Valentine Week 2026: AI चैटबॉट और डेटिंग ऐप्स से जुड़े रोमांस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, तो वही इससे जुड़े स्कैम के मामले भी बढ़े हैं। एक सर्वे में बताया गया कि 7 में से 1 भारतीय ने औसतन 2.8 लाख रुपये गंवाए।
Valetine Week AI Romance Risk : वैलेंटाइन का सप्ताह चल रहा है। रोज डे, प्रपोज डे, किस डे, चॉकलेट डे, हग डे के बीच युवाओं पर प्यार का बुखार चढ़ चुका है। इमोशन के इस खेल में एआई से लेकर डेटिंग ऐप्स भी शामिल हो चुके हैं। ऐसे में धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं।
ऑनलाइन डेटिंग संभावित रोमांटिक पार्टनर से मिलने का एक लोकप्रिय तरीका बन गया है, लेकिन इस क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मैकफी इंडिया के एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 61 प्रतिशत लोगों ने एआई चैटबॉट के प्रति रोमांटिक भावनाएं विकसित होना संभव है।
हाल ही में हुए इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज और YouGov के संयुक्त सर्वे में 18-30 साल के 2,000 युवाओं से पूछा गया कि क्या एआई पार्टनर मानवीय रोमांक को बदल सकते हैं? इसके जवाब में 28% पुरुष और 22% महिलाओं ने कहा कि एआई पार्टनर मानवीय रोमांस को बदल सकते हैं। युवाओं के इस अनुभव और विश्वास के चलते एआई कंपैनियन ऐप का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 40% उपयोगकर्ता अपने चैटबॉट के साथ रोमांटिक रिश्ते में हैं। वर्ष 2025 तक दुनिया भर में लगभग 335 राजस्व उत्पन्न करने वाले AI companion ऐप्स मौजूद हैं, जिनमें से 128 सिर्फ छह महीने में ही लॉञ्च हुए। वहीं लोकप्रिय एआई कंपैनियन ऐप ‘रेप्लिका’ के चार करोड़ से ज्यादा सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। AI companion market का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में इन ऐप्स ने लगभग $82 मिलियन (करीब 680 करोड़ रुपए) की कमाई की और साथ भी यह उम्मीद की गई कि पूरे साल में 120 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ लोगों को भले लगे कि एआई उनसे प्रेम कर सकता है, लेकिन चैटबॉट की प्रतिक्रियाएं दरअसल एल्गोरिद्म द्वारा तैयार किया गया पाठ होती हैं। यह मनुष्यों के संवाद की नकल करता है। अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सिस्टम अभी चेतन (Sentient) नहीं हैं। वे फिलहाल भावनाओं की नकल भर कर रहे हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में मशीनें इस अवस्था से आगे जा सकती हैं।
मैकफी इंडिया की एक शोध रिपोर्ट एआई-संचालित रोमांस घोटालों, फर्जी डेटिंग ऐप्स और डीपफेक धोखाधड़ी में खतरनाक वृद्धि को उजागर करती है। प्रेमियों के लिए सच्चे प्यार और डिजिटल धोखे के बीच अंतर करना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। शोध में शामिल लगभग 51 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें या उनके किसी परिचित को डेटिंग प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर किसी वास्तविक व्यक्ति के रूप में पेश आने वाले एआई चैटबॉट ने संपर्क किया था। इससे भावनात्मक रूप से कमजोर होने की आशंका बढ़ गई है। लगभग 38 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एआई चैटबॉट के साथ भावनात्मक संबंध बनाने से धोखाधड़ी का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है। Valentine’s Scam रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि ब्रिटेन में वैलेंटाइन वीक में स्कैम में हर साल इजाफा हो रहा है। वैलेंटाइन वीक में 2025 में स्कैम में 20% की वृद्धि हुई है।
एक अनुमानित वैश्विक आंकड़ा बताता है कि 100 मिलियन से भी ज़्यादा लोग AI कंपैनियन के साथ समय बिताते हैं। बाजार में Replika, Character.AI, Nomi, Anima जैसे शीर्ष एआई कंपैनियन ऐप शामिल हैं। इसमें रेप्लिका के अकेले ही चार करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। Character.AI के दो करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं। इन कंपैनियन ऐप पर यूजर्स से हर रोज 75 मिनट से लेकर दो घंटे तक समय बिताते हैं।
आज के डिजिटल डेटिंग युग में भारतीय संभावित रोमांटिक पार्टनर से जुड़ने के लिए डेटिंग ऐप्स या वेबसाइटों की तुलना में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अधिक पसंद करते हैं। इंस्टाग्राम (85 प्रतिशत) इस सूची में सबसे आगे है। उसके बाद व्हाट्सएप (55 प्रतिशत), टेलीग्राम (50 प्रतिशत) और स्नैपचैट (46 प्रतिशत) का स्थान आता है।
डेटिंग ऐप्स में टिंडर (61 प्रतिशत) सबसे लोकप्रिय है, उसके बाद फेसबुक डेटिंग (36 प्रतिशत), बम्बल (33 प्रतिशत) और मैच (23 प्रतिशत) का स्थान आता है। जैसे-जैसे अधिक लोग ऑनलाइन प्यार की तलाश कर रहे हैं, धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ रहा है, जिसमें जालसाज नकली प्रोफाइल और एआई-आधारित धोखे का उपयोग करके भोले-भाले उपयोगकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।