Patrika+

अगस्त क्रांति दिवस: वह रात जब गांधी ने कहा- ‘करो या मरो’, सुबह होते ही पूरा देश बन गया आंदोलन

August Kranti: 8 अगस्त 1942 को गांधीजी के ‘करो या मरो’ आह्वान ने भारत छोड़ो आंदोलन को नई दिशा दी। नेताओं की गिरफ्तारी के बाद युवाओं, महिलाओं और आम जनता ने संघर्ष की कमान संभाली।
6 min read
Aug 08, 2026
Quit India Movement News
8 अगस्त 1942 को गांधीजी के ‘करो या मरो’ आह्वान से आजादी की लड़ाई ने निर्णायक मोड़ लिया। ( विजुअल: ChatGPT)

August Kranti : 8 अगस्त 1942 की वह शाम… मुंबई का आसमान शायद बाकी दिनों जैसा ही था। लेकिन जमीन पर हिंदुस्तान करवट ले रहा था। ब्रिटिश हुकूमत को अंदाजा था कि कांग्रेस की बैठक में कुछ बड़ा होने वाला है। हजारों लोग मुंबई के उस मैदान के आसपास जमा थे, जहां भारत के भविष्य का फैसला लिखा जाने वाला था। उस दिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। महात्मा गांधी ने देशवासियों से साफ कहा-‘करो या मरो।’ यही वह क्षण था, जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ दिया। अगले दिन सुबह तक गांधीजी समेत कांग्रेस के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों को लगा कि नेतृत्व को जेल में डालकर आंदोलन को दबा दिया जाएगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा।

नेताओं को जेल मिली, तो आंदोलन जनता के हाथ में चला गया।

और यही अगस्त क्रांति की सबसे बड़ी कहानी है।

8 अगस्त की रात: फैसला सिर्फ कांग्रेस का नहीं, पूरे देश का था

1942 में दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की आग में जल रही थी। ब्रिटेन युद्ध में उलझा था और भारत बिना भारतीय जनता की सहमति के ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का हिस्सा बना हुआ था। क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद भारतीय नेतृत्व में यह भावना मजबूत हो गई कि अब अंग्रेजों से केवल वादे नहीं, बल्कि भारत छोड़ने की स्पष्ट मांग करनी होगी। 14 जुलाई 1942 को कांग्रेस कार्यसमिति ने ब्रिटिश सत्ता से भारत छोड़ने की मांग वाला प्रस्ताव स्वीकार किया था। इसके बाद 8 अगस्त को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ऐतिहासिक बैठक हुई। उसी बैठक में ‘Quit India’ प्रस्ताव पारित हुआ।

गांधीजी ने अपने भाषण में देश को एक ऐसा संदेश दिया, जो आने वाले वर्षों तक स्वतंत्रता संघर्ष की पहचान बन गया—करो या मरो।

यह कोई सामान्य राजनीतिक नारा नहीं था। इसके पीछे गांधीजी का स्पष्ट विचार था कि भारत अब ब्रिटिश शासन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

फिर आई 9 अगस्त की सुबह… और अंग्रेजों ने कर दिया सबसे बड़ा दांव

8 अगस्त की रात आंदोलन का ऐलान हुआ और 9 अगस्त की सुबह ब्रिटिश सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी।

गांधीजी गिरफ्तार कर लिए गए। कांग्रेस के कई बड़े नेता भी हिरासत में ले लिए गए। गांधीजी को पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद किया गया, जहां वे अगस्त 1942 से मई 1944 तक रहे।

ब्रिटिश सरकार की रणनीति सीधी थी—नेताओं को पकड़ो और आंदोलन खत्म करो।

लेकिन अंग्रेज एक बात समझ नहीं पाए।

1942 तक आजादी की मांग केवल कुछ नेताओं की आवाज नहीं रह गई थी। यह गांवों, कस्बों, शहरों, कॉलेजों और सामान्य परिवारों तक पहुंच चुकी थी।

इसलिए नेतृत्व जेल में गया, लेकिन आंदोलन बाहर चलता रहा।

जब विद्यार्थी बने आंदोलन की नई ताकत

अगस्त क्रांति की सबसे दिलचस्प तस्वीर यह है कि इसमें केवल बड़े नेता ही नहीं थे। बड़ी संख्या में विद्यार्थी, किसान, मजदूर, महिलाएं और आम नागरिक भी आगे आए।

