UPSC Fake Candidates Trend: देश की सबसे बड़ी नौकरी करने का सपना लिए हर साल लाखों कैंडिडेट्स UPSC की परीक्षा देते हैं, दिन रात एक करते हैं, कड़े संघर्ष से गुजरते हैं और उस एक पल से घबरा जाते हैं, जब उनके नाम और रैंक का इस्तेमाल होता है... कहीं धोखे की चाल पर, कहीं समाज में प्रतिष्ठा पाने के लिए पनपी मजबूरी और कहीं उम्मीदों का प्रेशर अब ट्रेंड में ला रहा है UPSC Fake Candidates का सिलसिला...
UPSC Fake Candidates Trend: एक तस्वीर... एक पोस्ट.... और एक दावा... मैं सिलेक्ट हो गया, मैं IAS बन गया.... आज सोशल मीडिया के दौर में IAS अफसर बनने के लिए बस यही काफी है...! जैसे ही UPSC 2026 के नतीजे आए देशभर के अलग-अलग शहरों और राज्यों से सामने आए इस तरह से दावा करने वाले 7 चेहरे... जिन्होंने बिना UPSC परीक्षा पास किए... बस अपने नाम से मिलता-जुलता नाम देखकर ही खुद को IAS घोषित कर दिया।
-बधाइयों का तांता लग गया...
-मालाएं पहनाई गईं..
-कहीं शहर लौटने पर स्थानीय निवासियों ने ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया
-कहीं जनप्रतिनिधियों ने सम्मानित कर दिया।
-कहीं IPS अफसर भी शुभकामनाएं देने पहुंच गए।
हालांकि ऐसा नहीं है कि ये कहानियां नई हैं... UPSC फेक कैंडिडेट्स की लिस्ट पहले भी सुनाई देती रही हैं, लेकिन ये कहानियां इक्का-दुक्का थीं। और 2026 में सामने आई तस्वीर देखकर कहना होगा कि अब UPSC FAKE Candidates ट्रेंड सा बन रहा है। एक साथ 7 फेक कैंडिडेट्स के सामने आने के बाद सवाल उठना लाजमी है... आखिर क्यों?
ऐसे मामलों में ये भी है कि किसी ने नाम सुना और आकर बताया कि आपका UPSC में सिलेक्शन हो गया। सालों से तैयारी कर रहे बच्चे ये बात सुनते ही भावुक हो जाते हैं। ऐसे में हो सकता है कि वे बिना सोचे-समझें, बिना जांचे-परखे अपने घर-परिवार को बता देते हैं कि उनका सिलेक्शन हो गया। इधर जहां बच्चा तैयारी कर रहा था वहां भी साथी संगी जश्न मना रहे हैं, तो परिवार भी खुशियों में डूब जाता है, रिश्ते-नातेदारों और आस-पड़ोस तक के पास मिठाई पहुंचाकर, फोन करके खुशियां बांटने लगता है।
अब भले ही कैंडिडेट ने अपना नाम लिस्ट में चेक किया और उस रैंक पर उसी के नाम का व्यक्ति सिलेक्ट हुआ है, लेकिन वो खुद बिहार का है और सिलेक्टेड कैंडिडेट किसी और राज्य या शहर का, तब वो किसी के सामने स्वीकार करने में ही डरने लगता है कि अब क्या होगा?
