
Cancer Research : कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर की अपनी ही कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होती है। अब तक वैज्ञानिक यही मानते थे कि डीएनए में होने वाले नुकसान (DNA Damage) और उत्परिवर्तन (Mutations) के कारण कैंसर होता है। लेकिन यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय (Hebrew University of Jerusalem) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। हाल ही में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं खुद को तेजी से बढ़ाने और विकसित करने के लिए जानबूझ कर अपने ही डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि कोई बीमारी खुद के आनुवंशिक पदार्थ (Genetic Material) को नुकसान क्यों पहुंचाएगी? लेकिन कैंसर कोशिकाओं का यह 'खतरनाक खेल' उन्हें जीवित रखने, तेजी से फैलने और दवाओं (इलाज) से बचाने में मदद करता है। आइए इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।
सामान्य कोशिकाएं तब विभाजित होती हैं जब शरीर को उनकी जरूरत होती है, और जब उनका डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो वे अपनी वृद्धि रोक देती हैं या खुद को नष्ट कर लेती हैं। लेकिन कैंसर कोशिकाएं अलग तरह से काम करती हैं:
अत्यधिक सक्रियता (Overactivity): कैंसर कोशिकाओं का एकमात्र लक्ष्य तेजी से विभाजित होना और ट्यूमर को बड़ा करना होता है। इसके लिए वे वृद्धि से जुड़े कुछ विशिष्ट जीनों (Growth Genes) को 24 घंटे और पूरी क्षमता के साथ चालू (Active) रखती हैं।
सुपर-एनहांसर (Super-Enhancers) की भूमिका: डीएनए के अंदर कुछ विशेष नियंत्रण क्षेत्र होते हैं जिन्हें 'सुपर-एनहांसर' कहा जाता है। ये मास्टर स्विच की तरह काम करते हैं जो कैंसर को बढ़ावा देने वाले जीन्स को बहुत तेज गति से चलाती हैं।
डीएनए पर दबाव (DNA Stress): जब कैंसर कोशिकाएं इन सुपर-एनहांसर के माध्यम से जीनों को जबरन बहुत तेज गति से चलाती हैं, तो उस हिस्से के डीएनए पर भारी शारीरिक दबाव पड़ता है। इस अत्यधिक तनाव के कारण डीएनए का धागा टूट (Breakdown) जाता है।
कैंसर की कोशिकाओं पर नया शोध किया गया है। ( फोटो: Google Gemini AI. )
जब डीएनए में दरारें आती हैं, तो कोशिका के अंदर एक 'प्राकृतिक अलार्म' बजता है। कैंसर कोशिकाएं तुरंत अपने मरम्मत तंत्र (Repair Mechanism) को सक्रिय कर देती हैं और उस टूटे हुए डीएनए को फिर से जोड़ देती हैं।
अल्पावधि (Short-term) में जीवित रहना: डीएनए की तुरंत मरम्मत करके कैंसर कोशिका खुद को मरने से बचा लेती है और अपनी वृद्धि जारी रखती है।
दीर्घकालिक (Long-term) अनुकूलन और बदलाव: जब डीएनए बार-बार टूटता है और बार-बार उसकी मरम्मत होती है, तो मरम्मत करने वाले तंत्र से छोटी-मोटी गलतियां (Errors) हो जाती हैं। इन गलतियों की वजह से उस क्षेत्र में नए उत्परिवर्तन (Mutations) जमा होने लगते हैं।
