
Zero Sizes Craze: सोशल मीडिया के दौर में 'फिटनेस' की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है। इंस्टाग्राम रील्स या स्क्रॉल करते हुए जब हम किसी फीमेल इन्फ्लुएंसर या सेलिब्रिटी के 'सिक्स-पैक एब्स' या 'श्रेडिड लीन बॉडी' (Shredded Lean Body) को देखते हैं, तो अनजाने में ही सही, उसे ही आइडियल ब्यूटी स्टैंडर्ड (Ideal Beauty Standard) मान लेते हैं। इस 'परफेक्ट शेप' को पाने के लिए देश की लाखों युवा लड़कियां और महिलाएं क्रैश डाइट (Crash Diet), कैलोरी में भारी कटौती और घंटों जिम में पसीना बहाने का रास्ता चुन रही हैं।
लेकिन क्या यह चमकीली दुनिया वाकई उतनी ही सेहतमंद है जितनी दिखाई देती है? हालिया शोध के अनुसार जिन लड़कियों की बॉडी बहुत ज्यादा पतली होती है और उनके पेट पर एब्स (abs) दिखाई देते हैं, अक्सर उनके पीरियड्स (Periods Problem) रुक या अनियमित हो जाते हैं। खुद को जबरदस्ती सुखाने या 'श्रिंक' करने की यह सनक महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ (Hormonal Health) पर भारी पड़ रही है। मेडिकल साइंस (Medical Science) की भाषा में बहुत ज्यादा सख्त डाइटिंग और हैवी वर्कआउट के कारण पीरियड्स बंद होने की इस स्थिति को हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया (Hypothalamic Amenorrhea) कहा जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर फिटनेस की यह चाहत किस तरह महिलाओं के शरीर को अंदर से खोखला कर रही है।
हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें किसी महिला या लड़की के पीरियड्स लगातार 3 महीने या उससे ज्यादा समय के लिए पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। ऐसा तब होता है जब हमारे दिमाग का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा, जिसे हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) कहते हैं, काम करना धीमा कर देता है या कुछ हार्मोन्स का प्रोडक्शन पूरी तरह रोक देता है।
इसे समझने के लिए हाइपोथैलेमस को अपने शरीर का 'कंट्रोल रूम' या 'मेन स्विच' मान लीजिए। इस कंट्रोल रूम का काम शरीर के तापमान, भूख, प्यास और सबसे जरूरी हार्मोनल बैलेंस को नियंत्रित करना है। जब कोई महिला जरूरत से बहुत कम कैलोरी लेती है और क्षमता से अधिक वर्कआउट करती है, तो हाइपोथैलेमस को लगता है कि शरीर पर कोई भारी संकट (जैसे भुखमरी या अकाल) आ गया है। ऐसी स्थिति में दिमाग 'सर्वाइवल मोड' में चला जाता है। वह सोचता है कि इस वक्त शरीर को जिंदा रखना ज्यादा जरूरी है, न कि बच्चा पैदा करना या पीरियड्स जारी रखना। नतीजा यह होता है कि दिमाग उन हार्मोन्स (जैसे GnRH) को बनाना बंद कर देता है, जो ओव्यूलेशन (अंडे बनने की प्रक्रिया) और पीरियड्स के लिए जिम्मेदार होते हैं।
अक्सर महिलाएं 'एब्स' (Abs) और 'लीन बॉडी' को परफेक्ट फिटनेस मानती हैं। एक डायटीशियन के तौर पर आप फिट दिखने और अंदर से सेहतमंद होने के बीच क्या फर्क देखती हैं?
फिट दिखने से ज्यादा जरूरी है फिट होना। सिर्फ एब्स (Abs) दिखना या लीन (Lean) होना ही फिटनेस नहीं है। यह किसी विशेष प्रोफेशन की जरूरत तो हो सकती है, लेकिन स्वस्थ होने का प्रमाण बिल्कुल नहीं है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि असल में 'हेल्थ' या स्वास्थ्य कहते किसे हैं। फिटनेस का अर्थ है कि हमारी बॉडी के सभी फंक्शंस और सिस्टम्स संतुलित तरीके से काम कर रहे हों। आपकी हड्डियां मजबूत हों, आपका मेटाबॉलिज्म अच्छा हो, आपका डाइजेस्टिव सिस्टम स्ट्रॉन्ग हो और आपका हार्मोनल सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा हो क्योंकि हार्मोनल सिस्टम ही शरीर की ग्रोथ, रिपेयर, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नींद जैसी कई महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही आपका स्लीप पैटर्न (Sleep Pattern) कैसा है और आप तनाव (Stress) को कैसे हैंडल करते हैं, यह सब भी आपकी हेल्थ को परिभाषित करता है। मानसिक स्वास्थ्य भी स्वस्थ शरीर का ही एक बहुत बड़ा पहलू है। इसलिए केवल एक लीन बॉडी को हेल्दी बॉडी नहीं कहा जा सकता। शरीर में कैलोरी की कमी (Calorie Deficiency) और कुपोषण (Malnutrition) के कारण हार्मोनल असंतुलन जैसी कई गंभीर समस्याएं भी पैदा होने लगती हैं।
हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया (Hypothalamic Amenorrhea) के शुरुआती लक्षण क्या हैं? पीरियड्स पूरी तरह बंद होने से पहले शरीर क्या संकेत देता है?
