
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT AI
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। स्कूलों, कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नोट्स तैयार करने से लेकर कठिन विषय समझने, मॉक टेस्ट बनाने और परीक्षा की तैयारी तक AI आधारित टूल्स छात्रों की पढ़ाई का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से उपयोग करने पर AI सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यक्तिगत, आसान और प्रभावी बना सकता है। हालांकि, इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
एडटेक कंपनी LEAD Group द्वारा किए गए छह महीने के एक अध्ययन के अनुसार, AI-सक्षम शिक्षण प्रणाली अपनाने वाले स्कूलों के छात्रों के सीखने के परिणाम पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर रहे।
कंपनी के अध्ययन में दावा किया गया कि पर्यावरण अध्ययन (EVS) में AI का उपयोग करने वाले छात्रों के अंकों में औसतन 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पारंपरिक तरीके से पढ़ने वाले छात्रों में यह सुधार 2 प्रतिशत रहा। इसी अध्ययन में गणित के औसत अंक 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत होने का भी दावा किया गया है।
हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे निष्कर्षों को संबंधित अध्ययन के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। AI का प्रभाव स्कूल, शिक्षक, छात्रों की पृष्ठभूमि और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
उच्च शिक्षा में भी AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय कॉलेजों के छात्र ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल परीक्षा की तैयारी, कोडिंग असाइनमेंट, वाइवा की तैयारी, प्रोजेक्ट लेखन और प्लेसमेंट इंटरव्यू की तैयारी के लिए कर रहे हैं।
AI की मदद से छात्र किसी विषय को सरल भाषा में समझ सकते हैं, कठिन प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं और अपने उत्तरों पर तुरंत फीडबैक भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय की बचत होती है और पढ़ाई अधिक व्यवस्थित हो जाती है। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI से मिले उत्तरों को अंतिम सत्य मानने के बजाय उन्हें किताबों और भरोसेमंद स्रोतों से अवश्य जांचना चाहिए।
भारत में कई स्टार्टअप भी AI आधारित अध्ययन प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Xerostate ने CBSE, JEE, NEET और CUET जैसे पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखकर AI आधारित अध्ययन प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसमें AI चैट, क्विज़, कमजोर विषयों की पहचान, स्टडी प्लान और पोमोडोरो टाइमर जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे छात्र अपनी पढ़ाई को बेहतर ढंग से व्यवस्थित कर सकें।
इसी तरह Adobe Student Spaces (Beta) छात्रों को अपने नोट्स या PDF अपलोड कर AI की मदद से फ्लैशकार्ड, क्विज़, माइंड मैप और सारांश तैयार करने की सुविधा देता है। इससे रिवीजन आसान होता है और समूह में पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी सहयोग मिलता है।
सरकार भी शिक्षा में AI के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। मई 2026 में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI पाठ्यक्रम कार्यबल के साथ बैठक कर उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, जिम्मेदार AI, व्यावहारिक शिक्षा और क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रमों पर चर्चा की।
वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप AI आधारित शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और व्यक्तिगत बनाने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।
AI के बढ़ते उपयोग के बावजूद कई चुनौतियां सामने हैं। मुंबई में हुए एक अध्ययन के अनुसार, 10 में से 8 छात्र AI टूल्स से परिचित हैं, लेकिन उनका उपयोग अभी भी मुख्य रूप से होमवर्क, अनुवाद और सामान्य प्रश्नों के समाधान तक सीमित है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि छात्र बिना समझे AI के उत्तरों पर निर्भर होने लगेंगे तो उनकी विश्लेषण क्षमता और आलोचनात्मक सोच प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा डिजिटल संसाधनों की असमान उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डेटा गोपनीयता, परीक्षा प्रणाली में बदलाव और शिक्षकों के प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों का समाधान भी आवश्यक है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि AI को केवल उत्तर देने वाले टूल के रूप में नहीं, बल्कि जिज्ञासा बढ़ाने, अवधारणाएं स्पष्ट करने और छात्रों को स्वयं सोचने के लिए प्रेरित करने वाले सहायक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
AI तभी फायदेमंद होगा, जब उसका उपयोग संतुलित तरीके से किया जाए। छात्र इन बातों का ध्यान रख सकते हैं-
Updated on:
24 Jul 2026 03:51 pm
Published on:
24 Jul 2026 03:51 pm
