International Women''s Day: अमेरिकी में वर्ष 2001 में 9/11 आतंकी हमलों के बाद वहां के अलग-अलग राष्ट्रपतियों ने मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता और उनकी तरक्की को लेकर लगातार बयान दिए। हालांकि उनके शासन काल में अमेरिका ने कई मुस्लिम देशों पर बम बरसाए जिसमें भारी संख्या में नागरिकों की मौत हुई। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।
International Women's day 2026: आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। दुनिया में पहली बार 28 फरवरी 1909 को अमेरिका में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। अमेरिका के अलग-अलग राष्ट्रपतियों ने मुस्लिम देशों में महिलाओं की हालात सुधारने के नाम पर बहुत तबाही मचाई, जिसमें बड़े संख्या में नागरिक हताहत हुए। इनमें महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं। ईरान पर अमेरिकी और इजराइल हमलों के दौरान 1300 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। ईरान पर एक हमले में स्कूल में पढ़ने वाली 165 बच्चियां मारी गईं। आइए विस्तार से जानते हैं।
आइए सबसे पहले यह जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन कब शुरू हुआ। वर्ष 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगेन में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन में जर्मन समाजवादी नेता क्लारा जेटकिन (Clara Zetkin) ने प्रस्ताव रखा कि महिलाओं के अधिकारों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को 17 देशों की 100 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया। अगले साल 8 मार्च 1911 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जर्मनी, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड में मनाया गया।
अमेरिका के किस राष्ट्रपति ने कब इस्लामिक देशों की महिलाओं के हालात को लेकर क्या बयान दिए।
जॉर्ज डब्ल्यू. बुश (George W. Bush) का कार्यकाल 2001–2009 तक रहा। उन्होंने 17 नवंबर 2001 को रेडियो संबोधन में अफगानिस्तान की महिलाओं की स्थिति पर बात की। यह बयान अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध (War in Afghanistan) के दौरान आया था। उन्होंने कहा कि तालिबान शासन में अफगान महिलाओं को शिक्षा, काम और स्वतंत्रता से वंचित रखा गया और अमेरिका अफगान महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करेगा।
अफगानिस्तान में 2001 से 2021 तक चले युद्ध में अमेरिकी और नाटो सेनाओं ने हजारों हवाई हमले किए। अफगानिस्तान युद्ध के पूरे दौर में संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों ने हजारों बच्चों और महिलाओं के मारे जाने की पुष्टि की है। हालांकि इसका सटीक आंकड़ा मुहैया नहीं हो पाता क्योंकि कई घटनाएं दर्ज नहीं हो पाती हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार 2016 से 2020 के बीच केवल हवाई हमलों में 2,122 नागरिक मारे गए, जिनमें 785 बच्चे थे। यानी हवाई हमलों में मारे गए नागरिकों का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा बच्चों का था।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) का कार्यकाल 2009–2017 रहा। उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद 4 जून 2009 को काहिरा यूनिवर्सिटी (Cairo University) में 'A New Beginning' विषय पर दिए गए भाषण में मुस्लिम देशों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति तब तक संभव नहीं है जब तक महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और समान अवसर न मिलें। ओबामा के शासन काल में भी अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध जारी रखा।
बराक ओबामा को हराकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के राष्ट्रपति बने। उनका पहला कार्यकाल 2017–2021 तक रहा। मई 2017 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस्लामिक देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चरमपंथी विचारधाराएं महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को दबाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक समाज में महिलाओं की भागीदारी जरूरी है। अफगानिस्तान के खिलाफ ट्रंप के शासन में भी युद्ध जारी रहा।
डोनाल्ड ट्रंप को हराकर जो बाइडन (Joe Biden) 2021 में राष्ट्रपति बने। उन्होंने 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद में अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर चिंता जताते हुए कहा कि अफगान महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों की रक्षा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।
अमेरिका ने पिछले 80 वर्षों में दर्जनों देशों पर बमबारी करके लाखों लोगों को मौत के घाट उतारा। जाहिर सी बात है कि इनमें मरने वालों महिलाएं भी लाखों की संख्या में होंगी। पिछले कुछ दशकों में खासकर अमेरिका में 2001 में 9/11 आतंकी हमलों के बाद मुस्लिम देशों को लेकर रवैया कुछ ज्यादा ही सख्ती भरा रहा है। अमेरिका ने कई देशों में सैन्य अभियान चलाए, जिनमें प्रमुख रूप से अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, यमन और पाकिस्तान शामिल हैं। ब्राउन यूनिवर्सिटी के “Costs of War” प्रोजेक्ट के अनुसार 2001 से 2023 के बीच इन युद्ध क्षेत्रों में लगभग 9.4 लाख लोग प्रत्यक्ष युद्ध हिंसा में मारे गए, जिनमें 4.32 लाख से अधिक नागरिक थे। इन नागरिकों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की थी। युद्ध के दौरान कई बार बमबारी और हवाई हमलों में घरों, बाजारों और स्कूलों जैसे स्थान भी प्रभावित हुए, जिससे आम नागरिकों की मौत हुई।
वर्ष 2003 में शुरू हुए इराक युद्ध में भी नागरिक हताहतों की संख्या बहुत अधिक रही। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के अनुमान बताते हैं कि इन संघर्षों में कई हजार बच्चे और महिलाएं मारे गए। द इंडिपेंडेंट में छपे शोध संस्था (Iraq Body Count) के विश्लेषण के अनुसार अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों में मारे गए लोगों में लगभग 39 प्रतिशत बच्चे और 46 प्रतिशत महिलाएं थीं। विशेषकर 2003–2007 के दौरान और बाद में ISIS के खिलाफ अभियानों मेंयुद्ध के दौरान कई शहरों में भारी बमबारी हुई।
द गार्डियन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच इराक और सीरिया में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कम से कम 801 नागरिकों की मौत स्वीकार की, जबकि स्वतंत्र निगरानी समूहों का अनुमान इससे कई गुना अधिक लगभग 6,000 तक बताता है। इसी तरह यमन और पाकिस्तान में ड्रोन हमलों तथा हवाई हमलों के दौरान भी कई नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इन सभी युद्धों को मिलाकर हजारों महिलाएं और बच्चियां इन संघर्षों में प्रत्यक्ष रूप से मारी गईं, जबकि अप्रत्यक्ष मौतों (बीमारी, भूख, स्वास्थ्य सेवाओं के टूटने आदि) की संख्या इससे कहीं अधिक है।