
नेक्रोटाइज़िंग फेशियाइटिस (Necrotizing Fasciitis), जिसे आम भाषा में 'फ्लेश-ईटिंग डिसीज़' या 'मांस खाने वाली बीमारी'
कहा जाता है, मानव शरीर को प्रभावित करने वाले सबसे घातक और दुर्लभ बैक्टीरियल इंफेक्शंस में से एक है। यद्यपि नाम से ऐसा प्रतीत हो सकता है कि कोई बैक्टीरिया सीधे तौर पर शरीर के मांस को खा रहा है, लेकिन वास्तविक में यह कुछ अलग तरह से घटता है। यह बैक्टीरिया शरीर के भीतर पहुंचकर ऐसे हानिकारक टॉक्सिन्स (ज़हरीले पदार्थ) छोड़ता है, जो आसपास के ऊतकों (tissues) और मांसपेशियों की परत को नष्ट कर देते हैं। समय पर पहचान और तुरंत इलाज न मिलने पर यह बीमारी कुछ ही घंटों में जानलेवा साबित हो सकती है।
शरीर में त्वचा के ठीक नीचे एक महीन और मजबूत परत होती है, जिसे 'फेशिया' (Fascia) कहा जाता है। यह परत मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को आपस में जोड़कर रखती है। जब बैक्टीरिया इस परत तक पहुंचते हैं, तो वे बहुत तेज़ी से फैलते हैं।
यह इंफेक्शन रक्त के प्रवाह को बाधित कर देता है, जिससे प्रभावित हिस्से तक ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप, उस हिस्से की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। चिकित्सा विज्ञान में कोशिकाओं के इस प्रकार नष्ट होने की प्रक्रिया को 'नेक्रोसिस' (Necrosis) कहा जाता है, इसलिए इस बीमारी को नेक्रोटाइज़िंग फेशियाइटिस नाम दिया गया है।
यह बीमारी मुख्य रूप से निम्नलिखित बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है:
सामान्य और स्वस्थ त्वचा बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है। हालांकि, यदि त्वचा पर कोई छोटा सा घाव भी हो, तो ये बैक्टीरिया आसानी से शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं। प्रवेश के प्रमुख माध्यम निम्न हैं:
कट, खरोंच या शेविंग के दौरान लगी मामूली चोट
यद्यपि यह बीमारी किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन कमजोर इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। निम्न स्थितियों में सतर्कता बरतना आवश्यक है:
डायबिटीज (मधुमेह) के मरीज
इस बीमारी के लक्षण बहुत तेज़ी से विकसित होते हैं। इसकी समय पर पहचान ही मरीज की जान बचा सकती है।
नेक्रोटाइज़िंग फेशियाइटिस एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसका इलाज केवल अस्पतालों के आईसीयू (ICU) में ही संभव है।
हालांकि इस बीमारी को पूरी तरह से रोकना कठिन है, लेकिन स्वच्छता और सही प्राथमिक उपचार से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है: