
Astronomical Event : नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (NASA Jet Propulsion Laboratory) की स्काईवॉचिंग रिसर्च टीम ने अगस्त 2026 में होने वाली प्रमुख खगोलीय घटनाओं को लेकर जानकारी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त का महीना अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए बेहद खास रहेगा, क्योंकि इस दौरान सूर्य ग्रहण, पर्सिड उल्का वर्षा, चमकता हुआ शुक्र ग्रह और आंशिक चंद्र ग्रहण जैसी कई बड़ी घटनाएं देखने को मिलेंगी। सबसे खास बात यह है कि 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण और पर्सिड उल्का वर्षा अपने महत्वपूर्ण चरण में होंगी, जिससे यह तारीख खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास बन जाएगी।
नासा की टीम ने ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की कक्षा और उल्का वर्षा से जुड़े वर्षों के आंकड़ों के आधार पर इन घटनाओं का पूर्वानुमान तैयार किया है। यह किसी एक दिन का प्रयोग नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी खगोलीय गणनाओं और वैज्ञानिक अवलोकनों का नतीजा है। नासा ने अपने 2026 स्काईवॉचिंग अपडेट में बताया है कि अगस्त महीने में कई दुर्लभ खगोलीय घटनाएं एक के बाद एक देखने को मिलेंगी।
नासा के अनुसार अगस्त 2026 की सबसे बड़ी खगोलीय घटना 12 अगस्त को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगी। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाएगा, जिससे कुछ स्थानों पर सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा।
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इन क्षेत्रों में लोग दिन के समय कुछ मिनटों के लिए सूर्य को पूरी तरह ढका हुआ देख सकेंगे। ग्रहण के अधिकतम चरण की अवधि लगभग 2 मिनट 18 सेकंड होगी।
वहीं अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा, जहां चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को ढकेगा।
नासा का कहना है कि जहां भी सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, वहां इसे देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर वाले ग्रहण चश्मे या विशेष सौर फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी होगा। सामान्य धूप के चश्मे आंखों की सुरक्षा नहीं कर सकते।
12 अगस्त की रात आसमान में दूसरा बड़ा नजारा देखने को मिलेगा। इसी दिन पर्सिड उल्का वर्षा (Perseid Meteor Shower) अपने चरम पर पहुंचेगी। यह दुनिया की सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा देखी जाने वाली उल्का वर्षाओं में से एक मानी जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना तब होती है जब पृथ्वी स्विफ्ट-टटल धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल और छोटे-छोटे पत्थरों के कणों के बीच से गुजरती है। ये कण बेहद तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और हवा के साथ घर्षण के कारण जलने लगते हैं। इसी वजह से रात के आसमान में चमकती हुई रोशनी की लकीरें दिखाई देती हैं, जिन्हें आम भाषा में 'टूटते तारे' कहा जाता है।
इस बार पर्सिड उल्का वर्षा इसलिए भी खास होगी क्योंकि 12 अगस्त को अमावस्या है। चंद्रमा की रोशनी नहीं होने से आसमान पूरी तरह अंधेरा रहेगा और उल्काओं को साफ-साफ देखा जा सकेगा।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अंधेरी और साफ जगहों पर एक घंटे में 50 से 100 तक उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। हालांकि यह संख्या मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
उल्काएं मुख्य रूप से पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होंगी, लेकिन वास्तव में वे पूरे आसमान में अलग-अलग दिशाओं में चमकती नजर आएंगी।
अगस्त महीने में रात के आसमान का एक और बड़ा आकर्षण शुक्र ग्रह होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार 14 से 16 अगस्त के बीच शुक्र ग्रह अपनी सबसे बड़ी पूर्वी दूरी (Greatest Eastern Elongation) पर होगा। इसका मतलब है कि सूर्यास्त के बाद यह पश्चिमी आकाश में सबसे अधिक चमकीला और सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा देर तक दिखाई देगा।
शुक्र ग्रह इतना चमकीला होगा कि इसे बिना दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकेगा। वहीं, दूरबीन से देखने पर इसका आधा प्रकाशित भाग दिखाई देगा, जो छोटे चंद्रमा की तरह नजर आएगा। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह नजारा बेहद खास होगा।