उसे लगता है कि अब सभी खुश हैं कैसे सच बताऊं, अब क्या करूं... असमंजस की यह स्थिति उसे प्रेशर जैसी लगने लगती है...और नतीजा सामने आता है कि वह झूठ पर झूठ बोलने को मजबूर हो जाता है। उसे सम्मान मिल जाता है... इज्जत मिल रही होती है... जो उस पर मानसिक दबाव बढ़ा देती है।
अभिषेक कहते हैं कि UPSC की तैयारी ऐसी नहीं है कि कुछ महीनों या एक साल में पूरी हो जाए.. इसमें 2 से 3 साल का समय लगता है। इस दौरान घर परिवार की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। आर्थिक दबाव बना रहता है। कई बार आय का स्रोत भी नहीं होता। ऐसे में बच्चा फ्रस्ट्रेशन में आ जाता है। घर से दूर ये बच्चे सोचते हैं फाइनेंशियली सपोर्ट घर से मिलना बंद हो जाएगा। कहीं से आय के स्रोत भी नहीं हैं।
पेरेंट्स की उम्मीदों पर खरा उतरने जैसी ख्वाहिशें उसे मजबूर कर रही होती हैं। यही परिस्थितियां उसे झूठ बोलने को मजबूर कर देती हैं। और वह कह देता है मेरा UPSC में सलेक्शन हो गया है। यही नहीं वह उस सिलेक्ट हुए कैंडिडेट की रैंक तक चुरा लेता है, ताकि पेरेंट्स उसके दावे को झूठ न समझें।
सोशल मीडिया का जमाना है...तो हां बिल्कुल कुछ बच्चे ऐसे भी हो सकते हैं, जो इंस्टाग्राम, यूट्यूब के दौर में IAS का टैग लगाकर तुरंत अपनी पहचान बना सकते हैं। ताकि उनके फॉलोअर्स बढ़ें, झूठ की आड़ में वे कोचिंग शुरू कर सकें। वहीं कुछ वो भी जो सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए एक प्लानिंग कर बड़ा खेल शुरू कर देते हैं।
अगर फेक कैंडिडेट्स सामने आते हैं... तो बिल्कुल ऐसा है कि उन एक्शन लिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा करता है, उसने कोई गंभीर काम कर दिया है, तो UPSC बाकायदा एक्शन लेता है। केस दर्ज किया जाता है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। यहां तक कि उन्हें ब्लैक लिस्टेड भी किया जाता है, ताकि वो उदाहरण लोगों के सामने हो और भविष्य में लोग ऐसी गलती न दोहराएं।
हां अगर अनजाने में गलती हुई है, तो ऐसे मामलों को इग्नोर भी किया जाता है।
ये फेक मामले जल्दी ही पता चल जाते हैं। दरअसल UPSC की व्यवस्था के तहत इसके हर काम का जिम्मा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) संभालता है। यह भारत सरकार का एक प्रमुख विभाग है। जो केंद्र के कर्मचारियों और सिविल सेवाओं से जुड़े मामलों को देखता है। यह विभाग Ministry of personnel, public grievances and Pensions के अंतर्गत आता है।
1- इसके कार्यों में IAS, IPS जैसी सेवाओं के नियम और नीतियां तय करना होता है।
2- यूपीएससी के साथ मिलकर भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करता है।
3- सिलेक्टेड अधिकारियों की ट्रेनिंग, किस राज्य या कैडर में पोस्टिंग होगी आदि तय करता है।
4- वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का जिम्मा संभालता है।
5- यह RTI से जुड़े मामलों का नोडल विभाग है
यानी साफ है कि DoPT सिविल सेवाओं की नियुक्ति, ट्रेनिंग और कैडर से जुड़े मामले संभालता है, तो असली सिलेक्टेड उम्मादिवारों का रिकॉर्ड भी इसी विभाग और यूपीएससी के पास होता है। यानी वेरिफिकेशन के लिए यह एक बेहद अहम स्रोत है। UPSC में सामने आए Fake Candidates और IAS के दावों पर मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिपाठी बताते हैं कि यह कोई मानसिक रोग या विकार नहीं है, बल्कि इसे बदलते सामाजिक व्यवहार का संकेत कहा जाता है। उनके मुताबिक डिजिटल दौर में वेलिडेशन यानी दूसरों की मान्यता और स्वीकार्यता की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लाइक्स, फॉलोअर्स और पहचान को ही सफलता का पैमाना माना जाता है।
ऐसे में जब किसी व्यक्ति को अपेक्षित पहचान नहीं मिलती या सफलता नहीं मिलती, तो उसमें डर पैदा हो जाता है कि वह कहीं दूसरों से पीछे न छूट जाए। यही भावना उसके कुंठित कर देती है और झूठ बोलने को मजबूर।
वे कहते हैं कि बार-बार असफलता, सामाजिक तुलना, परिवार की उम्मीदों के बीच वह इमेज बचाने की कोशिश करता है। इसी दौरान जैसे ही मौका मिलता है वह वास्तविक उपलब्धि के बजाय फर्जी पहचान को अपना लेता है। ताकि उसे सामाजिक स्वीकृति यानी वेलिडेशन मिल जाए।
डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि यह प्रवृत्ति संकेत है कि समाज में स्टेटस को ज्यादा महत्व दिया जाता है।