तीजन बाई से विनोद कुमार शुक्ल तक

रिपोजिटरी में गुरु घासीदास, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, मिनीमाता, पं. सुंदरलाल शर्मा, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, सुरुज बाई खांडे समेत छत्तीसगढ़ की अनेक विभूतियों के योगदान को
जगह मिलेगी।

सिरपुर से घोटुल और बस्तर दशहरा तक

कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी और बम्लेश्वरी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी। सतनाम, कबीर और रामनामी पंथ के साथ घोटुल, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी परंपराएं भी सामग्री का हिस्सा होंगी। हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा, छेरछेरा, तीजा-पोला और मड़ई जैसे पर्वों के साथ पंथी, राउत नाचा, पंडवानी, सुवा और नाचा जैसी लोकविधाओं को भी शामिल किया जाएगा।

ठेठरी-खुरमी से चापड़ा चटनी तक

छत्तीसगढ़ी खान-पान भी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बनेगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी और माडिय़ा पेज जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर सामग्री तैयार की जा रही है। उद्देश्य बच्चों को अपनी भाषा, परम्परा, कला और सांस्कृतिक पहचान से जोडऩा है। तैयार सामग्री का उपयोग शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक और पालक भी कर सकेंगे।

कक्षा से बाहर भी काम आएगी सामग्री

एससीईआरटी की यह पहल सिर्फ विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। तैयार सामग्री का उपयोग शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक और पालक भी कर सकेंगे। शिक्षकों के लिए यह स्थानीय उदाहरणों के जरिए विषय समझाने का माध्यम बन सकती है। वहीं विद्यार्थियों को अपनी भाषा, लोककला और परंपराओं के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

क्यों खास है आर्ट रिपोजिटरी?

कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सामग्री
करीब 100 विषयों पर सामग्री तैयार
महापुरुषों, साहित्यकारों और कलाकारों की जीवनगाथाएं
लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक वाद्यों की जानकारी
पर्व, परंपरा, पंथ और सामाजिक रीति-रिवाजों का समावेश
धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का परिचय
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों पर सामग्री
हर विषय पर 5 से 10 मिनट की लघु फिल्म की पटकथा तैयार करने की योजना

Updated on:
26 Aug 2026 01:50 pm
Published on:
26 Aug 2026 01:49 pm