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बच्चों को जरूर सिखाएं ये 10 सफेद झूठ! जानिए इनके पीछे का मनोविज्ञान

Child Safety 10 Lies Hindi: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा कभी भी झूठ न बोले, कभी बोल भी दे तो वे उसके झूठ पर नाराज होने का नाटक करते हैं, ताकि वो सच बताए, लेकिन मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि डेली लाइफ में नहीं, लेकिन कुछ मौके ऐसे हैं, जिनके लिए बच्चों को झूठ बोलना बेहद जरूरी है... जानिए क्या हैं वो सफेद झूठ जो बच्चों के लिए बन जाएंगे सुरक्षा कवच?
2 min read
Aug 06, 2026
Child Safety Tips
Child Safety Tips: सच बोलने से ज्यादा बच्चों को सुरक्षा सिखाना जरूरी, इसलिए जरूर सिखाएं ये 10 सफेद झूठ। (AI Creative)

Child Safety 10 Lies Hindi: बचपन से हम सुनते आए हैं कि 'सच बोलना सबसे अच्छी आदत है।' लेकिन क्या आप सोचते हैं कि कई बार और कई परिस्थितियों में पूरी सच्चाई बोलना सही है? मनोवैज्ञानिकों कहते हैं कि इसका जवाब हमेशा 'हां' नहीं होता। कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहां एक छोटा-सा झूठ बच्चे को खतरे, असहज स्थिति या अनजान लोगों से बचा सकता है। इसे झूठ नहीं, बल्कि 'सेफ्टी लाइ' (Safety Lie) कहा जाता है। देशभर में हर साल लापता होते सैंकड़ों बच्चों की खबरें भयावह हैं और ऐसे झूठ बोलना जरूरी हो जाते हैं। आप भी जानें बच्चों को कौन से 10 झूठ सिखाना जरूरी?

1- 'मम्मी-पापा घर पर हैं।'

-अगर बच्चा घर पर अकेला हो और कोई अजनबी पूछे।

2- 'मुझे लेने मेरे पापा/मम्मी बस आने वाले हैं।'

- स्कूल, पार्क या बस स्टॉप पर किसी अजनबी के कहने पर कि वो उन्हें घर छोड़ देगा।

3-'नहीं चाहिए, मेरे पास पहले से है।'

- किसी अजनबी के खाने, खिलौने या गिफ्ट के लालच पर।

4- 'मुझे नहीं पता।'

- घर का पता, दिनचर्या या परिवार की निजी जानकारी पूछे जाने पर।

5- 'मैंने अपने घरवालों को बता दिया है।'

- यदि कोई व्यक्ति पीछा कर रहा हो या असहज महसूस करा रहा हो।

6- मेरे पास फोन/जीपीएस है, सबको मेरी लोकेशन पता है।'

-किसी अजनबी को यह जताने के लिए कि बच्चा अकेला और असहाय नहीं है।

7- 'मेरे अंकल/टीचर यहीं पास में हैं।'

-सार्वजनिक जगह पर यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति बातचीत बढ़ाने की कोशिश करे।

8- 'मैं अभी जल्दी में हूं।'

- जब कोई अनजान व्यक्ति बातचीत या साथ चलने का दबाव बनाए।

9- 'ठीक है, मैं किसी को नहीं बताऊंगा।'

- केवल उस समय जब बच्चा खुद को सुरक्षित निकालना चाहता हो; बाद में तुरंत माता-पिता या भरोसेमंद बड़े को पूरी बात बतानी चाहिए।

10- 'मुझे आपकी मदद नहीं चाहिए।'

- यदि कोई अनजान व्यक्ति बिना मांगे मदद करने या कहीं ले जाने की कोशिश करे।

बच्चों की सुरक्षा क्यों है बड़ा सवाल?

  • एनसीआरबी और भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2023 में भारत में 91,296 बच्चे लापता दर्ज किए गए। यानी औसतन करीब 250 बच्चे प्रतिदिन लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इन लापता बच्चों में लगभग 75% लड़कियां थीं। किशोर (16–18 वर्ष) सबसे ज्यादा प्रभावित आयु वर्ग रहा।
  • 2022 में बच्चों के अपहरण/अगवा (Kidnapping And Abduction) के हजारों मामले NCRB ने दर्ज किए।
  • भारत सरकार का TrackChild पोर्टल और राज्यों की पुलिस लापता बच्चों की तलाश और पुनर्वास के लिए मिलकर काम करते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को 'सेफ्टी स्किल्स' जैसे अजनबियों से दूरी, निजी जानकारी साझा न करना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए जवाब देना सिखाना जोखिम कम करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब देश में औसतन हर दिन लगभग 250 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होती हो, तब बच्चों को 'सुरक्षा कवच वाले जवाब' सिखाना केवल पैरेंटिंग टिप नहीं, बल्कि सुरक्षा की तैयारी भी माना जा सकता है।

अब आपको समझ आ गया होगा कि बच्चों को सच बोलना सिखाना जितना जरूरी है, उससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है उन्हें सुरक्षित रहना सिखाना। सही समय पर बोला गया 'सेफ्टी लाइ' उन्हें किसी अनहोनी या खतरे से बचा सकता है, जबकि सामान्य जीवन में सच और यकीन ही उनके व्यक्तित्व की सबसे मजबूत नींव बनते हैं।

Updated on:
06 Aug 2026 12:05 pm
Published on:
06 Aug 2026 12:04 pm