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क्या किसी और का रेनकोट पहनना सुरक्षित है? त्वचा विशेषज्ञ ने बताया कब बढ़ जाता है इंफेक्शन का खतरा

Raincoat Sharing Tips: मानसून सीजन को आमतौर पर फंगल इंफेक्शन से लेकर कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम साथ लाने वाला मौसम माना जाता है। खास तौर पर स्किन इंफेक्शन तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में अचानक बारिश हो और रेनकोट शेयर करना पड़े तो? रेनकोट हाइजीन बिल्कुल न भूलें, जानिए रेनकोट शेयरिंग टिप्स
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 07, 2026

Raincoat Sharing

Raincoat Sharing: क्या आप जानते हैं रेनकोट शेयरिंग से स्किन इंफेक्श का खतरा? रेनकोट को कैसे करें सेनिटाइज(AI Creative)

Raincoat Sharing Tips: बारिश में अचानक भीगने पर अक्सर लोग दोस्त, सहकर्मी या परिवार के सदस्य का रेनकोट पहन लेते हैं। यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन अगर रेनकोट गीला, पसीने से भरा या लंबे समय से साफ न किया गया हो, तो यह त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में नमी, पसीना और बंद वातावरण फंगल और कुछ बैक्टीरियल संक्रमण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाते हैं। ऐसे में बिना साफ किए किसी दूसरे व्यक्ति का रेनकोट पहनना हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो संभल जाएं…

हर बार संक्रमण होगा, ऐसा नहीं

यह समझना जरूरी है कि केवल रेनकोट शेयरिंग से हर बार संक्रमण नहीं फैलता। लेकिन यदि रेनकोट लंबे समय तक गीला रहा हो, उसमें पसीना जमा हो या फिर हो सकता है कि उसे पहनने वाले व्यक्ति को पहले से कोई संक्रामक त्वचा रोग हो, तो जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए सावधानी बरतना अधिक महत्वपूर्ण है।

जानिए मानसून में रेनकोट शेयरिंग से किस तरह के इंफेक्शन का खतरा?

टीनिया (दाद)- गोल, लाल, खुजलीदार चकत्ते, जो नमी वाली जगहों पर तेजी से फैलते हैं।

फॉलिकुलाइटिस- बालों की जड़ों में सूजन और छोटे-छोटे दाने, अक्सर पसीने और घर्षण से।

कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस- किसी और के पसीने, बैक्टीरिया या रेनकोट में जमा गंदगी के सीधे संपर्क से त्वचा में जलन और लालिमा।

फंगल इंफेक्शन (सामान्य) - नम और बंद वातावरण में तेज़ी से बढ़ने वाले फंगस के कारण।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना जरूरी?

  • जिनकी त्वचा संवेदनशील है।
  • जिन्हें पहले से फंगल इंफेक्शन, एक्जिमा या एलर्जी रहती है।
  • छोटे बच्चे और बुजुर्ग।
  • मधुमेह (डायबिटीज) या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग।

दरअसल ये वे लोग हैं जिन्हें त्वचा संक्रमण जल्द और सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होने की संभावना है।

अगर किसी का रेनकोट पहनना ही पड़े तो क्या करें?

  • कोशिश करें कि रेनकोट अंदर से सूखा हो।
  • उपयोग के बाद उसे पूरी तरह सुखाएं।
  • घर पहुंचकर नहा लें और सूखे कपड़े पहनें।
  • अगर त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या दाने दिखें तो डॉक्टर से सलाह लें।
  • लंबे समय तक गीले कपड़ों या रेनकोट में न रहें।

क्या है रेनकोट को सैनिटाइज करने का सही तरीका

  • रेनकोट पहनने के तुरंत बाद इसे तह करके रखने के बजाए अच्छे से खोलकर हवादार जगह लटकाकर सुखाएं।
  • अंदरूनी हिस्से को हल्के गीले कपड़े और माइल्ड डिसइंफेक्टेंट से पोछकर साफ करें।
  • हफ्ते में एक बार धूप में जरूर सुखाएं
  • UV रोशनी कई फंगस और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती है।
  • कॉलर और अंदरूनी पट्टी जहां त्वचा सीधे रेनकोट के संपर्क में आती है उसे अलग से साफ करें, क्योंकि वहां पसीना सबसे ज्यादा जमा होता है।
  • जब रेनकोट पूरी तरह सूख जाए तब उसे किसी बैग या बंद जगह पर रखें।

सिर्फ रेनकोट ही नहीं, ये चीजें भी शेयर करने से बचें

  • तौलिया
  • कंघी
  • टोपी या कैप
  • मोजे
  • गीले कपड़े
  • दरअसल बारिश के मौसम में इन वस्तुओं को साझा करने से फंगल या अन्य त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

रेनकोट- छाता और गमबूट जानिए खतरा कितना अलग-अलग

रेनकोट-सबसे ज्यादा जोखिम, क्योंकि यह सीधे त्वचा और पसीने के संपर्क में आता है। इसके अंदर नमी बनी रहती है।

गमबूट या जूते- दूसरे नंबर पर यही बड़ा जोखिम। क्योंकि पैरों में नमी बंद रहने से फंगल इंफेक्शन का खतरा।

छाता- सबसे कम जोखिम, क्योंकि इसका त्वचा से सीधा संपर्क नहीं होता, हां लेकिन इसका भी हैंडिल साफ रखना न भूलें।

बारिश में त्वचा को स्वस्थ रखने के 5 आसान उपाय

  • बारिश में भीगने के बाद जल्द स्नान करें।
  • शरीर और त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं।
  • रोज साफ और सूखे कपड़े पहनें।
  • रेनकोट को उपयोग के बाद हवा में सुखाकर रखें।
  • लगातार खुजली, लालिमा या दाने होने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।

डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी?

  • खुजली या चकत्ते 2 या 3 दिन में अपने आप ठीक न हों।
  • दाने या इंफेक्शन तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगे।
  • त्वचा पर सूजन, दर्द या मवाद जैसा डिस्चार्ज दिखे।
  • बुखार या शरीर में सामान्य कमजोरी के साथ त्वचा संक्रमण हो।
  • बार-बार एक ही जगह पर संक्रमण लौट आए।

क्या कहते हैं मेडिकल एक्सपर्ट्स?

डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि मानसून में नमी के कारण फंगल संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं। इसलिए व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं को साझा करने से बचना, उन्हें साफ और सूखा रखना तथा अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना सबसे प्रभावी बचाव है।