
Organic Eggs Environmental Impact: लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि ऑर्गेनिक और फ्री-रेंज अंडे पर्यावरण और पशु कल्याण के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस धारणा पर सवाल उठाया है। अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ परिस्थितियों में ऑर्गेनिक और फ्री-रेंज अंडों का कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरणीय प्रभाव पारंपरिक पद्धति से उत्पादित अंडों से अधिक हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ऑर्गेनिक अंडे हमेशा पर्यावरण के लिए सबसे खराब हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का पर्यावरणीय असर केवल उसके लेबल से नहीं, बल्कि उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से तय होता है।
शोधकर्ताओं ने अंडा उत्पादन के अलग-अलग तरीकों का तुलनात्मक विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि फ्री-रेंज और ऑर्गेनिक मुर्गियों को अधिक खुली जगह, ज्यादा जमीन और अलग तरह के चारे की जरूरत होती है। इससे भूमि उपयोग, संसाधनों की खपत और कुछ मामलों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ सकता है। दूसरी ओर, नियंत्रित वातावरण में होने वाली पारंपरिक पोल्ट्री फार्मिंग में कम जगह में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे प्रति अंडा संसाधनों की खपत कम हो सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। क्योंकि ऑर्गेनिक अंडों के कई फायदे भी माने जाते हैं। मुर्गियों के बेहतर रहने की व्यवस्था, एंटीबायोटिक के उपयोग पर सख्त नियम, पशु कल्याण के बेहतर मानक यानी पर्यावरण और पशु कल्याण दो अलग-अलग पहलू हैं। इनके बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक केवल 'ऑर्गेनिक' या 'फ्री-रेंज' लेबल देखकर किसी उत्पाद को पर्यावरण के लिए अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता। यह कुछ तथ्यों पर निर्भर करता है। इनमें मुर्गियों का चारा कहां से आया? उत्पादन में कितनी ऊर्जा लगी? पानी की खपत कितनी हुई? परिवहन की दूरी कितनी थी? पैकेजिंग कैसी थी? जैसे सवाल शामिल हैं।
ये उन मुर्गियों के अंडे हैं, जिन्हें पिंजरे में बंद रखने की बजाय खुले या अर्ध-खुले वातावरण में घूमने की आजादी दी जाती है।
मुर्गियां दिन के कुछ हिस्से में बाहर, जमीन पर घूम सकती हैं, धूप ले सकती हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें दिया गया चारा जैविक (ऑर्गेनिक) ही हो। फ्री रेंज सिर्फ रहने-सहने की परिस्थिति बताता है, चारे की क्वालिटी नहीं।
मुर्गी को जैविक (ऑर्गेनिक) चारा दिया जाता है। यानी बिना रासायनिक खाद, कीटनाशक या GMO के उगाई गई फसल दी जाती है।
एंटीबायोटिक्स और हार्मोन का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
आमतौर पर इन्हें भी खुले वातावरण में घूमने की सुविधा मिलती है। यानी ऑर्गेनिक अंडे अक्सर फ्री-रेंज भी होते हैं, पर हर फ्री-रेंज अंडा ऑर्गेनिक नहीं होता।
भारत में 'फ्री रेंज' और 'ऑर्गेनिक' लेबल के लिए अभी अमेरिका-यूरोप जितने सख्त और मानकीकृत सर्टिफिकेशन नियम पूरी तरह लागू नहीं हैं। कई ब्रांड सिर्फ पैकेट पर दावा लिख देते हैं, बिना असली प्रमाणन के। इसलिए भरोसेमंद ब्रांड या सर्टिफाइड (APEDA का NPOP जैविक प्रमाणन) फार्म से ही खरीदना बेहतर रहता है।
यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है कि पर्यावरणीय स्थिरता का आकलन केवल एक लेबल से नहीं किया जा सकता। ऑर्गेनिक और फ्री-रेंज अंडों के अपने फायदे हैं, लेकिन उनका पर्यावरणीय प्रभाव उत्पादन प्रणाली, संसाधनों के उपयोग और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए इस रिसर्च को अंतिम सत्य नहीं, बल्कि टिकाऊ खाद्य उत्पादन पर चल रही वैज्ञानिक चर्चा का हिस्सा माना जाना चाहिए।