
Autoimmune Disease Lung Immune Cells: अब तक माना जाता था कि ऑटोइम्यून बीमारियां मुख्य रूप से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के असंतुलन से जुड़ी हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि यह गड़बड़ी आखिर शुरू कहां से होती है। अब Nature Immunology में प्रकाशित एक नई रिसर्च ने संकेत दिया है कि फेफड़ों में रहने वाली विशेष Tissue-Resident Immune Cells (ऊतक-निवासी प्रतिरक्षा कोशिकाएं) कई ऑटोइम्यून और फेफड़ों की बीमारियों की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने 128 लोगों के फेफड़ों से प्राप्त ऊतकों में मौजूद 11 लाख (1.1 million) से अधिक इम्यून कोशिकाओं का विश्लेषण किया। यह अब तक के सबसे बड़े और उच्च-रिजॉल्यूशन अध्ययनों में से एक माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि फेफड़ों में रहने वाली ये प्रतिरक्षा कोशिकाएं केवल संक्रमण से लड़ने का काम नहीं करतीं, बल्कि इनमें ऐसे जीन भी सक्रिय हो सकते हैं जो लुपस (Lupus), रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis), स्क्लेरोडर्मा (Scleroderma) जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के आनुवंशिक जोखिम से जुड़े हैं। जब ये कोशिकाएं असामान्य व्यवहार करने लगती हैं, तो शरीर की रक्षा करने के बजाय लगातार सूजन पैदा कर सकती हैं।
अब तक अधिकांश इम्यून रिसर्च खून में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर आधारित रही हैं। लेकिन यह अध्ययन बताता है कि ऊतकों के भीतर रहने वाली इम्यून कोशिकाएं कई बार अलग तरह से व्यवहार करती हैं और बीमारी की असली शुरुआत वहीं से हो सकती है। इससे भविष्य में अधिक सटीक इलाज और शुरुआती पहचान की नई संभावनाएं बन सकती हैं।
शोध में महिला और पुरुष प्रतिभागियों की फेफड़ों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसे जीन पैटर्न देखे जो यह समझाने में मदद कर सकते हैं कि कई ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक क्यों पाई जाती हैं? हालांकि इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और अध्ययन आवश्यक है।
ऑटोइम्यून रोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करने लगती है।
इसका जवाब फिलहाल है 'नहीं'। दरअसल यह अध्ययन इलाज या नई दवा की घोषणा नहीं करता, बल्कि बीमारी की शुरुआती जैविक प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि भविष्य के अध्ययन इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं, तो इन्हीं कोशिकाओं को लक्ष्य बनाकर अधिक सटीक उपचार विकसित किए जा सकते हैं।
यह शोध बताता है कि ऑटोइम्यून बीमारियों की कहानी केवल खून में घूमने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं तक सीमित नहीं है। फेफड़ों में मौजूद 'टिश्यू-रेजिडेंट' इम्यून सेल्स भी बीमारी की शुरुआत और उसके विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि भविष्य के शोध इन निष्कर्षों को और मजबूत करते हैं, तो ऑटोइम्यून रोगों की जल्दी पहचान, जोखिम का आकलन और लक्षित उपचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।इस रिसर्च ने वैज्ञानिकों के चेहरे खिला दिए हैं।