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Cellular Dehydration: मॉडर्न लाइफस्टाइल और डिहाइड्रेशन, डॉक्टर्स से जानें कैसे हमारी आदतें शरीर को कर रही हैं अंदर से सूखा, क्या हैं बचाव

Cellular Dehydration: क्या AC और चाय-कॉफी की आदत आपके शरीर को अंदर से सुखा रही है? जानें मॉडर्न लाइफस्टाइल से होने वाले डिहाइड्रेशन के कारण, लक्षण और डॉक्टर्स के बचाव के उपाय।
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Jul 07, 2026
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बिना पसीना डिहाइड्रेशन?(Photo: AI)

Cellular Dehydration Connection with Lifestyle :आज की व्यस्त जिंदगी के दौर में जहां, स्क्रीन से चिपकी आंखें और वातानुकूलित (AC) बंद कमरों ने हमारे जीने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इस आधुनिक जीवनशैली (Modern Lifestyle) ने हमें सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके साथ ही हमारे स्वास्थ्य को कई अनजाने खतरे भी दिए हैं। इन्हीं में से एक गंभीर और साइलेंट बीमारी है क्रोनिक डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की लगातार कमी)।

अक्सर हम डिहाइड्रेशन को सिर्फ गर्मियों की बीमारी या लू लगने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण लोग साल के बारह महीने डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोगों को इसका अहसास तब तक नहीं होता, जब तक कि शरीर गंभीर बीमारियों के लक्षण न दिखाने लगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि हमारी कौन सी आधुनिक आदतें शरीर को अंदर से सुखा रही हैं और इससे बचने के लिए हमें अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने चाहिए।

The Causes : आधुनिक जीवनशैली कैसे बन रही है डिहाइड्रेशन की वजह?

  • एयर कंडीशनर (AC) का अत्यधिक उपयोग : आजकल कॉर्पोरेट दफ्तरों से लेकर घरों और गाड़ियों तक में लोग लगातार AC में रहते हैं। AC हवा में मौजूद नमी (Humidity) को सोख लेता है। जब हम ऐसे सूखे वातावरण में घंटों बैठते हैं, तो हमारी त्वचा और सांस के माध्यम से शरीर का पानी भाप बनकर उड़ता रहता है। चूंकि AC में पसीना नहीं आता, इसलिए हमें प्यास का अहसास ही नहीं होता और हम पानी पीना भूल जाते हैं।
  • कैफीन और शुगरी ड्रिंक्स की लत: वर्क स्ट्रेस को मैनेज करने या ऊर्जा पाने के लिए दिनभर में कई बार चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स या कोला का सेवन आज का ट्रेंड बन चुका है। मेडिकल भाषा में कैफीन एक Diuretic (मूत्रवर्धक) तत्व है। इसका मतलब है कि यह किडनी को ज्यादा सक्रिय कर देता है, जिससे शरीर से यूरिन के रूप में पानी तेजी से बाहर निकलता है। आप जितना अधिक कैफीन पीते हैं, शरीर से पानी उतना ही कम होता जाता है।
  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड (High Sodium Diet): फास्ट फूड, चिप्स, रेडी-टू-ईट मील्स और पैकेट बंद सूप में स्वाद और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए सोडियम (नमक) की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब हम इन चीजों का सेवन करते हैं, तो हमारे खून में सोडियम का स्तर बढ़ जाता है। कोशिकाओं (Cells) को इस सोडियम को संतुलित करने के लिए अपने भीतर का पानी बाहर निकालना पड़ता है, जिससे कोशिकीय स्तर (Cellular Level) पर डिहाइड्रेशन शुरू हो जाता है।
  • स्क्रीन टाइम और डिजिटल व्याकुलता: स्मार्टफोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण लोग अपने शरीर के प्राकृतिक संकेतों को पढ़ना भूल गए हैं। जब आप किसी जरूरी प्रोजेक्ट या रील्स देखने में खोए होते हैं, तो दिमाग प्यास के हल्के संकेतों (जैसे होंठ सूखना या हल्का सिरदर्द) को दबा देता है। डॉक्टर्स इसे 'डिजिटल डिहाइड्रेशन' भी कहते हैं।

पत्रिका के सवाल-जवाब डॉ. शुभम अग्रवाल के साथ

आजकल हम देखते हैं कि गर्मियों के अलावा भी लोग सालभर डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। आपकी नजर में हमारी 'मॉडर्न लाइफस्टाइल' की कौन सी आदतें इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं?

