
Perimenopause Hormone Therapy for Bone Health: क्या रजोनिवृत्ति (Menopause) आने का इंतजार किए बिना, उससे पहले के दौर यानी पेरीमेनोपॉज (Perimenopause) में ही हार्मोन थेरेपी (Menopause Hormone Therapy-MHT) शुरू कर देनी चाहिए? यह सवाल दुनिया भर में महिलाओं और डॉक्टरों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रहा है।
हाल ही में प्रकाशित विशेषज्ञ विश्लेषणों और नए क्लीनिकल गाइडलाइंस के अनुसार, सही मरीजों में सही समय पर दी गई Menopause Hormone Therapy (MHT) न केवल गर्मी के दौरे (Hot Flashes) और नींद की समस्या जैसी तकलीफों को कम कर सकती है, बल्कि हड्डियों की मजबूती बनाए रखने और मांसपेशियों के क्षरण (Muscle Loss) को धीमा करने में भी मददगार हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि यह इलाज हर महिला के लिए नहीं है और इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर व्यक्तिगत जोखिम-लाभ का आकलन करके ही शुरू किया जाना चाहिए।
यह वह संक्रमणकाल है जो मेनोपॉज से लगभग 4 से 10 साल पहले शुरू हो सकता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर लगातार बदलता रहता है। इसके कारण-
एस्ट्रोजन केवल प्रजनन से जुड़ा हार्मोन नहीं है। यह हड्डियों के टूटने की गति को नियंत्रित करता है और मांसपेशियों की कार्यक्षमता बनाए रखने में भी भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे एस्ट्रोजन घटता है तो सामने आती हैं ये समस्याएं-
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा होना जरूरी नहीं है। वे बताते हैं कि यदि किसी महिला में गंभीर मेनोपॉज संबंधी लक्षण हों, जल्दी मेनोपॉज होने की संभावना हो, ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम अधिक हो, या हड्डियों के कमजोर होने के संकेत हों, तो डॉक्टर MHT पर विचार कर सकते हैं।
लेकिन केवल भविष्य में हड्डियां मजबूत रखने के उद्देश्य से हर महिला को हार्मोन थेरेपी देना सही नहीं माना जाता। फैसला व्यक्तिगत स्वास्थ्य, उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिमों को देखकर लिया जाता है।
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक इन स्थितियों में MHT लेना सही नहीं-
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मजबूत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए केवल हार्मोन थेरेपी पर्याप्त नहीं है।
भारत में महिलाओं की औसत आयु बढ़ रही है। इसका मतलब है कि करोड़ों महिलाएं अपने जीवन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मेनोपॉज के बाद बिताती हैं। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस, फ्रैक्चर और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी समस्याएं सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। भारतीय मेनोपॉज सोसायटी की 2026 गाइडलाइन भी कहती है कि 60 वर्ष से कम आयु या मेनोपॉज के 10 वर्ष के भीतर उपयुक्त महिलाओं में जोखिम-लाभ का आकलन कर MHT पर विचार किया जा सकता है।
पेरीमेनोपॉज में हार्मोन थेरेपी को अब केवल गर्मी के दौरे कम करने वाली दवा नहीं माना जा रहा, बल्कि चुनिंदा महिलाओं में यह हड्डियों और मांसपेशियों की सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। फिर भी इसे 'सभी महिलाओं के लिए जरूरी इलाज' मानना सही नहीं होगा। सही समय, सही मरीज और विशेषज्ञ की सलाह, यही सुरक्षित और प्रभावी उपचार की कड़ी है।