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भारत में क्यों तेज हुए छात्र आंदोलन? शिक्षा से रोजगार तक सड़क पर पहुंची युवाओं की नाराजगी

Student Protests India: झारखंड, बिहार, दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों में छात्र अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं भर्ती परीक्षा में अनियमितता है, तो कहीं पेपर लीक, फीस, विश्वविद्यालय प्रशासन और रोजगार बने मुद्दा। जानिए देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों की वजह, उनकी प्रमुख मांगें और क्यों ये आंदोलन राष्ट्रीय बहस का विषय बनते जा रहे हैं?
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Aug 06, 2026
Student Protests India
Student Protests India: भारत में तेज होते स्टूडेंट प्रोटेस्ट, किन मांगों को लेकर सड़क तक पहुंची इनकी नाराजगी? (AI Creative)

Student Protests India: भारत में छात्र आंदोलन कोई नई बात नहीं है। आजादी के आंदोलन से लेकर जेपी आंदोलन, मंडल आयोग विरोध और हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, छात्रवृत्ति, फीस वृद्धि और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े विवादों तक छात्रों ने समय-समय पर अपनी आवाज बुलंद की है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले आंदोलनों का केंद्र अलग था, जबकि आज सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा से रोजगार तक की पूरी व्यवस्था में भरोसा बन गया है। 2025-26 में देश के कई राज्यों में छात्र अलग-अलग कारणों से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन यदि इन आंदोलनों को ध्यान से देखें तो इनकी जड़ में कुछ समान सवाल हैं, क्या परीक्षाएं निष्पक्ष हैं? क्या भर्ती समय पर होगी? क्या मेहनत का सही मूल्य मिलेगा?

झारखंड: सबसे बड़ा छात्र आंदोलन

फिलहाल झारखंड देश का सबसे चर्चित छात्र आंदोलन देख रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी के आरोपों को लेकर हजारों अभ्यर्थी आंदोलनरत हैं।

रांची में धरना, तिरंगा मार्च और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रमों के जरिए छात्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। उनकी मांग है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

बिहार: पेपर लीक और रोजगार की लड़ाई

बिहार में वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नियुक्तियों में देरी बड़ा मुद्दा रहे हैं। छात्र चाहते हैं कि परीक्षाएं तय समय पर हों, परिणाम जल्दी आएं और भर्ती प्रक्रिया वर्षों तक लंबित न रहे। युवाओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई साल लगाने के बाद भी यदि परीक्षा रद्द हो जाए या भर्ती अटक जाए तो इसका असर केवल उम्मीदवार पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ता है।

दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर सवाल

राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए। संसद मार्च और जंतर-मंतर पर धरनों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा सुधार की बहस तेज हुई।

पंजाब: विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का मुद्दा

पंजाब विश्वविद्यालय में आंदोलन का केंद्र भर्ती नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सीनेट चुनाव रहे। छात्र लंबे समय से लंबित चुनाव कराने, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी वही चिंता
इन राज्यों में समय-समय पर शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, रेलवे भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परिणामों में देरी को लेकर अभ्यर्थी प्रदर्शन करते रहे हैं। भले ही आंदोलन अलग-अलग समय पर हुए हों, लेकिन उनकी मूल चिंता रोजगार और पारदर्शिता ही रही।

अलग-अलग राज्य, लेकिन मांगें लगभग एक जैसी

  • देशभर के छात्र आंदोलनों में पांच मांगें सबसे ज्यादा दिखाई देती हैं
  • पेपर लीक पर सख्त रोक
  • समयबद्ध भर्ती कैलेंडर
  • चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता
  • परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही
  • प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा या वापसी

आखिर आंदोलन बढ़ क्यों रहे हैं?

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है। हर साल लाखों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं देते हैं। कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की संख्या 20 लाख से भी अधिक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि परीक्षा रद्द होती है, पेपर लीक होता है या भर्ती वर्षों तक अटकती है तो उसका असर लाखों परिवारों पर पड़ता है। यही वजह है कि अब छात्र आंदोलन केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे शासन-प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल बनते जा रहे हैं।

इतिहास बताता है कि छात्र आंदोलनों ने कई बार बदली राजनीति

भारत में छात्र आंदोलनों का प्रभाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। गुजरात का नव निर्माण आंदोलन (1974), बिहार से शुरू हुआ जेपी आंदोलन, असम छात्र आंदोलन (1979-85) और मंडल आयोग विरोध (1990) जैसे आंदोलनों ने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तक बदल दी। यह इतिहास बताता है कि जब युवाओं की आवाज व्यापक जनसमर्थन हासिल करती है, तो उसका असर नीतियों और शासन दोनों पर पड़ता है।

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, बिहार में रोजगार, दिल्ली में परीक्षा सुधार और पंजाब में विश्वविद्यालय प्रशासन—मुद्दे अलग हो सकते हैं, लेकिन इन आंदोलनों का साझा संदेश साफ है। आज का युवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा, समय पर भर्ती और जवाबदेह व्यवस्था चाहता है। यही कारण है कि छात्र आंदोलन अब स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि देश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा बनते जा रहे हैं।

Updated on:
06 Aug 2026 04:48 pm
Published on:
06 Aug 2026 04:48 pm