कई जगहों पर तिरंगा फहराया गया। सरकारी संस्थानों के सामने प्रदर्शन हुए। ब्रिटिश प्रशासन के खिलाफ पर्चे बांटे गए। भूमिगत नेटवर्क बनाए गए और गिरफ्तार नेताओं के संदेश जनता तक पहुंचाने की कोशिश हुई।

सरकारी अभिलेखों में ऐसे अनेक गुमनाम लोगों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपनी जान तक गंवा दी।

असम के ढेकियाजुली में तिरंगा फहराने के लिए निकले जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई। दमिला देवी गंभीर रूप से घायल हुईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

गुजरात के खेड़ा जिले में मनुभाई पटेल प्रदर्शन में तिरंगा लेकर शामिल हुए और पुलिस गोलीबारी में मारे गए।

नंदुरबार में छात्र नेता श्रीश कुमार जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान वे गोली लगने से शहीद हुए। सरकारी दस्तावेजों में दर्ज विवरण के मुताबिक वे लड़कियों को गोली से बचाने की कोशिश कर रहे थे।

इन नामों को इतिहास की किताबों में उतनी जगह नहीं मिली, जितनी बड़े नेताओं को मिली। लेकिन अगस्त क्रांति की असली ताकत इन्हीं हजारों अनाम चेहरों में छिपी थी।

महात्मा गांधी की एक आवाज पर पूरा देश बोल उठा अंग्रेजों भारत छोड़ो। (विजुअल: Google Gemini AI)

महिलाओं ने भी संभाली आंदोलन की कमान

अगस्त क्रांति सिर्फ पुरुषों का आंदोलन नहीं था।

जब कांग्रेस के शीर्ष नेता गिरफ्तार हो गए, तब कई महिलाओं ने खुले और भूमिगत दोनों स्तरों पर आंदोलन को आगे बढ़ाया।

मुंबई में अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त 1942 को गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर आंदोलन को प्रतीकात्मक ऊर्जा दी। यह घटना अगस्त क्रांति की सबसे यादगार तस्वीरों में शामिल हो गई।

उधर उषा मेहता और उनके साथियों ने भूमिगत रेडियो के जरिए ब्रिटिश सेंसरशिप को चुनौती दी। इस रेडियो से आंदोलनकारियों और जनता तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।

यानि अंग्रेजों ने अखबारों पर पहरा लगाया, नेताओं को जेल भेजा और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई—लेकिन आवाज को पूरी तरह बंद नहीं कर पाए।

एक ऐसा आंदोलन जिसमें ‘आम आदमी’ ही नेता बन गया

अगस्त क्रांति की सबसे बड़ी विशेषता यही थी।

इससे पहले के आंदोलनों में गांधी, नेहरू, पटेल और दूसरे बड़े नेताओं की भूमिका केंद्रीय रही थी। लेकिन 1942 में परिस्थितियां अलग थीं।

नेतृत्व का बड़ा हिस्सा जेल में था।

ऐसे में गांव का शिक्षक, कॉलेज का विद्यार्थी, किसान, डाक कर्मचारी, मजदूर और स्थानीय कार्यकर्ता अपने स्तर पर निर्णय लेने लगे।

कहीं सरकारी दफ्तरों का बहिष्कार हुआ, कहीं जुलूस निकले, कहीं तिरंगा फहराया गया और कहीं भूमिगत तरीके से आंदोलन को जिंदा रखा गया।

ब्रिटिश सरकार ने दमन किया। गिरफ्तारियां हुईं, लाठियां चलीं और कई जगह गोलीबारी भी हुई।

लेकिन आंदोलन का संदेश देश के दूर-दराज हिस्सों तक पहुंच चुका था।

गांधी जेल में थे, लेकिन आंदोलन उनके नियंत्रण से भी आगे निकल गया

यह अगस्त क्रांति का एक जटिल पहलू भी है।

गांधीजी अहिंसा के सिद्धांत पर अडिग थे। लेकिन नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देश के कई हिस्सों में आंदोलन उग्र रूप ले गया। सरकारी संपत्तियों पर हमले, संचार व्यवस्था को बाधित करने और रेल लाइनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं भी हुईं।

