
Self Employed Woman: कभी घर की चारदीवारी और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली बस्तर की महिलाएं अब रोजगार के ऐसे क्षेत्रों में भी कदम बढ़ा रही हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है। इसकी प्रेरक मिसाल बारसूर की गृहिणी नील कुमारी नाग हैं। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ उन्होंने चार पहिया वाहन की स्टेयरिंग थामी और ड्राइविंग को अपने लिए स्वरोजगार का जरिया बनाया। आज वे न केवल खुद वाहन चलाती हैं, बल्कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों से लेकर दूसरे राज्यों तक बुकिंग पर वाहन लेकर जाती हैं। पिछले चार वर्षों में उन्होंने वाहन चलाकर तीन लाख रुपए से अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित की है।
बस्तर जिले के भानपुरी में जन्मीं नील कुमारी का विवाह बारसूर निवासी सीएएफ जवान भुनेश्वर नाग से हुआ है। उनकी पांच बेटियां हैं, जिनकी उम्र करीब 10 से 20 वर्ष के बीच है। सभी बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। परिवार की जरूरत को देखते हुए भुनेश्वर नाग ने वर्ष 2022 में मारुति अर्टिगा खरीदी थी। शुरुआत में वाहन चलाने के लिए परिवार को चालक पर निर्भर रहना पड़ता था।
ऐसे में उनके पति ने नील कुमारी को खुद ड्राइविंग सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। शुरुआत में नील को झिझक और संकोच जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे ड्राइविंग सीखना शुरू किया। कार खरीदने के करीब एक महीने बाद उन्होंने स्वयं वाहन चलाने का फैसला किया। ड्राइवर की कमी के बीच उन्होंने स्टेयरिंग संभाली और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया।
नील कुमारी ने पहली बार बारसूर से खुद वाहन चलाकर गीदम तक का सफर तय किया। यह उनके लिए ड्राइविंग की दिशा में पहला बड़ा कदम था। इसके बाद जैसे-जैसे उनका आत्मविश्वास बढ़ा, उन्होंने लंबी दूरी की यात्राएं भी शुरू कर दीं। नील कुमारी दंतेवाड़ा, जगदलपुर, सुकमा, मलकानगिरी, मेढ़ाराम, भद्राचलम और रायपुर तक वाहन खुद चलाकर जा चुकी हैं। शुरुआत में वे बुकिंग पर चालक के साथ यात्राओं पर जाती थीं। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ा तो उन्होंने अकेले भी लंबी दूरी की बुकिंग लेना शुरू कर दिया।
नील कुमारी का आत्मविश्वास अब इतना बढ़ चुका है कि लंबी दूरी की ड्राइविंग भी उन्हें नहीं डराती। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे करीब 36 घंटे तक लगातार वाहन चला सकती हैं। अब वे बेंगलुरु जैसे दूर के शहरों तक भी बुकिंग पर वाहन लेकर जाती हैं।
हालांकि इतनी लंबी दूरी की यात्रा में सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए वे सहायक चालक को साथ रखती हैं। उनके लिए ड्राइविंग अब केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने का माध्यम भी बन चुका है।
नील कुमारी बताती हैं कि वाहन चलाने के इस काम से पिछले चार वर्षों में उन्होंने तीन लाख रुपए से अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित की है। यह आय परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ उनकी पांचों बेटियों की पढ़ाई में भी मददगार साबित हो रही है। पति की नौकरी के साथ नील कुमारी ने स्वरोजगार का ऐसा रास्ता चुना, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली। घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने ड्राइविंग को अपने आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया।
नील कुमारी की कहानी सिर्फ एक महिला के वाहन चलाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की तस्वीर भी है, जहां बस्तर की महिलाएं पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह बना रही हैं।
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ ड्राइविंग जैसे क्षेत्र में कदम रखना और लंबी दूरी तक वाहन चलाकर आय अर्जित करना नील कुमारी के लिए अपने आप में एक अलग पहचान है। उन्होंने यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग से महिलाएं उन क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकती हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों तक सीमित माना जाता रहा है।