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Balochistan की आजादी के संघर्ष में महिलाएं क्यों ले और दे रही जान, पाकिस्तान में क्यों बुलाया जाता है इन्हें मुहाजिर?

Balochistan Pakistan : पाकिस्तान में बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई तेज होती जा रही है। 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे। अब उनकी संख्या बढ़कर 3000 से ज्यादा हो चुकी है। बीएलए के सदस्यों में लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं। ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

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Feb 03, 2026
Baloch women leading resistance protests in Balochistan

Balochistan Pakistan News : पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर से सुलग उठा है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान सेना के 200 से ज्यादा सेना के जवानों को मार गिराया है। पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चे को नेतृत्व करने वाली कोई और नहीं, वहां की महिलाएं हैं। BLA का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध इस इलाके का लगातार दोहन करने में लगी हुई है। बलूचियों का कहना है कि इस दोहन का यहां के स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। विद्रोह का झंडा महिलाओं ने अपने हाथों में उठा रखा है। आइए जानते हैं कौन हैं विद्रोह का परचम लहराने वाली महिलाएं?

प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न, लेकिन अपने पिछड़े होने से परेशान हैं बलोच

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा, सबसे कम आबादी वाला लेकिन पिछड़ा प्रांत है। यह इलाका प्राकृतिक संपदाओं खासतौर गैस, खनिज और तटीय संपदा जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। BLA और स्थानीय लोगों का दावा है कि पाकिस्तानी सरकार इन संसाधनों का दोहन कर रही है और स्थानीय बलूच लोगों को इनसे कोई लाभ नहीं मिल रहा है। BLA का कहना है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संपदाओं का लगातार दोहन किया जा रहा है, लेकिन यहां के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि वह अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

Photo Credit : (Xinhua via IANS)

'महिलाएं संघर्ष में हर जगह ले रही हैं मोर्चा'

ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (AIPWA) की महासचिव मीना तिवारी से जब यह पूछा गया कि बलूचिस्तान में महिलाएं संघर्ष के मोर्चे पर जोरशोर से डटी हुई हैं। वह अपने अधिकारियों की लड़ाई के लिए फिदायीन बनने तक को तैयार हैं। आप इसे कैसे देखती हैं? इस सवाल के जवाब में वह कहती हैं कि दुनिया में कहीं भी संघर्ष हो रहा है तो उसे पुरुष और स्त्री दोनों मिलकर लड़ रहे हैं। सरकार जब दमन पर उतरती है तो उनकी एजेंसियों पुलिस, सेना के निशाने पर महिलाएं ही सर्वाधिक होती हैं। दूसरा यह कि महिलाओं को दूसरे दर्जे का नागरिक माना जाता है। यही पीड़ा उनको ऐसे संघर्षों में मोर्चा लेने को उकसाती हैं। बलूचिस्तान में महिलाएं मोर्चा ले रही हैं और वह अपनी जान की बाजी लगा रही हैं तो यह समझा जाना चाहिए कि वहां कितना जुल्म बरपाया जा रहा होगा।

महरंग बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष का सबसे मुखर चेहरा

पाकिस्तान सरकार और बलूचियों के बीच संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाकिस्तान सरकार के खिलाफ महिलाएं सशस्त्र विद्रोह और शांतिपूर्ण संघर्ष- दोनों ही मोर्चों पर डटी हुई हैं। शांतिपूर्ण संघर्षों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हो चुकी महरंग बलोच को पिछले साल मार्च में पाकिस्तानी सेना के इशारे पर पुलिस ने हिरासत में लिया था। महरंग को रिहा करने की आजादी को लेकर बलूचिस्तान से लेकर कराची तक जोरदार प्रदर्शन हुए। महरंग बलूच यकजेहती समिति (BYC) का नेतृत्व कर रही हैं।

महरंग बलूच डॉक्टरी की पढ़ाई के बाद बनीं समाजिक कार्यकर्ता

महरंग बलोच बलूचिस्तान की आजादी के लिए पिछले सात वर्ष से ज्यादा समय से सक्रिय हैं। 33 साल की महरंग बलूच डॉक्टरी की पढ़ाई के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बन गईं। महरंग को बलोच अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए वर्ष 2024 में टाइम मैगजीन ने 100 उभरते युवा नेताओं की सूची में जगह दी। वही इसी साल बीबीसी ने उन्हें दुनिया की 100 सबसे पावरफुल महिलाओं की सूची में जगह दी।

Photo Credit: @MahrangBaloch_

पिता की मौत और भाई के अपहरण के बाद महरंग ने लिया फैसला

महरंग के पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव को वर्ष 2009 में पाकिस्तानी सेना ने गायब करवा दिया गया। वह एक राष्ट्रवादी नेता थे। दो वर्ष से भी ज्यादा समय तक लापता रहने के बाद 2011 में लासबेला जिले में उनकी लाश मिली। लाश क्षत—विक्षत अवस्था में पाई गई थी। अब्दुल गफ्फार की हत्या पाकिस्तानी सेना ने करवा दी। महरंग सिर्फ 16 साल की थीं, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया। इसके छह साल बाद उनके भाई नासिर बलूच को पाकिस्तान सेना ने उठवा लिया। तीन महीने तक टॉर्चर करने के बाद जब उन्हें छोड़ा गया तब उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वह मरनासन्न अवस्था में पाए गए थे। बाद में महरंग के भाई की पाकिस्तान सेना ने गोली मारकर हत्या कर दी। महरंग ने इसके बाद 2023 में आंदोलन में अपनी भागीदारी बहुत ज्यादा बढ़ा ली।

