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Medical School: 72 साल की उम्र में दादी बनीं डॉक्टर, साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है!

Inspiring: 72 साल की डॉन ने मेडिकल स्कूल से ग्रेजुएशन कर साबित कर दिया कि सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती। पति की बीमारी के बाद उन्होंने रिटायरमेंट फंड से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और अब डॉक्टर बन गई हैं।

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May 10, 2026
खुशी से चहकती डॉन ज़ुइडगेस्ट। ( फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Microscope :जिंदगी में आगे बढ़ने और कुछ कर गुजरने के लिए जोश के साथ जुनून की हद तक मेहनत की जाए तो कामयाबी कदम चूमती है। यह एक बुजुर्ग महिला के संघर्ष का किस्सा है। बचपन में जब 7 साल की डॉन जुइडगेस्ट-क्राफ्ट को बीमारी के दौरान एक माइक्रोस्कोप गिफ्ट में मिला, तो उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। उन्हें पत्तियों और कीड़ों को करीब से देखना इतना पसंद आया कि उनकी मां ने तभी कह दिया था कि उनकी बेटी एक दिन डॉक्टर बनेगी। डॉन ने स्वास्थ्य सेवा में अपना करियर शुरू किया और एक नर्स प्रैक्टिशनर बनीं। उनका असली सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन बच्चों की परवरिश और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण यह सपना पीछे छूटता चला गया।

पति की बीमारी ने बदल दिया नजरिया

डॉन जब 60 पार कर चुकी थीं, तब 2020 में उनके पति कार्ल क्राफ्ट को ब्रेन हैमरेज (मस्तिष्क रक्तस्राव) हुआ। कार्ल बाल-बाल बच गए। इस घटना ने डॉन को अंदर तक झकझोर दिया और उन्हें अहसास हुआ कि जिंदगी बहुत छोटी है। डॉन ने फैसला किया कि अब वे अपनी रुकी हुई ख्वाहिशें पूरी करेंगी। जब उन्होंने अपने पति को बताया कि वे अब मेडिकल स्कूल जाना चाहती हैं, तो शुरुआत में उनके पति को लगा कि वे मजाक कर रही हैं।

डॉन ज्यूइडगेस्ट-क्राफ्ट अपनी बेटी एड्रियाना क्राफ्ट के साथ। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

रिटायरमेंट फंड से की पढ़ाई

हार न मानने वाले अपने ही उसूल (नेवर गिव अप) पर चलते हुए, डॉन ने अपनी रिटायरमेंट की जमा-पूंजी का इस्तेमाल कैरेबियन के एक मेडिकल स्कूल में दाखिला लेने के लिए किया। वहां उनके साथ पढ़ने वाले बच्चे उनके पोते-पोतियों की उम्र के थे। शुरुआती दिनों में उन्हें मुश्किलें भी आईं। मेडिकल की पढ़ाई के लिए परिवार से दूर रहने पर उन्हें अपराधबोध महसूस होता था। पहले साल वे बायो कैमिस्ट्री में फेल भी हो गईं और एक बार को पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन जल्द ही उन्होंने अपने से आधी से भी कम उम्र के सहपाठियों के साथ एक मजबूत रिश्ता बना लिया। वे सुबह उनके साथ योग करतीं, उन्हें एनाटॉमी पढ़ातीं और वीकेंड्स पर उनके लिए मूवी नाइट्स आयोजित करती थीं।

रेजिडेंसी और भविष्य के लक्ष्य

मई के अंत में, 72 साल की उम्र में डॉन को डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री मिलेगी और वे अपने कॉलेज की सबसे उम्रदराज ग्रेजुएट बन जाएंगी। यह डिग्री उनके लिए सिर्फ एक शोपीस नहीं है। जुलाई से वे मिशिगन के एक अस्पताल में पारिवारिक चिकित्सा में अपनी तीन साल की रेजिडेंसी शुरू करने जा रही हैं। डॉन का कहना है, "मैं यह काम इसलिए नहीं कर रही कि मुझे घर का किराया देना है, बल्कि इसलिए कर रही हूं क्योंकि मुझे मरीजों का इलाज करने में सचमुच खुशी मिलती है।" 73वें जन्मदिन के करीब खड़ी डॉन अब मेडिकल कोर्स को और आधुनिक बनाने के अपने अगले लक्ष्य पर विचार कर रही हैं।

डॉन जल्द ही अपनी तीन साल की रेजिडेंसी की शुरुआत करेंगी

यह कहानी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है। लोग डॉन के "नेवर गिव अप" एटीट्यूड की तारीफ कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अगर इंसान के अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य उम्र का मोहताज नहीं होता। डॉन जल्द ही अपनी तीन साल की रेजिडेंसी की शुरुआत करेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे क्लिनिकल प्रैक्टिस में अपना अनुभव कैसे लागू करती हैं और भविष्य में मेडिकल शिक्षा के पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने के अपने मिशन में कितनी सफलता हासिल करती हैं।

दोनों ने इसे एक 'वेक-अप कॉल' की तरह लिया

बहरहाल, इस कहानी का एक खूबसूरत पहलू पति-पत्नी का आपसी सपोर्ट है। पति के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद जिंदगी से निराश होने के बजाय, दोनों ने इसे एक 'वेक-अप कॉल' की तरह लिया। पति ने जहां ट्रेवलिंग को चुना, वहीं पत्नी ने अपना बरसों पुराना डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। (वॉशिंगटन पोस्ट का यह आलेख patrika.com पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)

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