बेहतर या लीन (Lean) दिखने की चाह में जब हम बहुत ज्यादा कैलोरी डेफिसिट डाइट (Calorie Deficit Diet) लेने लगते हैं, तो अक्सर महिलाओं और लड़कियों को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है, जिसे 'हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया' (Hypothalamic Amenorrhea) कहा जाता है। लेकिन इसके बारे में विस्तार से बात करने से पहले, इस स्थिति (Condition) को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
दरअसल, हमारे मस्तिष्क (Brain) में एक हिस्सा होता है हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)। इसे आप हमारे शरीर की 'सेंट्रल कंट्रोल यूनिट' या कंट्रोल सिस्टम की तरह समझ सकते हैं। यह हमारे शरीर को निर्देश देता है कि हमें कब भूख लगेगी, शरीर का तापमान (Temperature) कैसा रहेगा और महिलाओं में पीरियड्स (Menstrual Cycle) कब शुरू होंगे। सामान्य प्रक्रिया में, हाइपोथैलेमस एक विशेष हार्मोन रिलीज करता है, जो आगे चलकर पिट्यूटरी ग्लैंड (Pituitary Gland) को सक्रिय करता है। इसके बाद पिट्यूटरी ग्लैंड दो अन्य हार्मोन्स रिलीज करती है, जो ओवरीज (Ovaries) को अंडे बनाने और एस्ट्रोजन (Estrogen) रिलीज करने का संदेश भेजते हैं। परंतु, जब शरीर में कैलोरी की अत्यधिक कमी हो जाती है या शरीर बहुत ज्यादा तनाव से गुजर रहा होता है, तो मस्तिष्क को लगता है कि उसके पास पर्याप्त ऊर्जा नहीं है। ऐसे में हमारा शरीर एक 'प्रोटेक्टिव मोड' में चला जाता है और उन शारीरिक प्रक्रियाओं को धीमा या बंद कर देता है जो जीवित रहने के लिए तुरंत जरूरी नहीं हैं जैसे कि रिप्रोडक्शन (Reproduction) । इस स्थिति में हाइपोथैलेमस जरूरी हार्मोन्स का सीक्रेशन (Secretion) कम कर देता है, ताकि बची हुई सीमित कैलोरी का उपयोग सिर्फ सांस लेने और दिल धड़कने जैसे अनिवार्य कार्यों के लिए किया जा सके। जब हाइपोथैलेमस से हार्मोन का रिसाव कम होता है, तो अंतत ओवरीज और एस्ट्रोजन का स्तर भी गिर जाता है। इसके परिणामस्वरूप ओव्यूलेशन (Ovulation) नहीं हो पाता, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। इसे हम शरीर के एक सुरक्षात्मक तंत्र (Protective Response) के रूप में देख सकते हैं। शरीर यह मान लेता है कि जब खुद को चलाने के लिए ही पर्याप्त ऊर्जा नहीं है, तो वह नए जीवन या रिप्रोडक्शन के लिए तैयार नहीं है, और इसीलिए वह इस सिस्टम को रोक देता है।
क्या सिर्फ एथलीट्स या जिम जाने वाली महिलाओं को ही यह समस्या होती है, या आम लड़कियां भी डाइटिंग के चक्कर में इसका शिकार हो रही हैं?
हाइपोथैलेमस के सुरक्षात्मक रुख (Hypothalamus Response) को प्रभावित करते हैं...
इंस्टाग्राम और रील कल्चर के इस दौर में युवाओं पर 'जीरो साइज' या 'श्रेडिड बॉडी' का भारी दबाव है। इस सोशल मीडिया प्रेशर ने महिलाओं के खान-पान की आदतों (Eating Disorders) को कैसे प्रभावित किया है?