देखा गया है की आज की व्यस्त जीवनशैली ने डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) को एक ऐसी समस्या बना दिया है, जो किसी एक मौसम की मोहताज नहीं रही। यह अब साल के बारह महीने हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली एक 'साइलेंट हेल्थ प्रॉब्लम' बन चुकी है। इसके पीछे हमारी रोजमर्रा की ये मुख्य आदतें और कारण जिम्मेदार हैं।

  • पानी पीने की आदत में कमी (प्रायोरिटी न होना) : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सुबह से शाम तक काम में इतने मसरूफ रहते हैं कि प्यास लगने पर भी पानी पीना टाल देते हैं। वहीं, एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो सिर्फ इसलिए जानबूझकर कम पानी पीता है ताकि उन्हें वर्किंग ऑवर्स के दौरान बार-बार वॉशरूम न जाना पड़े। यह आदत किडनी और ब्लैडर पर भारी पड़ती है।
  • लगातार AC (एयर कंडीशनर) के माहौल में रहना: ऑफिस से लेकर घर तक, घंटों वातानुकूलित वातावरण में रहने के कारण शरीर से पसीना नहीं निकलता। इससे व्यक्ति को यह भ्रम (Illusion) हो जाता है कि उसका शरीर हाइड्रेटेड है। जबकि सच यह है कि AC की सूखी हवा के कारण हमारी सांसों और त्वचा (Insensible Water Loss) के माध्यम से लगातार पानी का ह्रास होता रहता है।
  • अत्यधिक कैफीन और शुगरी ड्रिंक्स का सेवन : काम के तनाव या सुस्ती को दूर करने के लिए दिनभर में कई बार चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स या कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन अब एक स्टेटस सिंबल और आदत बन चुका है। लोग इन्हें पानी का विकल्प मान लेते हैं, जबकि कैफीन एक Diuretic (मूत्रवर्धक) है, जो शरीर से तरल पदार्थों को सोखकर यूरिन के जरिए बाहर निकाल देता है और डिहाइड्रेशन को बढ़ाता है।
  • प्रोसेस्ड और जंक फूड की अधिकता: आजकल की डाइट में पैकेट बंद चिप्स, बर्गर, रेडी-टू-ईट मील्स और प्रोसेस्ड फूड की मात्रा बढ़ गई है। इन खाद्य पदार्थों में सोडियम (नमक), चीनी और प्रिजर्वेटिव्स का स्तर बहुत अधिक होता है। इस अतिरिक्त सोडियम को पचाने और शरीर से बाहर निकालने के लिए कोशिकाओं (Cells) को दोगुने पानी की आवश्यकता होती है।
  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल व्याकुलता: स्मार्टफोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया रील्स के सामने घंटों बैठे रहने के कारण लोग पूरी तरह वर्चुअल दुनिया में खो जाते हैं। इस डिजिटल व्यस्तता के चलते दिमाग शरीर के प्राकृतिक संकेतों जैसे गला सूखना या प्यास लगना को प्रोसेस नहीं कर पाता और व्यक्ति पानी पीना भूल जाता है।
  • अनियमित दिनचर्या और मानसिक तनाव: कम नींद लेना, अत्यधिक मानसिक तनाव (Work Stress), लगातार बैक-टू-बैक मीटिंग्स और फिजिकल एक्टिविटी का न होना हमारे शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है। यह असंतुलन सीधे तौर पर शरीर की पानी सोखने (Water Retention) की क्षमता और उसकी मांग को प्रभावित करता है।बुजुर्गों और बच्चों में हाई रिस्क
  • बुजुर्ग में उम्र बढ़ने के साथ शरीर में प्यास महसूस करने की प्राकृतिक क्षमता (Thirst Mechanism) कमजोर हो जाती है।
  • बच्चे अक्सर खेल-कूद, पढ़ाई या वीडियो गेम्स में इतने मगन हो जाते हैं कि उन्हें पानी पीने का ध्यान ही नहीं रहता।

कॉर्पोरेट कल्चर में लोग 8 से 10 घंटे AC के माहौल में बिताते हैं। बिना पसीना आए शरीर के अंदर पानी की कमी कैसे हो जाती है? इसके पीछे का मेडिकल साइंस क्या है?

