
क्या कोई चीज़ समय को पीछे ले जा सकती है? या किसी जगह पहुंचने से पहले ही वहां से बाहर निकल सकती है? सुनने में यह किसी काल्पनिक फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन भौतिक विज्ञान की दुनिया में एक ऐसा हैरान कर देने वाला प्रयोग हुआ है, जिसने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। टोरंटो विश्वविद्यालय (University of Toronto) और ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय (Griffith University) के रिसर्चर्स की एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम ने 'क्वांटम भौतिकी' से जुड़ा एक बेहद अनोखा प्रयोग सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस ऐतिहासिक अध्ययन का नेतृत्व फोरेंसिक और क्वांटम विशेषज्ञों प्रोफेसर एफ्रेम स्टाइनबर्ग, प्रोफेसर हॉवर्ड एम. वाइजमैन, डेनिएला एंगुलो और काइल थॉम्पसन की टीम ने किया है।
आसान शब्दों में समझें तो, वैज्ञानिकों ने जब प्रकाश के सबसे छोटे कणों (फोटॉन्स) को 'रुबिडियम परमाणुओं' (Rubidium Atoms) के एक विशेष बादल के बीच से गुजारा, तो एक बेहद अजीब घटना घटी।
सामान्य नियम यह कहता है कि जब प्रकाश किसी चीज़ के अंदर जाता है, तो उसे वहां से बाहर निकलने में थोड़ा समय लगता है। लेकिन इस प्रयोग में फोटॉन इतनी तेजी से बाहर निकल गए कि ऐसा लगा मानो उन्होंने उस परमाणु बादल के अंदर 'शून्य से भी कम' समय यानि ऋणात्मक समय (Negative Time) बिताया हो! इसका मतलब यह था कि औसतन, कण अंदर प्रवेश करने से पहले ही दूसरी तरफ से बाहर निकलते हुए दिखाई दिए।
दरअसल, 1993 के आसपास जब वैज्ञानिकों को पहली बार ऐसा प्रभाव दिखा था, तब इसे केवल एक भ्रम या मापने की गलती मानकर खारिज कर दिया गया था। माना गया था कि प्रकाश की तरंग का अगला हिस्सा तेजी से निकल जाता है, इसलिए ऐसा लगता है। टोरंटो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एफ्रेम स्टाइनबर्ग की टीम इस जवाब से संतुष्ट नहीं थी। उन्होंने इस भ्रम को परखने के लिए परमाणुओं की जांच का एक नया और बेहद सूक्ष्म तरीका निकाला। रिसर्च के अनुसार कमज़ोर मापन तकनीक (Weak Measurement Technique): परमाणुओं को बिना कोई नुकसान पहुंचाए या बिना कोई गड़बड़ी पैदा किए, वैज्ञानिकों ने एक बेहद पतली लेजर बीम के जरिए यह नापा कि फोटॉन वास्तव में परमाणुओं के साथ कितनी देर रुका।
क्वांटम भौतिकी का अद्भुत करिश्मा: जब प्रकाश के कणों ने समय को पीछे छोड़ दिया! ( विजुअल: Google Gemini AI.)
इस रिसर्च में लाखों बार यह प्रयोग दोहराने के बाद जो परिणाम आया, उसने सबको हैरान कर दिया। परमाणुओं की जांच ने भी इस बात की सौ प्रतिशत पुष्टि की कि ठहराव का समय सचमुच ऋणात्मक ही था।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हमने कोई टाइम मशीन बना ली है या हम समय में पीछे यात्रा कर सकते हैं। यह खोज भौतिकी के बुनियादी नियमों (Standard Laws of Physics) को नहीं तोड़ती है।
इस रिसर्च ने यह साबित कर दिया है कि क्वांटम दुनिया के सबसे रहस्यमयी और अजीब प्रभावों को भी अब प्रयोगशाला में सटीक रूप से मापा जा सकता है। यह खोज भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और प्रकाश से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में बेहद मददगार साबित होगी।
रिसर्च टीम व संस्थान: टोरंटो यूनिवर्सिटी और ग्रिफ़िथ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक (प्रो. एफ्रेम स्टाइनबर्ग, प्रो. हॉवर्ड एम. वाइजमैन, डेनिएला एंगुलो और टीम)।
मेन रिसर्च: फोटॉन से परमाणुओं के बीच ऋणात्मक समय (Negative Time) बिताने के प्रभाव 'कमज़ोर मापन' (Weak Measurement) के जरिये पहली बार भौतिक रूप से मापा गया।