
C- Section Delivery: चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में कुछ हार्मोन ऐसे हैं जो भावनाओं से लेकर जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी तक का सफर तय करते हैं। ऐसा ही एक जादुई और बेहद महत्वपूर्ण हार्मोन है ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)। आम बोलचाल में लोग इसे 'लव हार्मोन', 'कडल हार्मोन' या 'बॉन्डिंग हार्मोन' के नाम से जानते हैं, क्योंकि यह आपसी प्यार, भरोसे और मातृत्व की भावना को जगाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब बात सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) की आती है, तो यही ऑक्सीटोसिन एक 'लाइफ-सेविंग ड्रग' यानी जीवन रक्षक दवा का रूप ले लेता है?
आजकल के बदलते लाइफस्टाइल और मेडिकल जरूरतों के कारण सी-सेक्शन डिलीवरी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि ऑपरेशन थियेटर के भीतर डॉक्टरों के लिए ऑक्सीटोसिन का एक छोटा सा इंजेक्शन कितना मायने रखता है और क्यों इसके बिना सिजेरियन डिलीवरी की कल्पना करना भी मुश्किल है।
आम तौर पर लोग ऑक्सीटोसिन को 'लव हार्मोन' के नाम से जानते हैं। ऑपरेशन थियेटर में सी-सेक्शन के दौरान यह एक 'लाइफ-सेविंग ड्रग' कैसे बन जाता है?
ऑक्सीटोसिन को 'लव हार्मोन' इसलिए कहते हैं क्योंकि यह बॉन्डिंग और भावनाएं बढ़ाता है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर में सी-सेक्शन के दौरान यह एक अनिवार्य 'लाइफ-सेविंग ड्रग' (जीवन रक्षक दवा) बन जाता है। इसकी मुख्य वजहें हैं ।
अगर सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद मां को ऑक्सीटोसिन न दिया जाए, तो क्या-क्या कॉम्प्लिकेशंस (जटिलताएं) आ सकती हैं?
अगर सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद मां को ऑक्सीटोसिन न दिया जाए, तो गंभीर जटिलताएं (Complications) आ सकती हैं।
डॉक्टर 'लो-डोज ऑक्सीटोसिन प्रोटोकॉल' की बात करते हैं। डिलीवरी के वक्त इसकी सही डोज तय करना एनेस्थेटिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट के लिए कितनी बड़ी चुनौती होती है?
डिलीवरी के वक्त ऑक्सीटोसिन की सही डोज तय करना डॉक्टरों के लिए एक 'डबल-एज्ड स्वॉर्ड' (दुधारी तलवार) जैसी चुनौती है। लो-डोज ऑक्सीटोसिन प्रोटोकॉल का मकसद मां को साइड इफेक्ट्स से बचाते हुए ब्लीडिंग रोकना होता है।यह डॉक्टरों के लिए दो बड़ी वजहों से चुनौतीपूर्ण है।
क्या कुछ महिलाओं में ऑक्सीटोसिन दिए जाने के बाद कोई साइड इफेक्ट्स या एलर्जिक रिएक्शन भी देखने को मिलते हैं? उनसे कैसे निपटा जाता है?
क्या हाई ब्लड प्रेशर (Pre-eclampsia) या डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को ऑक्सीटोसिन देते वक्त कोई विशेष सावधानी रखनी पड़ती है?
Pre-eclampsia (हाई बीपी) या डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को ऑक्सीटोसिन देते वक्त डॉक्टरों को बहुत ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है।
इंटरनेट पर अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि लेबर पेन बढ़ाने या सी-सेक्शन में दिए जाने वाले सिंथेटिक हार्मोन से बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। एक डॉक्टर के तौर पर आप इस पर क्या कहेंगी?
इंटरनेट पर फैला यह भ्रम पूरी तरह वैज्ञानिक तथ्यों से परे है। सी-सेक्शन या लेबर पेन बढ़ाने के लिए दिया जाने वाला सिंथेटिक ऑक्सीटोसिन (पिटोसिन) बिल्कुल सुरक्षित है और इसका नवजात शिशु पर कोई बुरा या परमानेंट असर नहीं पड़ता।