यह एक बहुत बड़ा और आम भ्रम है कि हमारे शरीर से पानी सिर्फ पसीना आने पर ही कम होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, इंसानी शरीर से पानी मुख्य रूप से चार रास्तों से बाहर निकलता है: पसीना, यूरिन (मूत्र), मल और हमारी सांसें। जब कोई व्यक्ति 8 से 10 घंटे एयर-कंडीशन्ड (AC) माहौल में बैठता है, तो पसीना न आने के बावजूद शरीर के भीतर पानी की कमी होती है।

  • AC में डिहाइड्रेशन का मेडिकल साइंस: Insensible Water Loss एयर-कंडीशनर कमरे को ठंडा करने के साथ-साथ हवा की पूरी नमी (Humidity) को सोख लेता है। जब हम इस बेहद शुष्क (Dry) वातावरण में लगातार सांस लेते हैं, तो दो मुख्य प्रक्रियाएं होती हैं जिन्हें व्यक्ति महसूस भी नहीं कर पाता
  • सांसों के जरिए पानी का नुकसान (Respiratory Loss): सूखी हवा में सांस लेते समय, हमारे फेफड़ों को उस हवा को नम करना पड़ता है। इसके कारण हर बार सांस छोड़ते समय फेफड़ों से भारी मात्रा में जलवाष्प (Water Vapor) बाहर निकलती है।
  • त्वचा से अदृश्य वाष्पीकरण: बिना पसीना दिखे भी, त्वचा की ऊपरी परतों से पानी लगातार हवा में उड़ता रहता है। मेडिकल भाषा में इसे Insensible Water Loss (अदृश्य जल हानि) कहा जाता है।
  • मेडिकल फैक्ट: एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति बिना कोई शारीरिक श्रम किए, सिर्फ AC में बैठकर सांस लेने और त्वचा के वाष्पीकरण के माध्यम से रोजाना औसतन 500 से 1000 mL (आधा से एक लीटर) पानी खो देता है।

आजकल कॉर्पोरेट कल्चर में चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का चलन बहुत बढ़ गया है। लोग सोचते हैं कि वे लिक्विड ले रहे हैं, तो पानी की कमी नहीं होगी। यह सोच कितनी गलत है और कैफीन शरीर पर क्या असर डालता है?

यह सच है कि चाय और कॉफी बनाने में पानी का इस्तेमाल होता है, इसलिए वे शरीर में कुछ हद तक तरल पदार्थ (Fluids) पहुंचाते हैं।इसके पीछे कैफीन का और एनर्जी ड्रिंक्स के छिपे हुए नुकसान काम करते हैं।

  • (The Caffeine Effect) जब हम बार-बार चाय या कॉफी पीते हैं, तो उसमें मौजूद कैफीन हमारे शरीर पर कई तरह से असर डालता है।
  • हल्का मूत्रवर्धक (Mild Diuretic Effect): कैफीन किडनी को ज्यादा सक्रिय करता है। विशेषकर उन लोगों में जो बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेते हैं, यह मूत्र (Urine) की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे शरीर का पानी तेजी से बाहर निकल जाता है।
  • नर्वस सिस्टम पर असर: यह हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central Nervous System) को उत्तेजित करता है, जिससे तात्कालिक रूप से सुस्ती तो दूर होती है, लेकिन हृदय गति (Heart Rate) बढ़ सकती है।
  • नींद पर प्रभाव: देर शाम या रात को कैफीन का सेवन करने से नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) खराब होती है। अधूरी नींद अप्रत्यक्ष रूप से शरीर के मेटाबॉलिज्म और हाइड्रेशन को प्रभावित करती है।

एनर्जी ड्रिंक्स सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक क्यों हैं?

