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पानी और पालक से आगे… अब किडनी स्टोन रोकने का नया विज्ञान, क्या बदल रही है इलाज की पूरी सोच?

Kidney Stone Prevention: पालक खाने, कम पानी पीने से ही नहीं होती किडनी स्टोन, वैज्ञानिकों के शोध में सामने आए कई कारण। क्या आप जानते हैं कितने प्रकार की होती है किडनी स्टोन? जानिए अब वैज्ञानिक कैसे बदल रहे किडनी स्टोन से बचाव की परिभाषा? बता रहे गट माइक्रोबायोम की भी अहम भूमिका..
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Aug 04, 2026
Kidney Stone Prevention
Kidney Stone Prevention: गुर्दे में पथरी का अब नया इलाज, वैज्ञानिक शोधों ने बदली सोच (AI Graphic:)

Kidney Stone Prevention: वर्षों से किडनी स्टोन से बचाव का सबसे आम मंत्र यही रहा है, 'ज्यादा पानी पिएं और ऑक्सालेट वाली चीजें कम खाएं।' लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सलाह अकेले काफी नहीं है। नई रिसर्च बता रही है कि किडनी स्टोन केवल पानी की कमी या ऑक्सालेट से नहीं बनता, बल्कि आंत के माइक्रोबायोम (Gut Microbiome), नमक, पोटैशियम, साइट्रेट, मूत्र की रासायनिक संरचना और व्यक्ति के मेटाबॉलिज्म का भी इसमें बड़ा योगदान है। यानी किडनी स्टोन की रोकथाम अब एक ही फॉर्मूला नहीं, बल्कि पर्सनलाइज्ड प्रिवेंशन की ओर बढ़ रही है।

क्यों बदल रही है सोच?

हाल में प्रकाशित वैज्ञानिक समीक्षाओं और क्लिनिकल अध्ययनों के मुताबिक ज्यादातर मरीजों में केवल पानी बढ़ाने से समस्या पूरी तरह नहीं रुकती। एक बड़े क्लिनिकल ट्रायल में हाइड्रेशन बढ़ाने की कोशिश के बावजूद दोबारा स्टोन बनने की दर में अपेक्षित कमी नहीं दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पानी नहीं, बल्कि कुल यूरिन आउटपुट, भोजन की गुणवत्ता और व्यक्तिगत जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हैं।

नई रिसर्च किन बातों पर फोकस्ड Gut Microbiome की भूमिका पर

    वैज्ञानिकों का कहना है कि, आंत में रहने वाले कुछ अच्छे बैक्टीरिया ऑक्सालेट को तोड़ने में मदद करते हैं। यदि ये बैक्टीरिया कम हो जाएं तो शरीर ज्यादा ऑक्सालेट अवशोषित करता है और स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। इस दिशा में प्रोबायोटिक्स पर भी शोध चल रहा है।

    नमक सबसे बड़ा छिपा हुआ खतरा

      ज्यादा सोडियम खाने से पेशाब में कैल्शियम बढ़ता है, जिससे कैल्शियम स्टोन बनने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए विशेषज्ञ केवल ऑक्सालेट नहीं, नमक कम करने की सलाह भी दे रहे हैं।

      कैल्शियम से डरना नहीं चाहिए

        कई लोग दूध और दही छोड़ देते हैं, जबकि सामान्य मात्रा में भोजन से मिलने वाला कैल्शियम आंत में ऑक्सालेट को बांधकर उसके अवशोषण को कम कर सकता है।

        साइट्रेट और पोटैशियम की अहमियत

          नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल साइट्रेट देते हैं, जो क्रिस्टल बनने से रोकने में मदद करता है। फल और सब्जियां पोटैशियम भी बढ़ाती हैं, जिससे जोखिम कम हो सकता है।

          भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

          भारत 'स्टोन बेल्ट' वाले देशों में गिना जाता है। गर्म मौसम, कम पानी पीना, अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन तथा जीवनशैली में बदलाव किडनी स्टोन के मामलों को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ अब केवल पानी पीने की सलाह नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्टोन रिपोर्ट, 24 घंटे की यूरिन जांच और खानपान के अनुसार अलग-अलग रोकथाम रणनीति अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

          फैक्ट फाइल

          • लगभग 80% किडनी स्टोन कैल्शियम ऑक्सालेट के होते हैं।
          • एक बार स्टोन होने के बाद 5 वर्षों में 30–50% मरीजों में दोबारा स्टोन बनने का खतरा रहता है। �
          • पानी जरूरी है, लेकिन अकेले वही पर्याप्त समाधान नहीं माना जा रहा।

          हालांकि किडनी स्टोन की रोकथाम का अब भी सबसे महत्वपूर्ण उपाय है ज्यादा पानी पीना, लेकिन यह सोच 'ज्यादा पानी पीजिए' तक सीमित नहीं रही। नई रिसर्च बताती है कि माइक्रोबायोम, संतुलित कैल्शियम, कम नमक, पर्याप्त साइट्रेट, बेहतर आहार और व्यक्तिगत मेडिकल मूल्यांकन, इन सबका संयोजन भविष्य की रणनीति होगा। यानी किडनी स्टोन से बचाव का नया युग पर्सनलाइज्ड और साइंस-आधारित प्रिवेंशन का है।

          सिर्फ पानी नहीं, अब 'गट बैक्टीरिया' भी बचाएंगे किडनी स्टोन से!

