
AI Jobs : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि और विनिर्माण जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल AI टूल्स का उपयोग करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें समझना, जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना और उनके साथ काम करने की क्षमता भी जरूरी होगी।
यही वजह है कि भारत सरकार, UNICEF, World Economic Forum (WEF) और अन्य संस्थाएं बच्चों और युवाओं में AI साक्षरता (AI Literacy) बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने Skill India Mission के तहत SOAR (Skilling for AI Readiness) कार्यक्रम शुरू किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों और शिक्षकों में AI की बुनियादी समझ विकसित करना है।
SOAR के तहत छात्रों के लिए AI to be Aware, AI to Aspire और AI to Acquire नाम से तीन प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की अवधि 15 घंटे है। वहीं शिक्षकों के लिए 45 घंटे का विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाया गया है।
यह कार्यक्रम Skill India Digital Hub (SIDH) के माध्यम से उपलब्ध है, ताकि देशभर के छात्र और शिक्षक AI से जुड़ी बुनियादी जानकारी हासिल कर सकें। सरकार का लक्ष्य डिजिटल विभाजन कम करना और AI शिक्षा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
AI शिक्षा को केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रखा गया है। Directorate General of Training (DGT) ने Craftsman Training Scheme (CTS) के तहत 'Introduction to Artificial Intelligence' नाम का 7.5 घंटे का माइक्रो-क्रेडेंशियल मॉड्यूल भी शुरू किया है।
इस मॉड्यूल का उद्देश्य ITI और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को AI की बुनियादी अवधारणाओं, उसके सुरक्षित उपयोग और कार्यस्थल पर उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना है। इससे भविष्य के रोजगार बाजार के लिए युवाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी।
यूनिसेफ का मानना है कि बच्चों को केवल AI के संभावित जोखिमों से बचाना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों को AI को समझने, उसका जिम्मेदारी से उपयोग करने और भविष्य में AI से जुड़े निर्णयों में भागीदारी के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए।
UNICEF ने अपनी विभिन्न रिपोर्टों में AI शिक्षा को समावेशी बनाने, सभी बच्चों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने और AI से जुड़े नीतिगत निर्णयों (AI Governance) में बच्चों की आवाज को महत्व देने की सिफारिश की है।
UNICEF Innocenti – Global Office of Research and Foresight की रिपोर्ट के अनुसार, AI और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग से रोजगार की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में बच्चों और युवाओं को केवल डिजिटल साक्षरता सिखाना पर्याप्त नहीं होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य के कार्यस्थलों के लिए आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान , रचनात्मकता , संचार कौशल , भावनात्मक बुद्धिमत्ता और अनुकूलन क्षमता जैसे कौशल पहले से अधिक महत्वपूर्ण होंगे।
अप्रैल 2026 में प्रकाशित Sanchit Rewatkar के एक अध्ययन में महाराष्ट्र के इंजीनियरिंग छात्रों के बीच AI साक्षरता का आकलन किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश छात्र ChatGPT और Gemini जैसे जनरेटिव AI टूल्स से परिचित थे और बड़ी संख्या में उनका नियमित उपयोग भी कर रहे थे। हालांकि, AI की मूल अवधारणाओं, सीमाओं, नैतिक उपयोग और तकनीकी समझ के मामले में अपेक्षाकृत कम छात्रों ने खुद को दक्ष बताया।
अध्ययन यह संकेत देता है कि AI टूल्स का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन AI की गहरी समझ विकसित करने की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।
ध्यान दें: यह अध्ययन महाराष्ट्र के इंजीनियरिंग छात्रों पर आधारित है। इसलिए इसके निष्कर्षों को पूरे देश के सभी छात्रों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता।
LinkedIn Economic Graph के अनुसार, भारत में AI कौशल की मांग लगातार बढ़ रही है। AI से जुड़े जॉब पोस्टिंग्स में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह वृद्धि केवल बेंगलुरु जैसे तकनीकी केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि हैदराबाद, पुणे और अन्य उभरते शहरों में भी AI पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में AI कौशल रखने वाले उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर और अधिक बढ़ सकते हैं।
World Economic Forum (WEF) की Future of Jobs Report और McKinsey & Company की विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, AI कई पारंपरिक नौकरियों की प्रकृति बदल रहा है। कुछ कार्य AI द्वारा स्वचालित किए जा सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही नए प्रकार की नौकरियां और नई भूमिकाएं भी सामने आ रही हैं।
इन रिपोर्टों के अनुसार, भविष्य में सबसे अधिक मांग उन लोगों की होगी जो तकनीकी कौशल के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच, निर्णय क्षमता, रचनात्मकता, संचार कौशल और टीमवर्क जैसी मानवीय क्षमताओं में भी मजबूत होंगे।
NASSCOM और उद्योग से जुड़े विभिन्न आकलनों के अनुसार, भारत में AI पेशेवरों की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसी वजह से सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान AI प्रशिक्षण और कौशल विकास पर लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को केवल ChatGPT, Gemini या अन्य AI टूल्स का उपयोग करना सिखाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी समझाना होगा कि AI हमेशा सही उत्तर नहीं देता, इसमें पक्षपात (Bias) हो सकता है और इसकी जानकारी की जांच करना क्यों जरूरी है।
माता-पिता और शिक्षक बच्चों में प्रश्न पूछने की आदत, तथ्यों की जांच करने की क्षमता, डिजिटल सुरक्षा की समझ और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग की सोच विकसित करें। यही कौशल उन्हें भविष्य में बेहतर निर्णय लेने और बदलती रोजगार दुनिया में सफल होने में मदद करेंगे।
AI आने वाले वर्षों में शिक्षा और रोजगार की दुनिया को गहराई से प्रभावित कर रहा है और आगे भी प्रभाव देखने को मिलेगा। शिक्षण संस्थाओं की रिपोर्टें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि AI साक्षरता अब भविष्य की जरूरत बन चुकी है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल AI सीखना पर्याप्त नहीं होगा। बच्चों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, नैतिक समझ, संचार कौशल और समस्या-समाधान जैसी मानवीय क्षमताएं भी विकसित करनी होंगी। यही संतुलन उन्हें भविष्य की बदलती रोजगार दुनिया में प्रतिस्पर्धी और सफल बनाएगा।