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Oral Health And Heart Attack: क्या मसूड़ों के इन्फेक्शन से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?

क्या मसूड़ों से खून आना दिल की बीमारी का संकेत है? जानें ओरल हेल्थ और हार्ट अटैक के बीच का वैज्ञानिक संबंध के बारे में ।
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Aug 09, 2026
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दांत का दर्द या दिल का दौरा? (AI)

अक्सर हम दांतों और मसूड़ों की समस्याओं को केवल मुंह तक ही सीमित मानते हैं। थोड़ा सा मसूड़ों से खून आना, ब्रश करते समय दर्द होना या सांसों की बदबू को ज्यादातर लोग बहुत मामूली बात मानकर टाल देते हैं। लोग सोचते हैं कि ओरल हेल्थ (मुंह के स्वास्थ्य) में लापरवाही का ज्यादा से ज्यादा नतीजा कैविटी (दांतों की सड़न) या दांत का पीला पड़ना होगा। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम शोध और दंत चिकित्सकों (Dentists) की राय एक बिल्कुल अलग और चिंताजनक सच बयां करती है।

मेडिकल रिर्पोट्स के मुताबिक, खराब ओरल हेल्थ का असर केवल आपके दांतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपके हृदय (Heart) के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। मसूड़ों की सूजन और उनसे बहता खून वास्तव में आपके शरीर का एक सिग्नल है, जो यह दर्शाता है कि आपके मसूड़ों के जरिए हानिकारक बैक्टीरिया सीधे आपके रक्त प्रवाह (Bloodstream) में शामिल हो रहे हैं।

Gingivitis to Periodontitis : मसूड़ों से खून आना

मुंह में बैक्टीरिया का होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन जब नियमित रूप से दांतों की सफाई नहीं होती, तो दांतों और मसूड़ों के जोड़ पर एक पतली, चिपचिपी परत जम जाती है जिसे 'प्लाक' (Plaque) कहते हैं।

जिंजिवाइटिस (Gingivitis): जब प्लाक लंबे समय तक साफ नहीं होता, तो इसमें मौजूद बैक्टीरिया मसूड़ों में जलन और सूजन पैदा करते हैं। इस शुरुआती चरण को 'जिंजिवाइटिस' कहा जाता है। इसका सबसे पहला लक्षण ब्रश या फ्लॉस करते समय मसूड़ों से खून आना है।

पेरियोडोंटाइटिस (Periodontitis): यदि जिंजिवाइटिस का इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी बढ़कर 'पेरियोडोंटाइटिस' का रूप ले लेती है। इसमें मसूड़े दांतों की पकड़ छोड़ने लगते हैं और मसूड़ों व दांतों के बीच 'पॉकेट्स' (गहरे गड्ढे) बन जाते हैं। इन पॉकेट्स में संक्रमण गहरा जाता है और मसूड़ों के साथ-साथ दांतों को सहारा देने वाली हड्डियां भी गलने लगती हैं।

मसूड़ों की बीमारी और दिल के रोग का वैज्ञानिक कनेक्शन

बैक्टीरिया का रक्त प्रवाह में प्रवेश (Bacterial Translocation)

जब आपके मसूड़ों में सूजन होती है या उनसे खून बहता है, तो मसूड़ों की सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है। जब आप खाना चबाते हैं या ब्रश करते हैं, तो मुंह के खतरनाक बैक्टीरिया (जैसे Streptococcus mutans और Porphyromonas gingivalis) मसूड़ों की खुली रक्त वाहिकाओं के जरिए सीधे आपके ब्लडस्ट्रीम (रक्त प्रवाह) में प्रवेश कर जाते हैं। ये बैक्टीरिया खून के साथ तैरते हुए पूरे शरीर में घूमते हैं और जब ये दिल की धमनियों (Coronary Arteries) तक पहुंचते हैं, तो वहां की अंदरूनी दीवारों पर चिपक जाते हैं।

सिस्टमैटिक सूजन और प्लाक का जमना (Systemic Inflammation & Atherosclerosis)

जब ये बैक्टीरिया दिल की धमनियों में पहुंचते हैं, तो हमारा इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) इनसे लड़ने के लिए सूजन (Inflammation) प्रतिक्रिया शुरू करता है।

  • एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis): धमनियों में लगातार सूजन रहने के कारण वहां वसा (Fat), कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों की एक परत जमने लगती है जिसे 'प्रोकैल्सीफाइड प्लाक' कहते हैं।
  • धमनियों का सख्त होना: इस प्लाक के जमने से दिल की धमनियां धीरे-धीरे पतली और सख्त होने लगती हैं, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता।
  • ब्लड क्लॉट और हार्ट अटैक: यदि धमनियों में बना यह प्लाक टूट जाता है, तो वहां खून का थक्का (Blood Clot) बन सकता है। यह थक्का अगर दिल की नस को पूरी तरह बंद कर दे, तो व्यक्ति को हार्ट अटैक (Heart Attack) आ सकता है। वहीं, अगर यह थक्का दिमाग की नस में जाकर फंसे, तो स्ट्रोक (Brain Stroke) का खतरा पैदा हो जाता है।
  • इंफेक्टिव एंडोकार्डाइटिस (Infective Endocarditis) : यह एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति है। जब मुंह के बैक्टीरिया खून के जरिए दिल के अंदरूनी वाल्वों (Heart Valves) तक पहुंचते हैं, तो वे वाल्व पर संक्रमण और सूजन पैदा कर देते हैं। जिन लोगों के दिल में पहले से कोई जन्मजात बीमारी हो या जिनके आर्टिफिशियल वाल्व लगे हों, उनके लिए मसूड़ों की बीमारी बहुत घातक साबित हो सकती है।

क्या कहते हैं शोध और आंकड़े?

