Patrika+

शरीर में गांठ दिखे तो घबराएं नहीं! हर Lump कैंसर नहीं होता, जानें क्या है वजह

हर गांठ कैंसर नहीं होती! जानिए किस आकार और बनावट की गांठ सुरक्षित होती है और किन लक्षणों के दिखने पर बायोप्सी या सोनोग्राफी टेस्ट कराना बेहद जरूरी है।
4 min read
Aug 11, 2026
CANCER
लंप अलर्ट कब सामान्य और कब कैंसर का संकेत? (AI)

शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक कोई गांठ (Lump) दिखाई देना या महसूस होना किसी को भी चिंता में डाल सकता है। अधिकतर लोगों के मन में पहला ख्याल कैंसर का ही आता है। हालांकि, मेडिकल साइंस के नज़रिये से देखा जाए तो शरीर में बनने वाली हर गांठ खतरनाक या कैंसरयुक्त (Malignant) नहीं होती। मानव शरीर में बनने वाली 80 से 90 प्रतिशत गांठें गैर-कैंसरयुक्त (Benign) होती हैं, जो सिस्ट, लाइपोमा (चर्बी की गांठ), या किसी सामान्य इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं।

आम इंसान यह कैसे समझे कि कौन सी गांठ सामान्य है और कौन सी गंभीर?

किसी भी गांठ की गंभीरता को आंकने के लिए तीन मुख्य बातें सबसे महत्वपूर्ण होती हैं । गांठ का आकार (Size), उसका स्थान (Location), और समय के साथ उसमें आने वाले बदलाव (Changes over time)। यदि इन तीनों पहलुओं को सही समय पर समझ लिया जाए, तो किसी भी गंभीर बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही की जा सकती है।

आकार कितना बड़ा

गांठ के आकार और उसकी बनावट से उसकी प्रकृति का काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • मटर के दाने से बड़ा आकार: यदि गांठ का आकार 2 सेंटीमीटर (लगभग एक मटर के दाने या गोल्फ बॉल) से बड़ा है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। छोटी गांठें अक्सर इंफेक्शन या ब्लॉक ग्लैंड्स के कारण होती हैं, लेकिन बड़ी गांठों की डॉक्टरी जांच अनिवार्य होती है।
  • सख्त बनावट (Hard Texture): छूने पर गांठ कैसी महसूस होती है, यह बेहद अहम है। गैर-कैंसरयुक्त गांठें आमतौर पर नरम, मुलायम और स्पंज जैसी होती हैं। इसके विपरीत, कैंसरयुक्त गांठ छूने में बहुत सख्त (पत्थर जैसी) होती है।
  • गतिशीलता (Mobility): यदि आप गांठ को उंगलियों से दबाते हैं और वह त्वचा के नीचे आसानी से हिलती-डुलती है (Moveable), तो इसके सामान्य होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन अगर गांठ अपनी जगह पर फिक्स (Non-moveable) है और दबाने पर बिल्कुल नहीं हिलती, तो यह चिंता का विषय है।

स्थान (Location): शरीर के किन हिस्सों की गांठ पर रखें विशेष नजर?

शरीर के कुछ संवेदनशील हिस्से ऐसे हैं जहां गांठ दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए

  • स्तन और बगल (Breast and Armpit): महिलाओं और पुरुषों दोनों में स्तन या बगल के हिस्से में गांठ का बनना ब्रेस्ट कैंसर या लिम्फ नोड में सूजन का संकेत हो सकता है।
  • गर्दन और थायरॉइड क्षेत्र (Neck and Thyroid): गर्दन में बनने वाली गांठें थायरॉइड ग्रंथि में विकार या गले के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती हैं।
  • जांघ और बगल के जोड़ (Groin Area): इन हिस्सों में लिम्फ नोड्स होते हैं। यदि यहां लंबे समय तक बिना किसी इंफेक्शन के सूजन बनी रहे, तो जांच जरूरी है।
  • गहराई में स्थित गांठें (Deep Tissue Lumps): त्वचा के ठीक नीचे की बजाय मांसपेशियों के गहराई में बनी गांठें अक्सर अधिक ध्यान देने योग्य होती हैं।

समय के साथ बदलाव, सबसे बड़ा वॉर्निंग साइन

तेजी से बढ़ना: यदि कोई गांठ कुछ ही हफ़्तों या 1-2 महीनों के भीतर आकार में दोगुनी हो जाए, तो यह कोशिका विभाजन (Cell Division) के तेजी से होने का संकेत है। कैंसर की गांठें आमतौर पर बिना रुके तेज़ी से बढ़ती हैं।

  • त्वचा में परिवर्तन: गांठ के ऊपर की त्वचा का लाल पड़ना, त्वचा में खिंचाव आना, संतरे के छिलके जैसी बनावट (Orange peel texture) होना या वहाँ कोई घाव (Ulcer) बन जाना गंभीर लक्षण हैं।
  • आकृति में बदलाव: गांठ के किनारे (Borders) यदि असमान या खुरदुरे होने लगें, तो तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट को दिखाएं।

Red Flag Symptoms : अन्य संकेत

केवल गांठ ही नहीं, बल्कि उसके साथ शरीर में दिखने वाले अन्य लक्षण भी बीमारी की गंभीरता को दर्शाते हैं। यदि गांठ के साथ नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो स्थिति आपातकालीन हो सकती है:

  • बिना दर्द वाली गांठ: आम धारणा है कि दर्द देने वाली गांठ खतरनाक होती है, जबकि हकीकत इसके उलट है। कैंसर की शुरुआती गांठें अक्सर दर्द रहित (Painless) होती हैं। दर्द वाली गांठें आमतौर पर इंफेक्शन या सूजन के कारण होती हैं।
  • अकारण वजन घटना: बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के शरीर का वजन तेजी से कम होना।
  • रात में पसीना आना और बुखार: बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार हल्का बुखार रहना और रात में कपड़े भीग जाने जितना पसीना आना।
  • अत्यधिक थकान: पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना।

Diagnosis Process: निदान और जांच

यदि आपको शरीर में कोई संदिग्ध गांठ महसूस होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करने पर वे निम्नलिखित जांचों की सलाह दे सकते हैं:

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): इससे यह पता चलता है कि गांठ में द्रव (Fluid) भरा है या वह ठोस (Solid) है।
  • मैमोग्राफी (Mammography): स्तन की गांठों के सटीक मूल्यांकन के लिए।
  • एमआरआई या सीटी स्कैन (MRI/CT Scan): गांठ के सटीक आकार और आसपास के ऊतकों (Tissues) में उसके फैलाव को समझने के लिए।
  • बायोप्सी या FNAC: गांठ से एक छोटा सा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है, जिससे 100% स्पष्ट होता है कि गांठ कैंसरयुक्त है या नहीं।

शरीर में गांठ का होना डरने का कारण नहीं, बल्कि सतर्क होने का संकेत है। समय पर की गई जांच न केवल आपके मन के डर को दूर करती है, बल्कि यदि कोई गंभीर बीमारी हो भी, तो शुरुआती चरण में उसका इलाज 100% संभव हो जाता है। यदि आपके या आपके किसी परिचित के शरीर में कोई ऐसी गांठ है जो 2 से 3 हफ़्तों से अधिक समय से बनी हुई है, आकार में बढ़ रही है और छूने में सख्त है, तो बिना समय गवाएं किसी योग्य ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लें। स्व-चिकित्सा (Self-medication) या घरेलू नुस्खों के चक्कर में समय बर्बाद करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

Updated on:
11 Aug 2026 12:12 pm
Published on:
11 Aug 2026 12:12 pm