यह वैसा ही है जैसे किसी गाड़ी को लगातार उसकी क्षमता से ज्यादा तेज रफ्तार पर चलाया जाए। बार-बार गाड़ी में खराबी आएगी और आप उसे ठीक करेंगे, लेकिन हर बार मरम्मत के बाद गाड़ी के अंदरूनी ढांचे में कुछ छोटे-छोटे बदलाव आ जाएंगे। कैंसर कोशिकाओं के लिए ये बदलाव (उत्परिवर्तनों) उन्हें अधिक आक्रामक बनने, शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने और कीमोथेरेपी जैसी दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) विकसित करने में मदद करते हैं।
रिसर्चर्स ने जीनोम-मैपिंग (Genome-Mapping) तकनीक का इस्तेमाल करके कैंसर कोशिकाओं के पूरे डीएनए का एक विस्तृत नक्शा तैयार किया। उन्होंने देखा कि डीएनए में दोहरे-कणों में टूटन (Double-Strand Breaks) कहाँ-कहाँ हो रही है। दोहरे-कणों का टूटना डीएनए क्षति का सबसे गंभीर रूप माना जाता है। नक्शे से साफ हुआ कि यह टूट-फूट डीएनए में कहीं भी बेतरतीब (Random) तरीके से नहीं हो रही थी। यह टूट-फूट ठीक उन्हीं जगहों पर केंद्रित थी जहाँ 'सुपर-एनहांसर' सबसे ज्यादा सक्रिय थे। इससे यह साबित हुआ कि जीनों का अत्यधिक उपयोग ही डीएनए के टूटने का असली कारण है।
इस खोज की सबसे अच्छी और उम्मीद जगाने वाली बात यह है कि इससे कैंसर के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मुख्य शोधकर्ता ओसामा हिदमी का कहना है, 'कैंसर कोशिकाएं बढ़ने के लिए डीएनए के इन उच्च तनाव वाले क्षेत्रों पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं। क्योंकि वे पूरी तरह से इस प्रक्रिया पर निर्भर हैं, इसलिए वे इन्हीं जगहों पर सबसे ज्यादा कमजोर (Vulnerable) भी हैं।'
सुपर-एनहांसर को टारगेट करना: वैज्ञानिक ऐसी नई दवाएं बना सकते हैं जो सुपर-एनहांसर की अत्यधिक गतिविधि को रोक दें, जिससे कैंसर कोशिकाओं की तेजी से बढ़ने की क्षमता खत्म हो जाएगी।
डीएनए मरम्मत को रोकना: यदि कैंसर कोशिकाएं अपने टूटे हुए डीएनए की मरम्मत खुद करती हैं, तो ऐसी थेरेपी विकसित की जा सकती है जो ट्यूमर को डीएनए सुधारने से रोक दे। मरम्मत न होने पर कैंसर कोशिकाएं अपने ही बनाए दबाव से नष्ट हो जाएंगी।
शोध का स्रोत (Source): यरूशलेम का हिब्रू विश्वविद्यालय (The Hebrew University of Jerusalem)
जर्नल संदर्भ: यह अध्ययन प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका 'साइंस एडवांसेज' (Science Advances) में प्रकाशित हुआ है।
मुख्य शोधकर्ता (Research Team):
प्रोफेसर रामी अकेलान (Prof. Rami Aqeilan) - जिनके मार्गदर्शन में यह शोध पूरा हुआ।
ओसामा हिदमी (Osama Hidmi) — हिब्रू यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र और इस अध्ययन के मुख्य लेखक।
अन्य सह-लेखक: डायला शतलेह, सारा ओस्टर फ्लेशमैन और जोनाथन मोनिन।
बहरहाल,यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय का यह शोध हमें दिखाता है कि कैंसर कितना चालाक और अनुकूलनशील (Adaptive) है। वह अपनी वृद्धि के लिए अपने ही डीएनए को जोखिम में डालता है और उससे होने वाले म्यूटेशन का फायदा उठाकर और अधिक ताकतवर बन जाता है। लेकिन, इस प्रक्रिया को समझकर वैज्ञानिकों ने कैंसर की एक बहुत बड़ी कमजोरी ढूंढ ली है। ट्यूमर का खुद को लगातार आगे बढ़ाने का जुनून ही भविष्य में उसे नष्ट करने का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।