
79 years of independence India: 15 अगस्त 1947 को भारत ने राजनीतिक आजादी हासिल की थी। इसके साथ ही एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण का सपना भी जुड़ा था, जहां हर नागरिक को समान अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और सम्मान मिले। आज 2026 में, 79 साल बाद पीछे मुड़कर देखें तो, तस्वीर केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि अधूरे लक्ष्यों की भी नजर आती है।
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है, अंतरिक्ष मिशनों में नई ऊंचाइयां छू रहा है, डिजिटल भुगतान में वैश्विक उदाहरण बन चुका है और करोड़ों लोगों तक बिजली, सड़क, बैंकिंग तथा शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। लेकिन दूसरी ओर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त रोजगार, न्यायिक लंबित मामले, स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च, वायु प्रदूषण और कृषि आय जैसी चुनौतियां अब भी राष्ट्रीय एजेंडे में बनी हुई हैं।
-महात्मा गांधी
दुनिया के कई नए देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक सकी, लेकिन भारत ने नियमित चुनाव, शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन और स्वतंत्र चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को लगातार मजबूत बनाए रखा। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है।
संविधान ने समानता, स्वतंत्रता और न्याय का वादा किया था। इन 79 वर्षों में सार्वभौमिक मतदान अधिकार मजबूत हुए। अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू रही। महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ा। स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला। हालांकि सामाजिक और आर्थिक समानता अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुई है।
1960 के दशक में भारत खाद्यान्न आयात पर निर्भर था। आज देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली करोड़ों लोगों तक अनाज पहुंचाती है। हरित क्रांति ने कृषि उत्पादन बढ़ाया। फिर भी कुपोषण और बच्चों में स्टंटिंग जैसी समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
एक समय भारत दूसरे देशों के लॉन्च वाहनों पर निर्भर था। आज चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला पहला देश बना। सूर्य मिशन संचालित किया। कम लागत वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए वैश्विक पहचान बनाई। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है।
आज करोड़ों लोग डिजिटल भुगतान करते हैं। आधार, डीबीटी और डिजिटल सेवाओं ने सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाई।
बैंक खाते और मोबाइल कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार हुआ। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) भारत की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती है।
-डॉ. भीमराव अंबेडकर
पिछले दशकों में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंच बढ़ी। रेलवे का विद्युतीकरण तेज हुआ। मेट्रो नेटवर्क कई शहरों तक पहुंचा। बुनियादी ढांचा आज भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
आर्थिक विकास के बावजूद गुणवत्तापूर्ण और औपचारिक रोजगार सृजन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। युवाओं में कौशल और रोजगार के बीच अंतर अभी भी चिंता का विषय है।
भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ी है और कई संक्रामक रोगों पर नियंत्रण हुआ है। लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च विकसित देशों की तुलना में कम है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता बनी हुई है। गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
देश की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं। न्याय मिलने में वर्षों लग जाना आज भी आम नागरिक के सामने बड़ी चुनौती है।
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ी प्रगति की है। फिर भी कई शहरों में वायु प्रदूषण गंभीर है। जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का असर कृषि और मौसम पर दिखाई दे रहा है।
गरीबी में कमी आई है, लेकिन आय और संपत्ति की असमानता नीति निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
-पंडित जवाहर लाल नेहरू
-डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
79 वर्षों की यात्रा बताती है कि भारत ने लोकतंत्र, विज्ञान, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वहीं रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, न्यायिक दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और आय असमानता जैसे मुद्दे अब भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बने हुए हैं। क्या आजादी का अगला अध्याय केवल आर्थिक विकास का होगा? या फिर भारत ऐसा बनेगा कि जहां हर नागरिक को समान अवसर, बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, समय पर न्याय और सम्मानजनक रोजगार भी मिल सकेगा...कैसी होगी अगले एक दशक की तस्वीर?