अक्सर कामकाजी युवा थकान मिटाने के लिए कैन वाले एनर्जी ड्रिंक्स या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। डॉक्टर्स इन्हें डिहाइड्रेशन का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं क्योंकि इनमें होता है:

  • अत्यधिक कैफीन और स्टिमुलेंट्स (Stimulants): यह शरीर को अचानक एक एनर्जी स्पाइक देते हैं, जो दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है।
  • भारी मात्रा में चीनी (High Sugar Content): इतनी अधिक चीनी को पचाने और खून में इसके स्तर को संतुलित करने के लिए कोशिकाओं (Cells) को अपने अंदर का पानी बाहर छोड़ना पड़ता है, जिससे आंतरिक डिहाइड्रेशन (Cellular Dehydration) बढ़ जाता है।
  • मेटाबॉलिक रिस्क: इनका नियमित सेवन वजन बढ़ाने, एंग्जायटी (घबराहट) और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को दोगुना कर देता है।

लंबे समय तक शरीर में पानी की हल्की कमी (Chronic Low-grade Dehydration) बने रहने से भविष्य में किन गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?

  • लंबे समय तक शरीर में पानी की हल्की कमी (Chronic Low-grade Dehydration) को लोग अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, यह आदत वर्षों तक बनी रहे तो शरीर के कई अंगों को अंदरूनी रूप से गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
  • किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) : जब शरीर में पानी की निरंतर कमी होती है, तो यूरिन (मूत्र) अधिक गाढ़ा और सघन हो जाता है। इसके कारण यूरिन में मौजूद कैल्शियम और यूरिक एसिड जैसे खनिज (Minerals) आपस में जुड़कर क्रिस्टल बनाने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पथरी (Stone) का रूप ले लेते हैं।
  • बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) : पर्याप्त पानी न पीने से शरीर हानिकारक बैक्टीरिया को यूरिन के रास्ते बाहर नहीं निकाल पाता। इसके चलते बैक्टीरिया को मूत्र मार्ग में ठहरने और पनपने का अधिक समय मिल जाता है, जिससे संक्रमण (UTI) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • क्रोनिक कब्ज (Chronic Constipation) : पाचन क्रिया को सुचारू रखने के लिए पानी बेहद जरूरी है। जब आंतों में पानी की कमी होती है, तो बड़ी आंत (Colon) भोजन से अत्यधिक पानी सोख लेती है, जिससे मल कठोर हो जाता है और व्यक्ति गंभीर कब्ज तथा पेट की अन्य समस्याओं से घिर जाता है।
  • क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का बढ़ता जोखिम: केवल हल्का डिहाइड्रेशन सीधे तौर पर CKD का कारण नहीं है। लेकिन अगर व्यक्ति को पहले से मधुमेह (Diabetes) या उच्च रक्तचाप (High BP) जैसी बीमारियां हैं, तो लगातार पानी की कमी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे भविष्य में किडनी डैमेज होने का रिस्क बढ़ जाता है।
  • मानसिक कार्यक्षमता और एकाग्रता में कमी: नवीनतम शोध बताते हैं कि शरीर में महज 1 से 2 प्रतिशत पानी की कमी भी सीधे हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करती है। इससे शॉर्ट-टर्म मेमोरी (याददाश्त), ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (Focus) और सही निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
  • हीट-संबंधी बीमारियों का अत्यधिक खतरा: यदि आपका शरीर पहले से ही आंतरिक रूप से पानी की कमी से जूझ रहा है, तो तापमान बढ़ते ही शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है। ऐसे में गर्म वातावरण या धूप में निकलने पर हीट एग्जॉशन (Heat Exhaustion) या हीट स्ट्रोक (लू लगना) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या सिर्फ सादा पानी पीना ही काफी है, या हमें डाइट में 'वॉटर-रिच फूड्स' (पानी से भरपूर फल/सब्जियां) और इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल करने की ज्यादा जरूरत है?

Updated on:
07 Jul 2026 10:31 am
Published on:
07 Jul 2026 10:31 am