यदि हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का असंतुलन हो रहा होता है, तो हमारी बॉडी शुरुआत में ही हमें कई तरह के संकेत देने लगती है ताकि हम उस समस्या को समझ सकें। जब भी शरीर में हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया (Hypothalamic Amenorrhea) की स्थिति बनने वाली होती है, तो उससे पहले हमारा शरीर ये शुरुआती लक्षण और संकेत दिखाता है।
अक्सर वजन बढ़ने के डर से लड़कियां घी, तेल या नट्स (Healthy Fats) से दूरी बना लेती हैं। हार्मोनल हेल्थ के लिए 'गुड फैट्स' क्यों जरूरी हैं, और इन्हें डाइट में कैसे शामिल करें?
अक्सर लड़कियां अपने वजन को नियंत्रित रखने या वजन घटाने के चक्कर में अपनी डाइट से 'हेल्दी फैट्स' (स्वस्थ वसा) को पूरी तरह से हटा देती हैं। यहां तक कि कई लोग तो 'जीरो फैट डाइट' (Zero Fat Diet) पर आ जाते हैं। वे अपनी खुराक में घी, नट्स (मेवे) और ऑयल्स (तेल) का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देती हैं, जबकि ये हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से, वसा में घुलनशील विटामिन A, D, E और K (Fat-Soluble Vitamins) का हमारे शरीर में अवशोषण (Absorption) केवल फैट मीडियम (वसा के माध्यम) से ही संभव हो पाता है। इसलिए इन आवश्यक विटामिन्स को सोखने के लिए शरीर में हेल्दी फैट्स का होना बेहद जरूरी है, जो आगे चलकर हमारी बॉडी में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। इसके अलावा, शरीर में हार्मोन के निर्माण (Hormone Formation) के लिए भी फैट्स की आवश्यकता होती है। साथ ही, हमारे मस्तिष्क के बेहतर कामकाज और संज्ञानात्मक क्षमताओं (Cognitive Functions) को बनाए रखने के लिए भी यह बेहद जरूरी है। इसलिए, फैट्स को पूरी तरह से बंद करने के बजाय, इन्हें संतुलित मात्रा में लेना ही सबसे सही और स्वास्थ्यवर्धक तरीका है
यदि कोई महिला इस समस्या से उबरना चाहती है, तो रिकवरी के दौरान उसका डाइट पैटर्न कैसा होना चाहिए?
इस मेडिकल कंडीशन को ठीक करने के लिए हमें डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही, एक अच्छे डायटीशियन (Dietitian) की सलाह भी जरूर लें क्योंकि इस इलाज का उद्देश्य सिर्फ पीरियड्स को ठीक करना नहीं है, बल्कि हमारे शरीर को यह भरोसा दिलाना भी है कि उसके पास सभी महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों (Body Functions) को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा और कैलोरीज मौजूद हैं। इसलिए, सबसे पहले अपने शरीर की जरूरतों और अपने फिजिकल एक्टिविटी लेवल (Physical Activities) को समझते हुए, उसी के अनुसार अपनी डाइट की कैलोरीज निर्धारित करें। कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) से बिल्कुल न डरें। सही मात्रा और सही प्रकार से लिया गया कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर की तुरंत होने वाली ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करता है। कार्बोहाइड्रेट हमारा दोस्त है, दुश्मन नहीं। इसके साथ ही, प्रोटीन और फैट भी शरीर के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। बस अपने शरीर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इनकी मात्रा (Amount) तय करें या इन्हें संतुलित मात्रा (Moderation) में लें। इस समस्या से उबरने और शरीर की पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए भोजन का सही स्रोत (Right Food Source) और सही कॉम्बिनेशन (Right Food Combination) चुनना बेहद जरूरी है।
कैसे अपने तनाव को बेहतर तरीके से प्रबंधित करें और बहुत ज्यादा स्ट्रेस या एंग्जायटी की स्थिति में न रहें?
इस मेडिकल कंडीशन को प्रभावित करने वाला एक और सबसे महत्वपूर्ण कारक (Factor) आपकी नींद है। समय पर सोना और एक अच्छी व गहरी नींद लेना आपके शरीर में हार्मोनल रिलीज को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। सही तरीके से और पर्याप्त मात्रा में ली गई नींद के दौरान आपके हार्मोन्स संतुलित होकर ढंग से काम कर पाते हैं, जिससे सोते समय आपकी बॉडी खुद को बेहतर तरीके से रिपेयर (रिकवर) कर पाती है।