          • किडनी स्टोन रोकने का नया फॉर्मूला, पानी से आगे बढ़ा मेडिकल साइंस
          • ऑक्सालेट का डर पुराना? किडनी स्टोन प्रिवेंशन की नई रिसर्च ने बदली सोच
          • किडनी स्टोन की नई पहेली, इलाज नहीं, रोकथाम का बदल रहा विज्ञान

          सिर्फ कैल्शियम ऑक्सालेट नहीं, 4 तरह के होते हैं किडनी स्टोन

            नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज और यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी गाइडलाइन के मुताबिक किडनी स्टोन 4 तरह के होते हैं।

            कैल्शियम ऑक्सालेट - 70-80% मामले - ऑक्सालेट, कम पानी, अधिक सोडियम
            यूरिक एसिड - 10-15% मामले - हाई प्यूरिन डाइट, गाउट, डायबिटीज
            स्ट्रुवाइट - 10% से कम मामले - बार-बार यूरिन इन्फेक्शन
            सिस्टीन - 1% से कम मामले - आनुवंशिक बीमारी

            जलवायु परिवर्तन और किडनी स्टोन का नया संबंध

              • तापमान बढ़ने से पसीना अधिक निकलता है।
              • शरीर में पानी की कमी होने पर पेशाब सघन (concentrated) हो जाता है।
              • इससे स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।
              • वैज्ञानिकों ने भविष्य में 'Kidney Stone Belt' के विस्तार की आशंका भी जताई है।

              क्या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से भी बढ़ सकता है खतरा?

                नई रिसर्च बताती है कि कुछ एंटीबायोटिक्स आंत के अच्छे बैक्टीरिया कम कर सकते हैं। यही बैक्टीरिया ऑक्सालेट को तोड़ते हैं। इसलिए भविष्य की रोकथाम में Gut Microbiome बड़ी भूमिका निभा सकता है।

                केवल कम पानी नहीं, ज्यादा नमक भी Kidney Stone का बड़ा कारण

                  • भारत में अधिकांश लोग जरूरत से ज्यादा नमक खाते हैं।
                  • ज्यादा सोडियम
                  • यूरिन में ज्यादा कैल्शियम
                  • कैल्शियम स्टोन बनने की संभावना बढ़ती है।

                  हर नींबू पानी एक जैसा फायदेमंद नहीं

                    बहुत लोग सोचते हैं कि सिर्फ नींबू पानी पीने से स्टोन नहीं होगा। जबकि सच यह है कि साइट्रेट फायदेमंद है, लेकिन यदि चीनी बहुत अधिक मिलाई जाए तो लाभ कम हो सकता है। बिना कम चीनी वाला पेय अधिक उपयुक्त माना जाता है।

                    बार-बार स्टोन बनने वालों को कौन-सी जांच करानी चाहिए?

                      • 24 घंटे की यूरिन जांच
                      • स्टोन की केमिकल एनालिसिस
                      • ब्लड कैल्शियम
                      • यूरिक एसिड
                      • पैराथायरॉयड हार्मोन (चयनित मामलों में)
                      • किडनी फंक्शन टेस्ट

                      भारत में सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को?

                        • 20-50 वर्ष आयु वर्ग
                        • गर्म क्षेत्रों में काम करने वाले
                        • कम पानी पीने वाले
                        • मोटापा
                        • डायबिटीज
                        • हाई ब्लड प्रेशर
                        • बार-बार स्टोन का इतिहास
                        • परिवार में पहले किसी को स्टोन होना

                        नया ट्रेंड: Precision Nutrition

                          • अब डॉक्टर सभी मरीजों को एक जैसी डाइट नहीं देते।
                          • स्टोन का प्रकार देखकर
                          • अलग डाइट
                          • अलग पानी की मात्रा
                          • अलग दवाएं
                          • अलग फॉलोअप
                          • यानी One Diet Fits All की जगह Personalized Prevention पर जोर है।

                          रोचक तथ्य ये भी

                          अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार पुरुषों में किडनी स्टोन का जोखिम महिलाओं की तुलना में अधिक रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में महिलाओं में भी मामले बढ़े हैं। यदि एक बार किडनी स्टोन हो चुका है, तो बिना उचित रोकथाम के अगले 5-10 वर्षों में दोबारा होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। अधिकांश छोटे स्टोन अपने आप निकल सकते हैं, लेकिन बड़े स्टोन के लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ सकती है।

                          किडनी स्टोन अब केवल पानी कम पीने की बीमारी नहीं मानी जा रही। नई रिसर्च बता रही है कि भविष्य की सबसे बड़ी लड़ाई माइक्रोबायोम, मेटाबॉलिज्म, व्यक्तिगत डाइट और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों को समझकर लड़ी जाएगी। यानी इलाज से ज्यादा महत्व अब वैज्ञानिक रोकथाम का होगा।

                          Updated on:
                          04 Aug 2026 04:02 pm
                          Published on:
                          04 Aug 2026 04:02 pm