महरंग परिवार से क्यों चिढ़ती है पाकिस्तानी सेना

महरंग और उसके परिवार के लोग अच्छे संगठनकर्ता हैं। बलूचिस्तानियों को पाकिस्तान सरकार के खिलाफ एकजुट करने में महरंग और उनकी बहनों, भाई और पिता की बहुत जोरदार भूमिका रही है। उनकी बहनों में इकरा बलूच का नाम भी बलूचिस्तानियों के बीच बेहद पॉपुलर है। महरंग ने पिता और भाई की मौत के बाद वर्ष 2024 में महरंग ने पूरे बलूचिस्तान में घूम-घूमकर लोगों को एकजुट किया। पाकिस्तान सरकार का मानना है कि महरंग ने बलूच लड़ाकों को उकसाया है। हालांकि, महरंग और उनके साथियों का मानना है कि अपने अधिकारों और अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना कोई जुर्म नहीं है।

कौन हैं नायला कादरी बलोच?

नायरा कादरी बलूच बलूचिस्तान की निर्वासित प्रधानमंत्री हैं। वह कनाडा में रहती हैं। वह हिंद-बलूच मंच की संस्थापक सदस्य भी हैं। हिंद-बलूच मंच की स्थापना धार्मिक नेता आचार्य जितेंद्रनाथ ने की थी। वह कई बार भारत का दौरा भी कर चुकी हैं।

Photo Credit: @BPCongress

पाकिस्तान चले गए मुसलमानों को मुहाजिर मानती है सरकार

नायला से जब यह पूछा गया कि वह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ क्यों हैं? उन्होंने कहा कि जो लोग 1947 में हिंदुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन के समय पाकिस्तान प्रेम में हिन्दुस्तान से वहां चले गए, उन्हें पाकिस्तानी सरकार हिंदुस्तानी मुहाजिर बुलाती है। यह सिलसिला 7 दशकों से चला आ रहा है। उनकी बेटियों को अगवा किया जाता है। उनका रेप किया जाता है। उन्हें आज तक एक नागरिक की हैसियत नहीं ​दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में पाकिस्तान ने जितने मुसलमान मारे हैं, उतने किसी ने नहीं मारे।

बलोच ईरान के सिस्तान व बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के निवासियों का एक प्रमुख ईरानी जातीय समूह है। इस इलाके में विभाजन के समय भारत से मुसलमान पाकिस्तान चले गए और अब कई पीढ़ियों से यहां रहती हैं, उन्हें पाकिस्तान हिंदुस्तानी मुहाजिर कहकर पुकारती है।

बलूचिस्तान की महिलाएं अब पाकिस्तान सेना के खिलाफ गुरिल्ला वॉर की तकनीक के जरिए लड़ रही हैं। इनका नेतृत्व आसिफा मेंगल (23) और हवा बलोच (24) नाम की महिलाएं कर रही हैं। बीएलए ने इनकी तस्वीरें जारी की हैं।

कौन थीं आसिफा और हवा जिन्होंने खुद की ले ली जान

आसिफा मेंगल और हवा बलोच ने अपनी सामान्य जिंदगी छोड़कर बीएलए की फिदायीन मजीद ब्रिगेड और 'हीरोफ 2.0' हमले के दौरान अलग-अलग स्थानों पर खुद को उड़ा लिया। इस हमले में बीएलए विद्रोहियों ने कलात, ग्वादर, मस्तंग, नोशकी, खारान, तुरबत और पसनी क्षेत्रों में सरकारी कार्यालयों, बैंकों, फ्रंटियर कोर मुख्यालय और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। बीएलए के मीडिया विंग, हक्कल ने भी हमलों और बंधकों के फुटेज सोशल मीडिया पर जारी किए थे।

21 की उम्र में मजीद बिग्रेड में शामिल हो गई थीं आसिफा

वर्ष 2002 में बलूचिस्तान प्रांत के नोश्की में जन्मी आसिफा ने अपने 21वें जन्मदिन के मौके पर मजीद ब्रिगेड ज्वाइन किया। अभी तीन दिन पहले हुए हमले में शामिल उसने नोश्की में आईएसआई मुख्यालय पर हुए हमले में भाग लिया और खुद को उड़ा दिया। इस हमले में बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए।

हवा अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए मजीद ब्रिगेड में हुई शामिल

हवा बलोच के लिए यह संघर्ष बेहद व्यक्तिगत था। हवा बलूचिस्तान के उभरती लेखिका के तौर पर जानी और सराही जाती है। उसके पिता नबी बख्श बलोच, जो खुद बीएलए सदस्य थे, उन्हें 2021 में ईरान के सिस्तान में मार दिया गया था। अपने पिता की हत्या के बाद वह मजीद ब्रिगेड में शामिल हो गई थी।

एक दर्जन महिलाएं बनी फिदायीन, 60 और 70 वर्ष की उम्र में दी जान

बलूचिस्तान में हमलों की इस लहर में 60 वर्षीय हातम नाज़ सुमलानी से लेकर 70 वर्षीय नाको फ़ज़ल बलोच तक लगभग एक दर्जन लोगों ने भाग लिया और जिन्होंने हिंसा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर खुद को उड़ा लिया।

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