
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT
Healthy Diet Crisis In India : देश में भूख और कुपोषण के आंकड़ों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन एक बड़ी चुनौती अब भी बरकरार है - पौष्टिक भोजन की बढ़ती कीमत। हालिया वैश्विक आकलनों के अनुसार भारत में करीब 52 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो नियमित रूप से स्वस्थ और संतुलित भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। यानी करोड़ों लोगों की थाली में पेट भरने लायक भोजन तो पहुंच जाता है, लेकिन शरीर के लिए जरूरी पोषण नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चावल या रोटी खाने से शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता। एक संतुलित आहार में अनाज के साथ दाल, दूध, फल, हरी सब्जियां, प्रोटीन और स्वस्थ वसा का होना भी जरूरी है। यही कारण है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं।
ICMR-National Institute of Nutrition (NIN) की Dietary Guidelines for Indians 2024 के अनुसार, "स्वस्थ जीवन के लिए भोजन में सभी प्रमुख फूड ग्रुप शामिल होने चाहिए। केवल कैलोरी नहीं, बल्कि पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, मिनरल और फाइबर भी जरूरी हैं।"
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि, "स्वस्थ आहार कुपोषण और गैर-संचारी रोगों (NCDs) से बचाव की बुनियाद है।"
आहार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के कारण लोग सबसे पहले फल, दूध, दाल, अंडे और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ कम कर देते हैं, जबकि यही चीजें शरीर को सबसे ज्यादा पोषण देती हैं।
एक सामान्य वयस्क व्यक्ति के दैनिक भोजन में निम्नलिखित चीजें शामिल होनी चाहिए।
| भोजन | क्या शामिल करें |
|---|---|
| सुबह | दूध, पोहा/ओट्स, एक फल |
| दोपहर | रोटी, दाल, सब्जी, सलाद, दही |
| शाम | भुना चना, स्प्राउट्स या मूंगफली |
| रात | रोटी, दाल/पनीर/सोया, सब्जी |
| डाइट | अनुमानित खर्च |
|---|---|
| दूध, दाल, फल, सब्जियां, अनाज, दही, पनीर/सोया | ₹160–230 प्रतिदिन |
इस डाइट में शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन मिलते हैं।
| डाइट | अनुमानित खर्च |
|---|---|
| दूध, अंडे, चिकन/मछली, सब्जियां, फल, अनाज | ₹180–280 प्रतिदिन |
इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन अपेक्षाकृत आसानी से मिल जाता है, लेकिन खर्च भी कुछ अधिक होता है।
हर व्यक्ति महंगी डाइट नहीं खरीद सकता। ऐसे में पोषण विशेषज्ञ कुछ स्थानीय और सस्ते विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं।
| डाइट | अनुमानित खर्च |
|---|---|
| रोटी, दाल, मौसमी सब्जी, दूध, केला, भुना चना, सोया बड़ी | ₹90–115 प्रतिदिन |
| डाइट | अनुमानित खर्च |
|---|---|
| अंडे, रोटी, दाल, सब्जी, केला, भुना चना | ₹100–130 प्रतिदिन |
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार महंगे सुपरफूड खरीदना जरूरी नहीं है। कई स्थानीय खाद्य पदार्थ कम कीमत में भरपूर पोषण देते हैं।
| खाद्य पदार्थ | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| भुना चना (100 ग्राम) | ₹10–15 |
| मूंगफली (50 ग्राम) | ₹8–12 |
| सोया बड़ी (50 ग्राम) | ₹8–12 |
| अंडा (1) | ₹7–10 |
| केला | ₹5–8 |
| दाल (60–70 ग्राम) | ₹15–20 |
| दूध (200 ml) | ₹15–18 |
| मौसमी सब्जियां | ₹15–25 प्रतिदिन |
खाद्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में फल, सब्जियां, दूध, दाल और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर चावल और गेहूं जैसी सब्सिडी वाली चीजें अपेक्षाकृत सस्ती हैं। नतीजा यह है कि कई परिवार पेट तो भर लेते हैं, लेकिन उनकी थाली में पोषण की कमी रह जाती है।
ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है, क्योंकि आय का बड़ा हिस्सा किराया, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च हो जाता है। बची हुई राशि में पौष्टिक भोजन खरीदना आसान नहीं होता।
अगर लंबे समय तक संतुलित भोजन न मिले तो शरीर में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं -
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित बजट में भी कुछ आसान उपाय अपनाकर बेहतर पोषण पाया जा सकता है।
52 करोड़ भारतीयों का पौष्टिक भोजन से वंचित होना सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती है। जब तक हर व्यक्ति की थाली में अनाज के साथ पर्याप्त दाल, दूध, फल, सब्जियां और प्रोटीन नहीं पहुंचेगा, तब तक कुपोषण और उससे जुड़ी बीमारियों पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए दैनिक आहार और अनुमानित खर्च ICMR (Indian Council of Medical Research), WHO की पोषण संबंधी सिफारिशों, पोषण विशेषज्ञों की सलाह और भारत के औसत खुदरा बाजार भाव के आधार पर तैयार किए गए हैं। वास्तविक खर्च शहर के स्थानीय बाजार, मौसम, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और व्यक्ति की खान-पान की पसंद के अनुसार कम या अधिक हो सकता है। इसके अलावा, किसी व्यक्ति की उम्र, लिंग, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य स्थिति और आय के आधार पर उसकी पोषण संबंधी जरूरतें और आहार पर होने वाला खर्च भी अलग-अलग हो सकता है। इसलिए यहां दिए गए खर्च को एक अनुमान (Indicative Cost) के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सभी लोगों पर समान रूप से लागू होने वाले निश्चित खर्च के रूप में।
Updated on:
24 Jul 2026 12:17 pm
Published on:
24 Jul 2026 12:09 pm