अगस्त महीने की आखिरी बड़ी खगोलीय घटना 27 और 28 अगस्त को होने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण होगी।
इस दौरान पूर्णिमा का चंद्रमा पृथ्वी की छाया से गुजरेगा। ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) में होगा। इसकी वजह से चंद्रमा सामान्य दिनों की तुलना में काफी धुंधला दिखाई देगा और उसके कुछ हिस्सों पर हल्का तांबे या लाल रंग भी नजर आ सकता है।
यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सुरक्षा उपकरण की जरूरत नहीं होती। इसे नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।
इस घटना का अधिकतम समय लगभग दो मिनट 18 सेकंड तक रहेगा। भारत में सूर्य ग्रहण आंशिक रूप में दिखाई देगा, जिसमें अधिकतम लगभग 14% सूर्य की रोशनी ही ढकी जाएगी विशेषकर कश्मीर क्षेत्र में।
सूर्य ग्रहण के कुछ ही घंटे बाद, 12–13 अगस्त की रात पर्सिड उल्का वर्षा अपने चरम पर होगी। यह उल्का वर्षा तब होती है जब पृथ्वी स्विफ्ट–टटल धूमकेतु द्वारा छोड़े गए मलबे के धारा से गुजरती है। इस वर्ष यह घटना नए चंद्रमा (New Moon) के समय घटित हो रही है, जिससे आसमान पूरी तरह अँधेरा रहेगा और उल्काओं को देखने की स्थिति आदर्श होगी।
अँधेरे और प्रकाश प्रदूषण से दूर, ग्रामीण या पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय 50 से 100 उल्काएं प्रति घंटे की दर से दिखाई दे सकती हैं। विशेष रूप से लद्दाख जैसे साफ़ आसमान वाले स्थान इस अनुभव को और भी शानदार बना सकते हैं।
5 अगस्त: अंतिम चौथाई (लास्ट क्वार्टर) का चंद्रमा देर रात और तड़के सुबह पूरे भारत में देखा जा सकेगा।
12 अगस्त (दिन): पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों से नजर आएगा।
12–13 अगस्त (रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक):पर्सिड उल्का वर्षा का सबसे शानदार नजारा पूरे भारत में देखा जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए शहरों की रोशनी से दूर किसी खुले और अंधेरे स्थान पर जाना बेहतर रहेगा। उत्तर भारत के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में दृश्य और भी साफ हो सकता है।
14–16 अगस्त (सूर्यास्त के लगभग 30–45 मिनट बाद):शुक्र ग्रह पश्चिमी आसमान में सबसे ज्यादा चमकीला दिखाई देगा। इसे पूरे भारत में बिना किसी उपकरण के आसानी से देखा जा सकेगा।
27–28 अगस्त (रात): आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका के कई हिस्सों से देखा जाएगा।
12 अगस्त की रात शहरों की रोशनी से दूर किसी खुले और अंधेरे स्थान पर जाएं।
रात 12 बजे के बाद से सुबह तक आसमान पर नजर रखें। ..
आंखों को अंधेरे में ढलने के लिए 20–30 मिनट का समय दें।
मोबाइल फोन, टॉर्च या अन्य तेज रोशनी का कम से कम इस्तेमाल करें।
यदि संभव हो तो पहाड़ी या ग्रामीण क्षेत्रों से आसमान का अवलोकन करें, जहां प्रकाश प्रदूषण कम हो।
यदि आप उन देशों में हैं जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, तो केवल प्रमाणित सोलर फिल्टर वाले ग्रहण चश्मे का ही उपयोग करें।
अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए अगस्त 2026 बेहद यादगार महीना साबित हो सकता है। एक ही महीने में सूर्य ग्रहण, पर्सिड उल्का वर्षा, चमकता हुआ शुक्र ग्रह और आंशिक चंद्र ग्रहण जैसी चार बड़ी खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही महीने में इतनी महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रम बहुत कम देखने को मिलता है। यही वजह है कि दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों की नजर अगस्त 2026 पर टिकी हुई है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी खगोलीय घटनाएं सिर्फ देखने भर का रोमांच नहीं देतीं, बल्कि ब्रह्मांड की कार्यप्रणाली को समझने का भी अवसर प्रदान करती हैं। ग्रहों, चंद्रमा और धूमकेतुओं की गति का अध्ययन वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के बारे में नई जानकारियां जुटाने में मदद करता है। अगस्त 2026 में होने वाली ये घटनाएं न केवल वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होंगी, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रकृति और अंतरिक्ष के अद्भुत नजारों को करीब से देखने का दुर्लभ अवसर लेकर आएंगी। खासकर पर्सिड उल्का वर्षा और चमकता हुआ शुक्र ग्रह भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस महीने के सबसे बड़े आकर्षण साबित हो सकते हैं।