
Cellular Dehydration Connection with Lifestyle :आज की व्यस्त जिंदगी के दौर में जहां, स्क्रीन से चिपकी आंखें और वातानुकूलित (AC) बंद कमरों ने हमारे जीने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इस आधुनिक जीवनशैली (Modern Lifestyle) ने हमें सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके साथ ही हमारे स्वास्थ्य को कई अनजाने खतरे भी दिए हैं। इन्हीं में से एक गंभीर और साइलेंट बीमारी है क्रोनिक डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की लगातार कमी)।
अक्सर हम डिहाइड्रेशन को सिर्फ गर्मियों की बीमारी या लू लगने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण लोग साल के बारह महीने डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोगों को इसका अहसास तब तक नहीं होता, जब तक कि शरीर गंभीर बीमारियों के लक्षण न दिखाने लगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि हमारी कौन सी आधुनिक आदतें शरीर को अंदर से सुखा रही हैं और इससे बचने के लिए हमें अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने चाहिए।
आजकल हम देखते हैं कि गर्मियों के अलावा भी लोग सालभर डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। आपकी नजर में हमारी 'मॉडर्न लाइफस्टाइल' की कौन सी आदतें इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं?
देखा गया है की आज की व्यस्त जीवनशैली ने डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) को एक ऐसी समस्या बना दिया है, जो किसी एक मौसम की मोहताज नहीं रही। यह अब साल के बारह महीने हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली एक 'साइलेंट हेल्थ प्रॉब्लम' बन चुकी है। इसके पीछे हमारी रोजमर्रा की ये मुख्य आदतें और कारण जिम्मेदार हैं।
कॉर्पोरेट कल्चर में लोग 8 से 10 घंटे AC के माहौल में बिताते हैं। बिना पसीना आए शरीर के अंदर पानी की कमी कैसे हो जाती है? इसके पीछे का मेडिकल साइंस क्या है?
यह एक बहुत बड़ा और आम भ्रम है कि हमारे शरीर से पानी सिर्फ पसीना आने पर ही कम होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, इंसानी शरीर से पानी मुख्य रूप से चार रास्तों से बाहर निकलता है: पसीना, यूरिन (मूत्र), मल और हमारी सांसें। जब कोई व्यक्ति 8 से 10 घंटे एयर-कंडीशन्ड (AC) माहौल में बैठता है, तो पसीना न आने के बावजूद शरीर के भीतर पानी की कमी होती है।
आजकल कॉर्पोरेट कल्चर में चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का चलन बहुत बढ़ गया है। लोग सोचते हैं कि वे लिक्विड ले रहे हैं, तो पानी की कमी नहीं होगी। यह सोच कितनी गलत है और कैफीन शरीर पर क्या असर डालता है?
यह सच है कि चाय और कॉफी बनाने में पानी का इस्तेमाल होता है, इसलिए वे शरीर में कुछ हद तक तरल पदार्थ (Fluids) पहुंचाते हैं।इसके पीछे कैफीन का और एनर्जी ड्रिंक्स के छिपे हुए नुकसान काम करते हैं।
एनर्जी ड्रिंक्स सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक क्यों हैं?
अक्सर कामकाजी युवा थकान मिटाने के लिए कैन वाले एनर्जी ड्रिंक्स या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। डॉक्टर्स इन्हें डिहाइड्रेशन का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं क्योंकि इनमें होता है:
लंबे समय तक शरीर में पानी की हल्की कमी (Chronic Low-grade Dehydration) बने रहने से भविष्य में किन गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
क्या सिर्फ सादा पानी पीना ही काफी है, या हमें डाइट में 'वॉटर-रिच फूड्स' (पानी से भरपूर फल/सब्जियां) और इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल करने की ज्यादा जरूरत है?