विभिन्न वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों द्वारा किए गए अध्ययनों में मसूड़ों की बीमारी और हृदय रोग के बीच सीधा संबंध देखा गया है:

  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA): AHA के शोध के अनुसार, जिन लोगों को पेरियोडोंटाइटिस (गंभीर गम डिजीज) होता है, उनमें दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक होता है।
  • सूजन के मार्कर्स: मसूड़ों के संक्रमण से पीड़ित मरीजों के खून में C-Reactive Protein (CRP) का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है। CRP का बढ़ा हुआ स्तर शरीर और दिल की धमनियों में गंभीर सूजन का स्पष्ट संकेत है।

मसूड़ों की बीमारी के शुरुआती संकेत: कब सावधान हों?

यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी का भी अनुभव कर रहे हैं, तो इसे केवल 'दांतों की समस्या' मानकर नजरअंदाज न करें:

  • ब्रश करते, फ्लॉस करते या सेब जैसी सख्त चीज खाते समय मसूड़ों से खून आना।
  • मसूड़ों का लाल होना, सूजना या छूने पर दर्द होना।
  • मसूड़ों का पीछे हटना (Receding Gums), जिससे दांत लंबे दिखाई देने लगते हैं।
  • लगातार मुंह से बदबू आना (Halitosis) या मुंह का स्वाद खराब रहना।
  • दांतों का हिलना या चबाते समय दांतों के संरेखण (Alignment) में बदलाव महसूस होना।
  • मसूड़ों और दांतों के बीच से पस (मावाद) निकलना।

बचाव और देखभाल: ओरल और हार्ट हेल्थ को स्वस्थ रखने की दिनचर्या

अच्छी खबर यह है कि मसूड़ों की बीमारी से बचा जा सकता है और यदि इसका शुरुआती दौर में पता चल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है। एक अच्छी ओरल हाइजीन रूटीन न केवल आपके दांतों को मजबूत रखेगी, बल्कि आपके दिल को भी सुरक्षित बनाएगी।

सही ब्रशिंग तकनीक

  • दिन में दो बार ब्रश करें: सुबह उठने के बाद और रात को सोने से ठीक पहले कम से कम 2 मिनट तक ब्रश जरूर करें।
  • सॉफ्ट ब्रिसल वाला ब्रश: हमेशा सॉफ्ट (मुलायम) ब्रिसल्स वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करें। ज्यादा सख्त ब्रिसल्स मसूड़ों को छील सकते हैं।
  • जेंटल मोशन: ब्रश को मसूड़ों पर 45-डिग्री के कोण पर रखें और हल्के हाथों से गोल-गोल (Circular) घुमाते हुए साफ करें।

फ्लॉसिंग (Flossing) को रूटीन में शामिल करें

ब्रश केवल आपके दांतों के ऊपरी और बाहरी हिस्सों की सफाई करता है। दो दांतों के बीच फंसा खाना और प्लाक केवल डेंटल फ्लॉस (धागा) से ही साफ हो सकता है। दिन में एक बार फ्लॉसिंग जरूर करें।

टंग क्लीनिंग और माउथवॉश : जीभ पर लाखों बैक्टीरिया जमा होते हैं। इसलिए रोज टंग क्लीनर से जीभ साफ करें। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह से एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश का इस्तेमाल करें।

आहार में बदलाव

  • शक्कर कम करें: मीठी चीजें और सॉफ्ट ड्रिंक्स मुंह में बैक्टीरिया का खाना बनती हैं।
  • फाइबर और विटामिन C लें: ताजे फल, हरी सब्जियां, और विटामिन C से भरपूर फल (जैसे आंवला, संतरा) मसूड़ों के उत्तकों (Tissues) को मजबूत बनाते हैं।
  • पानी खूब पिएं: पर्याप्त पानी पीने से मुंह में लार (Saliva) का निर्माण सही रहता है, जो प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया को साफ करती है।

नियमित डेंटल चेकअप

साल में कम से कम दो बार (हर 6 महीने में) डेंटिस्ट के पास जाकर प्रोफेशनल क्लीनिंग (Scaling) और चेकअप करवाएं। डेंटिस्ट प्लाक और टार्टर (जमा हुआ कठोर प्लाक) को आसानी से साफ कर देते हैं, जो साधारण ब्रश से नहीं हटता।

'मसूड़ों से खून आने' को केवल एक मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज करना आपकी सेहत के लिए एक बड़ी भूल साबित हो सकता है। हमारा मुंह हमारे पूरे शरीर का प्रवेश द्वार है, और इसकी स्वच्छता सीधे तौर पर हमारे दिल और समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। डेंटिस्ट्स और कार्डियोलॉजिस्ट्स की यह चेतावनी हमें याद दिलाती है कि ओरल हेल्थ केवल एक सुंदर मुस्कान के लिए ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और लंबे जीवन के लिए भी उतनी ही अनिवार्य है। आज ही से अपनी ओरल हाइजीन पर ध्यान दें और मसूड़ों से जुड़े किसी भी शुरुआती लक्षण पर तुरंत डेंटिस्ट से संपर्क करें।

Updated on:
09 Aug 2026 03:23 pm
Published on:
09 Aug 2026 03:17 pm