
Petrol Diesel crisis ya panic know the truth (patrika Creative)
Petrol Diesel Shortage Truth: मध्यप्रदेश के कई जिलों से खबर आई है कि पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म हो चुका है। यहां पेट्रोल पंप संचालकों ने अपने पंपों पर स्टॉक खत्म के पोस्टर लगाए हैं और लंबी-लंबी कतारें लोगों को परेशान कर रही हैं। दमोह, नरसिंहगढ़ और अन्य छोटे शहरों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं। जबकि भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी अचानक पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने की खबरें सुर्खियों में हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई पेट्रोल-डीजल की कमी हो गई है या फिर ऐसी तस्वीरों के पीछे कोई और कारण है?
दरअसल यह स्थिति किसी वास्तविक फ्यूल क्राइसिस (Petrol Crisis or Panic) से ज्यादा नए, नियम कैश फ्लो दबाव और अफवाहों का मिला-जुला परिणाम है। patrika.com से जानें आखिर माजरा क्या है…?
मध्य प्रदेश के दमोह शहर के टंडन पेट्रोल पंप, कन्हैया पेट्रोल पंप, जेल पेट्रोल पंप, पुलिस पेट्रोल पंप, नरसिंहगढ़ में तीन पेट्रोल पंप, रामा राम पेट्रोल पंप, नायरा पेट्रोल पंप, मां वैष्णव पेट्रोल पंप मुक्ति धाम चौराहे पर, साहू तिगडा के आगे पेट्रोल पंप, सिंगपुर पेट्रोल पंप सहित जिले के 20 से अधिक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो चुका है। यही नहीं बालाघाट और लालबर्रा आदि जगहों तो पूरी तरह संकट गहराने की सूचनाएं हैं।
दरअसल 17 मार्च 2026 से देश की प्रमुख तीन सरकारी तेल कंपनियों IOCL, BPCL, HPCL ने पेट्रोल पंपों के लिए क्रेडिट (उधार), नीति स्थगित कर दी। इसके बजाय अब पहले पैसा, फिर तेल यानी पेट्रोल-डीजल के लिए अब एडवांस पैसा देना होगा नियम अनिवार्य कर दिया है।
तेल कंपनियों ने अभी पेट्रोल पंप के लिए शॉर्ट टर्म क्रेडिट पॉलिसी लागू कर रखी थी, जहां मालिकों को तेल पहले मिलता था और पैसा बाद में भुगतान करना होता था।
इंडियन ऑयल अगर अपने डीलर्स को 5 दिन का क्रेडिट देता था कि आप हमारे यहां से आज टैंकर अपने पंप में खाली कर लीजिए और पेमेंट आप 5 दिन बाद कर दीजिएगा। लेकिन अब पेट्रोल पंप के मालिको को 17 मार्च को साफ तौर पर कह दिया गया कि 21 मार्च से पूरा एडवांस भुगतान किए बिना तेल की सप्लाई नहीं की जाएगी।
प्रदेश के कुछ ऐसे पेट्रोल पंपों की जानकारी मिल रही है कि वे ड्राई हो गए या कि पेट्रोल-डीजल की सीमा बांध दी। इस मामले में पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन ने कहा कि सरकारी कंपनियों के पंपों पर ईंधन सप्लाई में देरी हो सकती है, लेकिन ड्राई होने जैसी कोई बात नहीं है। यह सिर्फ एमपी की बात नहीं है, ऐसी खबरें अब तक राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से भी आ चुकी हैं।
भोपाल के पेट्रोल पंप संचालक नकुल शर्मा कहते हैं कि जितनी डिमांड डिपो से की जा रही है, उतना माल मिल रहा है। हां, कंपनियों ने भुगतान को लेकर जरूर निर्देशित किया है।''कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति लगातार बनी हुई है। कई बार कंपनियों को लागत ज्यादा पड़ती है, लेकिन खुदरा कीमतें उतनी तेजी से नहीं बढ़ पातीं।
पश्चिमी एशिया जैसे क्षेत्रों में तनाव का इसर सीधे सप्लाई पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए वैश्विक हलचलों का असर यहां देखने को मिल रहा है। ऐसे में कंपनियां किसी भी जोखिम को कम करना चाहती हैं और क्रेडिट बंद करना उसी दिशा में उनका अहम कदम है।
कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा भुगतान देरी से किए जाने या फिर डिफॉल्टर होने की शिकायतें भी सामने आईं हैं। कंपनियां अब पहले पैसा, फिर माल की नीति से खुद को सुरक्षित करना चाहती हैं।
पहले कंपनियां ज्यादा से ज्यादा बिक्री करना चाहती थीं। लेकिन अब परिस्थितियां इसके ठीक विपरीत हैं। जितनी ज्यादा बिक्री उतना ज्यादा कैश फ्लो मैनेजमेंट का दबाव बढ़ेगा।
अगर वाकई पेट्रोल-डीजल का स्टॉक खत्म हो गया है या खत्म होने की कगार पर है, तो इसका सबसे ज्यादा असर छोटे पंप संचालकों पर दिखेगा। दरअसल बडे़ पंप मालिकों के पास कैश रिजर्व होता है, लेकिन छोटे संचालकों के लिए यह बदलाव बड़ा झटका साबित होगा।
उन्हें हर दिन भारी रकम की व्यवस्था करनी पड़ेगी। कई जगहों पर पंप संचालकों का कहना है कि वे सीमित पूंजी में काम चला रहे थे। अब ऐसी स्थिति रही तो उन्हें निजी उधार पर या लोन पर निर्भर होना पडे़गा।
ट्रक ड्राइवर और छोटे ट्रांसपोर्टर अक्सर उधार लेकर ही डीजल लेते थे। अब उन्हें तत्काल भुगतान करना पड़ रहा है। जिससे उनका काम अब महंगा पड़ रहा है। इसका असर माल की ढुलाई की लागत पर नजर आ सकता है।
''भोपाल की बैरसिया तहसील के किसान शत्रुध्न दांगी कहते हैं कि हमारे यहां फिलहाल ऐसी कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर ऐसी किल्लत हुई तो किसान सबसे ज्यादा परेशान होगा। खेती के सीजन में डीजल की मांग बढ़ती है। ट्रैक्टर से ही फसल की हार्वेस्टिंग की जाती है। अगर समय पर हार्वेस्टिंग नहीं की गई तो सारी फसल खराब हो सकती है। वहीं खेत की जुताई से लेकर दो तीन काम ऐसे हैं जिनका काम ट्रैक्टर से ही किया जाता है। ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कत आएगी। क्योंकि अब ऐसे विकल्प कम हुए तो खेती किसानी की लागत बढ़ सकती है।''अफवाहों को छोड़ दें उन पर ध्यान नहीं दें… तो डीजल-पेट्रोल की कहीं भी किल्लत जैसी कोई बात ही नहीं है। पंपों पर जरूरत के हिसाब से पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो रहा है। बीते दो-तीन दिन से पंपों पर बढ़ती लाइनों को लेकर स्वयं पंप संचालकों ने कहा है कि घबराहट की कोई बात नहीं है। ना तो कोई रेट बढ़े हैं और न ही माल की कोई कमी है।
दरअसल एलपीजी को लेकर चल रही परेशानी को देखते हुए कहा जाने लगा है कि पेट्रोल-डीजल की कमी हो गई है और सरकार ईंधन लॉकडाउन कर सकती है जबकि सच्चाई यह है कि बुधवार को भी पंपों पर सभी वाहन चालकों को डीजल-पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति हुई।
डीजल-पेट्रोल की सप्लाई पर्याप्त हो रही है। रेट में भी कोई अंतर नहीं आया है। सिर्फ अफवाह फैलाने वालों को पुलिस रोक दें तो लोगों में घबराहट नहीं फैलेगी।-अजय सिंह, अध्यक्ष, मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन''''जरूरत के मुताबिक पेट्रोल-डीजल उपलब्ध है। और बात रही कंपनियों के नियम की तो यह कोई समस्या नहीं है। पेट्रोल पंप मालिक बाद में पैसा देते थे, अब पहले देंगे, अगर कोई पेट्रोल संचालक ऐसा कह रहा है, तो वह गलत कह रहा है। और जो ऐसा कह रहे हैं, समझ लें कि वो आपदा में अवसर ढूंढ रहे हैं। कंपनियों का ये नियम किसी भी तरह से कोई समस्या नहीं बढ़ा रहा है। सभी पेट्रोल पंप्स पर जरूरत के हिसाब से सप्लाई की जा रही है।''-आर के गुप्ता, अध्यक्ष, आल इंडिया एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन (प्रदेश इकाई)Updated on:
26 Mar 2026 06:54 pm
Published on:
26 Mar 2026 06:39 pm
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