गांधीजी ने हिंसा और तोड़फोड़ को अपने अहिंसक आंदोलन का हिस्सा नहीं माना। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर उपलब्ध उनके लेखन में रेलवे तोड़फोड़ जैसी कार्रवाइयों को अहिंसा के अनुरूप नहीं माना गया है।

फिर भी इतिहास के नजरिए से देखें तो 1942 ने ब्रिटिश शासन को यह संदेश दे दिया था कि अब भारत को लंबे समय तक राजनीतिक रूप से नियंत्रित करना आसान नहीं होगा।

आगा खान पैलेस की दीवारों के अंदर भी चल रही थी एक दूसरी कहानी

अगस्त क्रांति की कहानी सिर्फ सड़कों पर नहीं लिखी गई।

पुणे के आगा खान पैलेस में गांधीजी कैद थे। उनके साथ कस्तूरबा गांधी और उनके करीबी सहयोगी महादेव देसाई भी थे।

15 अगस्त 1942 को महादेव देसाई का वहीं निधन हो गया। बाद में 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी ने भी उसी परिसर में अंतिम सांस लीं।

गांधीजी ने 1943 में 21 दिन का उपवास भी किया। अंततः उन्हें स्वास्थ्य कारणों से 6 मई 1944 को रिहा किया गया।

इस तरह अगस्त क्रांति केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं थी। इसके भीतर व्यक्तिगत बलिदान, जेल, मृत्यु, उपवास और असहनीय मानसिक पीड़ा की भी एक लंबी कहानी छिपी है।

क्या 1942 में ही आजादी मिल गई थी?

नहीं।

भारत को स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को मिली।

लेकिन अगस्त क्रांति ने स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतिम निर्णायक दौर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1942 के बाद ब्रिटिश सरकार को यह अहसास और गहरा हुआ कि भारत में अपनी सत्ता को अनिश्चितकाल तक बनाए रखना संभव नहीं होगा।

1942 का आंदोलन दबाया गया, लेकिन आजादी की इच्छा नहीं दबाई जा सकी।

यही इसकी सबसे बड़ी सफलता थी।

आज 8 अगस्त क्यों याद रखना जरूरी है?

आज की पीढ़ी के लिए अगस्त क्रांति दिवस केवल एक ऐतिहासिक तारीख नहीं है।

यह उस सवाल की याद दिलाता है कि जब कोई व्यवस्था लंबे समय तक लोगों की इच्छा के खिलाफ चलती है, तो बदलाव की मांग धीरे-धीरे पूरे समाज की आवाज बन सकती है।

8 अगस्त 1942 को एक प्रस्ताव पारित हुआ था।

9 अगस्त को नेता जेल चले गए।

लेकिन उसके बाद देश के हजारों सामान्य लोगों ने आंदोलन की मशाल संभाल ली।

यही वजह है कि अगस्त क्रांति का इतिहास केवल गांधी, नेहरू या कांग्रेस का इतिहास नहीं है।

यह उन विद्यार्थियों का इतिहास है जिन्होंने पर्चे बांटे।

उन महिलाओं का इतिहास है जिन्होंने तिरंगा उठाया।

उन किसानों का इतिहास है जिन्होंने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी।

उन युवाओं का इतिहास है जिन्होंने गोली के सामने झुकने से इनकार कर दिया।

और उन अनगिनत परिवारों का इतिहास है जिन्होंने अपने किसी सदस्य को जेल, लाठी या गोली के बीच खो दिया।

8 अगस्त 1942 को गांधीजी ने ‘करो या मरो’ कहा था।

लेकिन उस पुकार को इतिहास ने एक और अर्थ दिया—

नेता गिरफ्तार हो सकते हैं, लेकिन आजादी की आवाज को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

इसीलिए अगस्त क्रांति दिवस आज भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन निर्णायक पलों में गिना जाता है, जब एक देश ने पहली बार नहीं, बल्कि आखिरी और सबसे स्पष्ट शब्दों में कहा था-अब अंग्रेजों, भारत छोड़ो।

Updated on:
08 Aug 2026 12:18 pm
Published on:
08 Aug 2026 12:18 pm